ट्रेन के AC कोच में क्यों मिलती हैं 2 चादरें? ज्यादातर लोग नहीं जानते इनका असल काम

ट्रेन के AC कोच में क्यों मिलती हैं 2 चादरें? ज्यादातर लोग नहीं जानते इनका असल काम


सीजी न्यूज ऑनलाइन 27 जुलाई 2026 । जब भी आप एसी कोच में सफर करते हैं, तो रेलवे की तरफ से आपका स्वागत एक साफ-सुथरे बेडरोल के साथ किया जाता है।

भारतीय रेलवे के एसी कोच में सफर करना बेहद आरामदायक होता है। जब भी आप एसी कोच में ट्रैवल करते हैं, तो रेलवे की तरफ से आपको एक बेडरोल दिया जाता है। इस बेडरोल में एक तकिया कवर, एक कंबल, दो चादरें और एक तौलिया मिलता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि रेलवे एक यात्री को आखिर दो चादरें क्यों देता है?

ज्यादातर यात्री इन चादरों का इस्तेमाल अपने-अपने हिसाब से करते हैं। कुछ लोग दोनों चादरों को सीट पर ही बिछा लेते हैं, तो कुछ एक को सीट पर और दूसरी को कंबल के साथ ऊपर से ओढ़ लेते हैं। अगर आप भी ऐसा करते हैं, तो ठहर जाइए। हाल ही में रेल मंत्रालय ने संसद में यह स्पष्ट किया है कि बेडरोल में दो चादरें क्यों दी जाती हैं और इनका सही इस्तेमाल कैसे करना चाहिए।

AC कोच में कैसे करें दोनों चादरों का सही इस्तेमाल?

रेल मंत्रालय के मुताबिक, भारतीय रेलवे एसी क्लास में सफर करने वाले यात्रियों को हमेशा स्वच्छ और साफ बिस्तर मुहैया कराता है। हर बेडरोल किट में मिलने वाली दो चादरों का काम अलग-अलग होता है:

▪️पहली चादर: यह चादर आपको अपनी स्लीपर सीट पर बिछाने के लिए दी जाती है।

▪️दूसरी चादर: इस एक्स्ट्रा चादर का इस्तेमाल आपको ओढ़ने वाले कंबल के ठीक नीचे करना होता है, ताकि कंबल और आपके शरीर के बीच एक हाइजीन बनी रहे।

क्यों जरूरी है ऐसा करना?

इसके पीछे सेहत और साफ-सफाई से जुड़ी एक बहुत अहम वजह है। दरअसल, ट्रेन में दिए जाने वाले ऊनी कंबल को हर यात्रा के बाद धोया नहीं जाता है। ऐसे में अगर आप सीधे कंबल ओढ़ते हैं, तो वह आपके शरीर के सीधे संपर्क में आता है। दूसरी चादर का मुख्य काम उसी कंबल को आपके शरीर से टच होने से रोकना है।

रेलवे इन चादरों को एक बार इस्तेमाल होने के बाद हमेशा धोता है। इसलिए अगली बार जब आप एसी कोच में सफर करें, तो हमेशा कंबल के नीचे दूसरी चादर लगाकर ही ओढ़ें।

अब आ रहे हैं ‘कवर’ वाले कंबल

यात्रियों के अनुभव को और बेहतर बनाने के लिए रेलवे ने एक नई पहल शुरू की है। अब यात्रियों को कंबल के साथ ‘कंबल कवर’ भी दिए जा रहे हैं। इससे यात्रियों को अलग से चादर लगाने की कोई जरूरत नहीं पड़ेगी।

फिलहाल यह नई सुविधा उत्तर पश्चिम रेलवे की कुछ ट्रेनों और कामाख्या से हावड़ा के बीच चलने वाली नई ‘वंदे भारत स्लीपर ट्रेन’ में दी जा रही है। रेलवे की इस पहल की यात्रियों द्वारा खूब तारीफ की जा रही है।

कितने दिनों में बदल दिए जाते हैं रेलवे के चादर और कंबल?

क्या आपको पता है कि रेलवे एक तय समय के बाद चादर, तौलिया और कंबल को पूरी तरह से रिप्लेस कर देता है? आइए जानते हैं इनका समय:

▪️तौलिया और तकिये का कवर: हर 9 महीने में।
▪️हैंडलूम लिनन: हर 12 महीने में।
▪️पॉलीवास्ट्रा (खादी और ग्रामोद्योग आयोग – KVIC द्वारा सप्लाई): हर 24 महीने में।
▪️तकिया और ऊनी कंबल: हर 24 महीने में।