🔴उत्कल सांस्कृतिक परिषद में दिखी परंपरा और संस्कृति की झलक
भिलाईनगर, 17 अगस्त 2026। सेक्टर-6 स्थित उत्कल सांस्कृतिक परिषद, जगन्नाथ मंदिर परिसर में हरियाली उत्सव धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत भगवान शिव का जलाभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र के जाप के साथ हुई। उत्कलवासी महिला भक्तों ने भगवान शिव की विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रसाद चढ़ाया और श्रद्धालुओं में वितरित किया।
शाम करीब 4 बजे से सुहागिन महिलाओं ने पारंपरिक उत्साह के साथ हरियाली उत्सव मनाया। हरे रंग की साड़ियों और चूड़ियों में सजी महिलाओं ने मेहंदी लगाकर सावन के गीत गाए और झूला झूलकर उत्सव का आनंद लिया। इस दौरान महिलाओं ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए।
शिव-पार्वती के पुनर्मिलन से जुड़ी है हरियाली तीज की परंपरा
कार्यक्रम के दौरान हरियाली तीज के धार्मिक एवं पौराणिक महत्व की जानकारी भी दी गई। मान्यता के अनुसार हरियाली तीज का संबंध भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन से है। पौराणिक कथा के मुताबिक माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए 108 जन्मों तक कठोर तपस्या की थी। सावन शुक्ल पक्ष की तृतीया को उनकी तपस्या पूर्ण हुई और भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया।
इसी मान्यता के चलते हरियाली तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। महिलाएं सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना के साथ व्रत एवं पूजा करती हैं।
सावन में झूला झूलने की परंपरा
सावन के महीने में झूला झूलने की परंपरा भारतीय लोक संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। हरियाली से भरे वातावरण में महिलाएं समूह में सावन के पारंपरिक गीत गाते हुए झूला झूलती हैं। कार्यक्रम में भी महिलाओं ने ‘सावन’ और ‘हरियाली’ के गीतों के साथ झूला झूलकर उत्सव का आनंद लिया।
धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने भी सावन के महीने में राधा रानी को झूला झुलाया था। इसी से जुड़ी झूला झूलने की परंपरा आज भी विभिन्न क्षेत्रों में उत्साह के साथ निभाई जाती है।
उत्सव के दौरान महिलाओं ने सामूहिक रूप से विभिन्न प्रकार के पारंपरिक व्यंजनों का आनंद भी लिया। पूरे कार्यक्रम में महिलाओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली। आयोजन समस्त उत्कलवासी महिलाओं द्वारा किया गया, जिसमें धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक मेलजोल और सांस्कृतिक परंपराओं की सुंदर झलक देखने को मिली।

