सीजी न्यूज ऑनलाइन, 09 फरवरी 2026। 12 फरवरी को सेंट्रल ट्रेड यूनियनों की तरफ से देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया गया है। यह हड़ताल निजीकरण, ठेका प्रथा, चार लेबर कोड, बिजली संशोधन बिल 2025 और मनरेगा को बदलने के विरोध में बुलाई गई है।
संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने 12 फरवरी को सेंट्रल ट्रेड यूनियनों (CTUs) द्वारा बुलाई गई देशव्यापी आम हड़ताल को पूरा समर्थन देने की घोषणा की है। इस संयुक्त कार्रवाई का मकसद निजीकरण, ठेका प्रथा, चार लेबर कोड, बिजली संशोधन बिल 2025, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) में बदलाव और प्रस्तावित बीज बिल का विरोध करना है।
किसान, खेतीहर मजदूर करेंगे भागीदारी
देश भर में विरोध स्थलों पर किसानों, खेतिहर मजदूरों और औद्योगिक यूनियनों की बड़े पैमाने पर भागीदारी की उम्मीद है, जिसमें PRTC, बिजली कर्मचारी और अन्य मजदूर संगठन शामिल हैं। इस बीच, हिमाचल प्रदेश में सेब किसानों ने 12 फरवरी को देशव्यापी किसानों की हड़ताल में शामिल होने की तैयारी तेज कर दी है और दिल्ली मार्च की घोषणा की है।
साथ ही चेतावनी दी है कि भारत-अमेरिका और अन्य मुक्त व्यापार समझौतों के तहत हाल ही में आयात शुल्क में की गई कटौती पहाड़ी राज्य की सेब आधारित अर्थव्यवस्था को तबाह कर सकती है। वहीं, केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बार-बार आश्वासन दिया है कि भारतीय सेब उत्पादकों के हितों की रक्षा की जाएगी।
दिल्ली मार्च करने की तैयारी
हिमाचल प्रदेश में किसान संगठनों ने केंद्र सरकार पर ‘किसान विरोधी’ व्यापार नीतियां अपनाने का आरोप लगाया है। इनका कहना है कि किसान अब एक साथ मिलकर राष्ट्रीय आंदोलन के तहत दिल्ली मार्च करने के लिए तैयार हैं। यह बात जुब्बल और रोहड़ू में हिमाचल प्रदेश एप्पल ग्रोअर्स एसोसिएशन (HPAGA) की ब्लॉक-लेवल मीटिंग्स में दोहराई गई, जहां बागवानों ने 12 फरवरी की हड़ताल के लिए गांव लेवल पर किसानों को इकट्ठा करने का फैसला किया।
वरिष्ठ किसान नेता ने दी चेतावनी
पूर्व विधायक और वरिष्ठ किसान नेता राकेश सिंघा ने चेतावनी दी कि अमेरिका, न्यूजीलैंड और यूरोपियन यूनियन देशों से सेब पर इंपोर्ट ड्यूटी कम करने से स्थानीय किसानों को भारी सब्सिडी वाले विदेशी उत्पादों का सामना करना पड़ेगा।
सिंघा ने कहा कि इस पॉलिसी का असर बहुत गहरा होगा। अमेरिकी सेब की खेती को बड़े पैमाने पर सब्सिडी और वॉलमार्ट और कारगिल जैसी कॉर्पोरेट कंपनियों का सपोर्ट मिलता है। हमारे किसानों को उसका एक छोटा सा हिस्सा भी नहीं मिलता। इंपोर्ट ड्यूटी में इस कमी से यहां सेब के बाग बर्बाद हो जाएंगे। यह तूफान पहले ही हमारे खेतों तक पहुंच चुका है, और यह सब कुछ उखाड़ फेंकेगा।

