छत्तीसगढ़ में सहकारिता समाप्त करने विष्णु देव सरकार का षड्यंत्र – भूपेश बघेल

छत्तीसगढ़ में सहकारिता समाप्त करने विष्णु देव सरकार का षड्यंत्र – भूपेश बघेल


दुर्ग, 17 नवंबर। छत्तीसगढ़ में सहकारिता को समाप्त करने का षड्यंत्र विष्णु देव साय सरकार कर रही है। इसलिए सरकार के द्वारा सहकारी कर्मचारी से रिकवरी का तुगलगी फरमान जारी किया गया है। ताकि अडानी धान की एक तरफ खरीदी कर सके।

मानस भवन दुर्ग में सहकारी समिति कर्मचारी संघ दुर्ग के संभाग स्तरीय अनिश्चितकालीन आंदोलन के समर्थन में पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि एक तरफ जहां किसान की फसल तैयार हो चुकी है। किसान फसल को सोसाइटी में ले जाने की तैयारी कर रहे हैं। एग्रोटेक में किसानों का पंजीयन होना है। वहीं सरकार के गलत निर्णय के कारण हजारों लाखों किसान छूट रहे हैं जिसके कारण वह धान की फसल नहीं बेच पाएंगे।

विष्णु सरकार का तुगलगी फरमान

दूसरी समस्या यह है कि सरकार के द्वारा तुगलगी फरमान जारी कर दिया गया है। जिसके कारण सहकारी कर्मचारी हड़ताल पर है। सरकारी कर्मचारियों की मांग जायज है। हमारे शासनकाल में कंप्यूटर ऑपरेटर की कार्य करने की अवधि 9 माह होती थी। जिसे बढ़ाकर 12 माह कर दिया गया था। परंतु वर्तमान भाजपा सरकार के द्वारा कंप्यूटर ऑपरेटर की कार्य करने की अवधि को घटकर मात्र 6 माह कर दिया गया है।

सहकारिता को समाप्त करने का सरकारी षड्यंत्र

श्री बघेल ने कहा कि दूसरी बात सुखद का मामला उसकी रिकवरी समिति के कर्मचारियों से करने का तुग़लगी फरमान जारी कर दिया गया। रिकवरी समिति कर्मचारियों से करेंगे तो सहकारिता का मामला खत्म हो जाएगा। यह फरमान जानबूझकर षडयंत्र जारी किया गया है पूरे सहकारिता सिस्टम को खत्म करने का षड्यंत्र रचा गया है ताकि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ में धान खरीदी अडानी कर सके। यह सहकारिता को खत्म कर छत्तीसगढ़ में धान खरीदी अडानी कर सके यह सारा षड्यंत्र विष्णु देव साय की सरकार का है। इसमें प्रदेश के अधिकारियों की भी मिली भगत है। यह सारी व्यवस्था अडानी के लिए की जा रही है।

किसानों को नहीं मिल रहा टोकन

धान खरीदी के संबंध में भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि टोकन की व्यवस्था बनाई गई है। परंतु किसानों को कोई टोकन नहीं मिल रहा है। 15 नवंबर से धान की खरीदी की जानी थी। किसान 13 नवंबर को टोकन लेने के लिए पहुंचे थे परंतु किसानों को 14 नवंबर का टोकन दे दिया गया। जबकि खरीदी 15 नवंबर से की जानी है सवाल यह उठता है कि जब खरीदी 15 नवंबर से होनी है तो 14 नवंबर का टोकन क्यों दिया जा रहा है यह कैसी व्यवस्था है।

सहकारी कर्मचारी से रिकवरी करना गलत

श्री बघेल ने कहा कि सरकारी समितियां के आंदोलन के कारण अब धान की खरीदी का कार्य पटवारी तहसीलदार से कराया जा रहा है। धान खरीदी की व्यवस्था जो कर्मचारी विगत 25 से 30 वर्ष से करते आ रहे हैं फिर भी उनसे गलतियां होती है अब ऐसे में जिन्होंने कभी यह कार्य नहीं किया है उनके लिए पूरी तरह से यह व्यवस्था अलग है तो धान खरीदी कैसे संभव है। सरकार कर्मचारियों को बर्खास्त कर रही है जबकि कर्मचारी इस्तीफा दे रहे हैं क्योंकि उनसे रिकवरी का फरमान जारी किया गया है जबकि उनके तनख्वाह ही 17 से 18000 हैं ऐसे में वह इतना बड़ा नुकसान कैसे वहां कर पाएंगे उन्होंने कहा कि पिछले साल का 2 लाख मैट्रिक तनधन अभी तक समितियां से उठाया नहीं गया है। मुख्यमंत्री के जिले में भी धन अभी तक पड़ा हुआ है। ऐसे में उसकी भरपाई कर्मचारी करेंगे तो उनका वेतन तक नहीं बन पाएगा।

बिहार के नतीजे संबंधित सवाल पर श्री बघेल ने कहा कि निर्वाचन आयोग एवं भाजपा बताएं कि 65 लाख मतदाताओं के नाम कैसे कटे एवं 16 लाख आवेदन आए थे वह 21 लाख कैसे जुड़ गए एवं निर्वाचन आयोग के अध्यक्ष ने 21 सितंबर को कल बिहार में कुल मतदाताओं की संख्या 7.42 करोड़ बताई थी। परंतु मतदान के दिन यह संख्या 7.45 करोड़ कैसे हो गई। इन सवालों का जवाब निर्वाचन आयोग एवं भाजपा दोनों के पास नहीं है इसलिए वे दाएं बाएं देख रहे हैं।