बेसहारा मां को नहीं मिला कंधा, एक्स आर्मी फाउंडेशन दुर्ग ने निभाया बेटे का फर्ज

बेसहारा मां को नहीं मिला कंधा, एक्स आर्मी फाउंडेशन दुर्ग ने निभाया बेटे का फर्ज


🛑विधि-विधान से कराया अंतिम संस्कार, भिलाई कैंप-1 में मानवता को झकझोरने वाली घटना

🛑परिवार के सदस्यों के आगे नहीं आने पर पूर्व सैनिक संगठन ने बढ़ाया मदद का हाथ

भिलाईनगर, 07 नवंबर 2026। भिलाई कैंप-1 से मानवता को झकझोर देने वाली एक दुखद घटना सामने आई है। एक मां के निधन के बाद जब परिवार का कोई सदस्य उन्हें अंतिम विदाई देने और कंधा देने के लिए आगे नहीं आया, तब एक्स आर्मी फाउंडेशन दुर्ग के सदस्यों ने आगे बढ़कर इंसानियत और संवेदनशीलता की मिसाल पेश की।

जानकारी के अनुसार, एक महिला के निधन के बाद उनका शव घर के बाहर रखा हुआ था। परिवार की ओर से अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी निभाने के लिए कोई आगे नहीं आया। इस हृदयविदारक स्थिति की जानकारी एक्स आर्मी फाउंडेशन दुर्ग के सदस्यों को मिली, जिसके बाद संगठन ने तत्काल मदद के लिए कदम उठाया।

संगठन की पहल पर शव वाहन की व्यवस्था की गई। इसके बाद दिलीप गुप्ता, विजय सिंह और विनोद कुमार मौके पर पहुंचे। उन्होंने पूरे सम्मान और संवेदनशीलता के साथ महिला के अंतिम संस्कार की व्यवस्था की और विधि-विधान से उन्हें अंतिम विदाई दी।

इस घटना ने एक बार फिर समाज के सामने माता-पिता के प्रति बच्चों के कर्तव्य और पारिवारिक संस्कारों का गंभीर सवाल खड़ा किया है। जिस मां ने अपने बच्चों को जीवन दिया और उनका पालन-पोषण किया, जीवन के अंतिम पड़ाव पर उसी मां को सम्मानपूर्वक विदाई देने के लिए कोई आगे न आए, यह बेहद पीड़ादायक है।

एक्स आर्मी फाउंडेशन दुर्ग के सदस्य हरप्रीत सिंह बल ने घटना की जानकारी देते हुए कहा कि संगठन मानवता और सेवा भावना को सर्वोपरि मानते हुए ऐसे कार्य करता है। उन्होंने दुख जताया कि आज समाज में कुछ लोग अपने माता-पिता के प्रति संस्कारों और जिम्मेदारियों से दूर होते जा रहे हैं।

मानवता ही सबसे बड़ा धर्म

एक्स आर्मी फाउंडेशन दुर्ग के सदस्यों ने इस कठिन समय में जिस संवेदनशीलता के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाई, वह समाज के लिए प्रेरणादायक है। यह घटना हमें याद दिलाती है कि रिश्तों और जिम्मेदारियों से बढ़कर इंसानियत का कोई विकल्प नहीं है। किसी असहाय व्यक्ति को सम्मानजनक विदाई देना भी मानव सेवा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

जहां अपनों ने साथ छोड़ दिया, वहां पूर्व सैनिक संगठन ने मानवता का हाथ थामकर यह संदेश दिया कि इंसानियत अभी जिंदा है।