आखिर ऐसी कौन सी मजबूरी थी ? तीसरी मुलाकात में ही मुकेश की करनी पड़ी हत्या

आखिर ऐसी कौन सी मजबूरी थी ? तीसरी मुलाकात में ही मुकेश की करनी पड़ी हत्या


सीजी न्यूज ऑनलाइन 05 जनवरी 2025 । मुकेश चंद्राकर की हत्या के पीछे बड़ा सवाल हैं, कि आखिर दोनों भाइयों ने केवल तीसरी मुलाक़ात में मुकेश हत्या कर दी।

सूत्र बताते हैं कि मुकेश की हत्या की साजिश का षड्यंत्र वारदात के दो दिन पहले से ही बना लिया गया था। आरोपियों ने पूरा प्लान तैयार कर लिया था कि किस तरह इस घटना को अंजाम दिया जाए।

यह रहस्य की बात है कि मुकेश की हत्या के बाद हत्यारों को अलग अलग लोकेशन दिखाना था। हत्या के दिन सुरेश और दिनेश दोनों भाइयों का लोकेशन जगदलपुर में था।
हत्या के बाद फरार होने का मास्टरप्लान बना चुके रितेश अपनी चार पहिया वाहन थार लेकर रायपुर रवाना हुआ वहां से दिल्ली चला गया। एक जनवरी को हत्या के बाद रितेश ने अपने भाइयों को काम तमाम करने की सूचना दे डाली थी। जगदलपुर में रह रहा छोटा भाई दिनेश वहां से सुबह निकल गया। बीजापुर से दोनों हत्यारे रितेश चंद्राकर और महेन्द्र रामटेके निकले। इनकी मुलाक़ात शायद बोदली के पास हुई, फिर दोनों ने आकर मुकेश की लाश का बंदोबस्त किया, फिर फरार हो गए।

30 दिसम्बर को सुरेश से बात हुई, 31 को रितेश के साथ पार्टी की और एक जनवरी को हत्या।

इधर सूत्र बताते हैं कि 30 दिसम्बर की रात मुकेश चंद्राकर की बात ठेकेदार सुरेश चंद्राकर से हुई। अगले दिन यानि साल के आखिरी दिन नए साल की पार्टी सुरेश के छोटे भाई रितेश के साथ रही। दोनों ने 31 की रात पार्टी मनाई, फिर अगले दिन तीसरी मुलाक़ात 1 जनवरी को रितेश ने फोन कर मुकेश को बुलाया, साथ में कुछ बातें हुई, फिर दोनों के बीच झड़प हुई, वहां मौजूद महेन्द्र रामटेके भी उस खींचातानी में रहा, फिर दोनों ने मिलकर उसकी पिटाई कर दी, फिर रॉड से उसकी हत्या की। इस पूरे तीन दिन की मुलाक़ात में ऐसा क्या हुआ, जिसमें मुकेश की हत्या करने की नौबत आ गई।

इस घटनाक्रम में पुलिस की जाँच रिपोर्ट का इंतजार है कि किस तरह तीन मुलाकातों में मुकेश ने अपनी जान गवाई है।

फिलहाल इस मामले में ठेकेदार सुरेश चंद्राकर के दोनों भाई और साथी महेन्द्र रामटेके को जेल भेजा गया है। अभी भी सुरेश चंद्राकर पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।

पुलिस का दावा है कि जल्द ही सुरेश को पकड़कर न्यायालय में पेश करेगी। अब देखना है कि जाँच में क्या तथ्य सामने आते हैं?