उज्जवला होम की आड़ में देह व्यापार, आरोपी मौर्य व फरार महिला कर्मचारियों की जमानत अर्जी हाईकोर्ट ने खारिज की, पीड़ितों की मांग- एट्रोसिटी एक्ट भी दर्ज की जाये,

उज्जवला होम की आड़ में देह व्यापार, आरोपी मौर्य व फरार महिला कर्मचारियों की जमानत अर्जी हाईकोर्ट ने खारिज की, पीड़ितों की मांग- एट्रोसिटी एक्ट भी दर्ज की जाये,


उज्जवला होम की आड़ में देह व्यापार, आरोपी मौर्य व फरार महिला कर्मचारियों की जमानत अर्जी हाईकोर्ट ने खारिज की, पीड़ितों की मांग- एट्रोसिटी एक्ट भी दर्ज की जाये,

बिलासपुर, 31 जुलाई। शहर के बहुचर्चित उज्जवला होम देह व्यापार मामले में आश्रय गृह के संचालक जितेन्द्र मौर्य और उनकी महिला सहयोगियों की जमानत अर्जी हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। दोनों महिला कर्मचारी अभी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं, जबकि मौर्य जेल में निरुद्ध है। इस मामले में पुलिस की शुरुआती भूमिका संदिग्ध थी लेकिन पीड़ित महिलाओं द्वारा प्रेस कांफ्रेंस लिये जाने के बाद आरोपियों के विरुद्ध रेप सहित कई गंभीर आरोपों में अपराध दर्ज किया गया।

सरकंडा स्थित उज्ज्वला होम में परिवार से प्रताड़ित तथा भटकी हुई महिलाओं को आश्रय दिया जाता था। इसका संचालन 2014 से शिवमंगल शिक्षण समिति का अध्यक्ष जितेन्द्र मौर्य कर रहा था। वहां चल रही आपत्तिजनक गतिविधियों का खुलासा जनवरी माह में हुआ था। 16 जनवरी 2021 को एक युवती का अपने पति से विवाद हो गया। वह घर से निकलकर सरकंडा इलाके के राजकिशोर नगर में भटक रही थी। तभी उसे एक महिला, उसके रहने और नौकरी दिलाने का भरोसा  देकर उज्ज्वला गृह छोड़ गई थी। दूसरे दिन उसका पति अपने परिवार के साथ जब उसे लेने उज्ज्वला गृह पहुंचा तो वहां अधीक्षक ने सबूत के तौर पर उनसे आधार कार्ड आदि की मांग की जिससे जबरदस्त विवाद हो गया।  सरकंडा थाने में पहुंचकर उक्त पीड़ित महिला के पति ने घटना की जानकारी दी। साथ ही बताया कि वहां और कई महिलायें कैद हैं और वहां से निकलना चाहती हैं। सरकंडा क्षेत्र की तत्कालीन सीएसपी निमिषा पांडे ने महिला उत्पीड़न जैसे गंभीर मामले में सावधानी नहीं बरती उल्टे संचालक जितेन्द्र मौर्य तथा वहां मौजूद महिला कर्मचारियों के बयान के आधार पर दोनों पक्षों के विरुद्ध गाली गलौज का मामला दर्ज किया। शिकायतकर्ता महिला के पति व उसके परिवार वालों के विरुद्ध उज्ज्वला गृह में बलात् प्रवेश का मामला दर्ज कर लिया।

मामले तब नया मोड़ लिया जब दो दिन बाद तीन महिलाओं ने बिलासपुर प्रेस क्लब में उपस्थित होकर पुलिस और उज्ज्वला होम संचालक पर गंभीर आरोप लगाये। एक ने बताया कि संचालक मौर्य ने उसके साथ दुष्कर्म किया। उसे एक अन्य युवक के साथ प्रदेश के बाहर जाने का दबाव बना रहा है। अन्य युवतियों ने भी शारीरिक शोषण, प्रताड़ना व खाने में नशीला पदार्थ मिलाकर खिलाने के आरोप लगाये।  प्रेस कांफ्रेंस में महिलाओं की शिकायत पर कार्रवाई नहीं होने व पुलिस पर उंगली उठाये जाने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया। इस मामले में मुख्यमंत्री तथा गृह मंत्री को भी बयान देना पड़ा। महिला बाल विकास विभाग की संचालक दिव्या मिश्रा को पीड़ित महिलाओं का बयान दर्ज करने के लिये भेजा गया। चारों महिलाओं का मजिस्ट्रेट बयान दर्ज कराया गया। जितेन्द्र मौर्य के खिलाफ पहले से दर्ज धारा 342, 294 के बाद आईपीसी 376, 354 और 34 दर्ज कर लिया गया। रात में ही उसको गिरफ्तार कर लिया गया। उनके आश्रय घर में काम करने वाली नीलम कुंटे व आरती वर्मा के विरुद्ध दुष्कर्म में सहयोग करने तथा प्रताड़ित करने का अपराध दर्ज किया गया लेकिन पुलिस के पहुंचने से पहले ही दोनों गायब हो गईं। पुलिस इन्हें अब तक गिरफ्तार नहीं कर पाई है। गुरुवार को हाईकोर्ट में जस्टिस गौतम भादुड़ी की कोर्ट से इस मामले में आया और केन्द्रीय जेल बिलासपुर में निरुद्ध जितेन्द्र मौर्य की जमानत अर्जी तथा फरार दोनों महिला कर्मचारियों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई।

अजा-जजा अत्याचार दर्ज क्यों नहीं- अधिवक्ता प्रियंका

पीड़ित चारों युवतियों को साथ दे रहीं हाईकोर्ट अधिवक्ता प्रियंका शुक्ला ने सवाल उठाया है कि इनमें से दो युवतियां अनुसूचित जाति वर्ग की हैं लेकिन पुलिस ने इससे सम्बन्धित धारायें दर्ज नहीं की। इसे लेकर वे सक्षम अधिकारियों से बात कर रही हैं। उन्होंने पुलिस अधीक्षक को मैसेज भेजकर यह भी जानकारी मांगी है बीते 6 माह के भीतर आरोपी महिलाओं की कर्मचारियों को गिरफ्त में लेने के लिये पुलिस ने क्या-क्या प्रयास किये इसका विवरण दिया जाये।