डिजिटल अरेस्ट करने वालों की अब खैर नहीं! एक Kill Switch और स्कैमर्स का खेल खत्म

डिजिटल अरेस्ट करने वालों की अब खैर नहीं! एक Kill Switch और स्कैमर्स का खेल खत्म


🔴जानिए क्या है Emergency Button

सीजी न्यूज ऑनलाइन 24 जनवरी 2026। डिजिटल पेमेंट के बढ़ते इस्तेमाल के साथ-साथ साइबर फ्रॉड का भी मामला बढ़ता ही जा रहा है. डिजिटल अरेस्ट जैसे खतरनाक स्कैम ने आम यूजर्स की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता खड़ी कर दी है. इसी खतरे से यूजर्स को बचाने के लिए अब भारत सरकार एक सख्त कदम उठाने जा रही है. गृह मंत्रालय की अगुवाई में बनी हाई-लेवल कमेटी पेमेंट और बैंकिंग ऐप्स में किल स्विच जैसे इमरजेंसी फीचर लाने का सोच रही है.

तेजी से बढ़ते डिजिटल पेमेंट के दौर में जहां सुविधाएं बढ़ी हैं तो वहीं इसके नए-नए खरते भी सामने आए हैं. खासतौर पर डिजिटल अरेस्ट, जो आज के समय में डिजिटल पेमेंट करने वाले लोगों में सबसे बड़े डर का कारण है. इसी खतरे को देखते हुए अब भारत सरकार ने बड़ा कदम उठाने जा रही है. गृह मंत्रालय की अगुवाई में बनी हाई-लेवल कमेटी पेमेंट और बैंकिंग ऐप्स में किल स्विच फीचर लाने की तैयारी में है जिससे ठगी का शक होते ही यूजर अपने सभी ट्रांजैक्शन तुरंत सेकेंडों में रोक सकेगा. साथ ही डिजिटल फ्रॉड में डूबे पैसों की भरपाई के लिए इंश्योरेंस कवच पर भी विचार चल रहा है जो भारत के डिजिटल फाइनेंशियल सिस्टम को और भी ज्यादा सेफ बना सकता है.

क्या है ‘किल स्विच’ और कैसे करेगा काम?

प्रस्ताव से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक आपके बैंक ऐप या UPI ऐप जैसे PhonePe, Google Pay में एक नया इमरजेंसी बटन दिया जाएगा. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार अगर किसी यूजर को यह आभास होता है कि वह डिजिटल स्कैम का शिकार हो रहा है या उसे डरा-धमकाकर पैसे ट्रांसफर कराए जा रहे हैं तो वह तुरंत इस किल स्विच को ऑन कर देगा. इस स्विच को ऑन करते ही अकाउंट से होने वाले सभी वित्तीय लेनदेन तुरंत फ्रीज हो जाएंगे यानी पैसों का ट्रांसफर रुक जाएगा जिससे स्कैमर्स जालसाज पैसे नहीं निकाल सकेंगे.

फ्रॉड रोकने के लिए ये उठाए जाएंगे 4 बड़े कदम

संदिग्ध ट्रांजैक्शन की पहचान कर उसे म्यूल अकाउंट्स यानी फेक अकाउंट में बंटने से रोकना.

RBI और सरकार एक ऐसे बीमा मॉडल पर विचार कर रही है जो साइबर फ्रॉड से होने वाले नुकसान की भरपाई कर सके.

RBI ने पीड़ितों की सुरक्षा के लिए एक विशेष फंड बनाने का भी सुझाव दिया है.

साइबर एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि बैंकों और बीमा कंपनियों को मिलकर एक फ्रॉड इंश्योरेंस पूल बनाना चाहिए जिससे यूजर्स पर प्रीमियम का प्रेशर कम रहे.

डिजिटल अरेस्ट का आतंक 3,000 करोड़ की लूट

डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर फ्रॉड में अपराधी खुद को पुलिस या CBI अधिकारी बताकर वीडियो कॉल करते हैं और पीड़ित को ड्रग्स, मनी लॉन्ड्रिंग या फिर डीपफेक वीडियो जैसे गंभीर केस में फंसाने की धमकी देते हैं. जिससे यूजर्स डर जाते हैं और अपनी बरसों की कमाई स्कैमर्स के हवाले कर देते हैं. आंकड़ों के अनुसार भारतीय नागरिकों ने अब तक ऐसे फ्रॉड में लगभग ₹3,000 करोड़ गंवाए हैं.

RBI और सरकार बना रही है ये योजना

भारत में डिजिटल फ्रॉड को लेकर आंकड़ों बताते हैं कि साल 2024-25 में बैंकिंग फ्रॉड के 23,879 मामले सामने आए, जिनमें लोगों ने कुल 34,771 करोड़ रुपये गंवा दिए. इसी समस्या को देखते हुए अब RBI और एक्सपर्ट्स ग्राहकों के पैसे सेफ रखने के लिए नए रास्तों पर काम कर रहे हैं.

डूबे पैसों की भरपाई के लिए बनेगा खास फंड

RBI अपनी पेमेंट विजन 2025 रिपोर्ट में एक डिजिटल पेमेंट प्रोटेक्शन फंड यानी DPPF बनाने की सोच रहा है. आसान भाषा में कहें तो यह एक ऐसा सेफ्टी फंड होगा जिसका इस्तेमाल उन यूजर्स की मदद के लिए किया जाएगा जो ऑनलाइन फ्रॉड का शिकार होकर अपनी मेहनत की कमाई खो देते हैं.

इंश्योरेंस पूल से कम होगा खतरा

अभी जो साइबर इंश्योरेंस मिलते हैं वे ज्यादार यूजर्स की अपनी गलती या डिजिटल अरेस्ट जैसे फ्रॉड को कवर नहीं करते. इसलिए एक्सपर्ट्स एक इंश्योरेंस पूल बनाने का सोच रहे हैं.

इसमें बैंक और बीमा कंपनियां मिलकर पैसा डालेंगी. यह वैसे ही काम करेगा जैसे आतंकवाद के लिए बनाया गया इंश्योरेंस पूल काम करता है.

इससे बीमा का प्रीमियम बहुत सस्ता होगा और फ्रॉड होने पर बैंक या ग्राहक को बड़ा नुकसान नहीं होगा.

मौजूदा इंश्योरेंस में है बड़ी कमी

साइबर एक्सपर्ट का मानना है कि मार्केट में मौजूद बीमा पॉलिसी उस नुकसान की भरपाई नहीं करतीं जहां हैकर सिस्टम नहीं तोड़ता बल्कि यूजर को अपनी बातों में फंसाकर पैसे ट्रांसफर करा लेता है. नया सिस्टम इसी कमी को दूर करने के लिए लाया जा रहा है जिससे डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों में भी राहत मिल सके.

एक्शन में सरकार और एजेंसियां

गृह मंत्रालय की हाई-लेवल कमेटी IDC का गठन दिसंबर में किया गया था. जिसमें डिजिटल गिरफ्तारी के मुद्दे के सभी मामलों की व्यापक जांच के लिए कई एजेंसियों के अधिकारी शामिल हैं. बीते सप्ताह सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत की गई एक रिपोर्ट में कहा गया है कि आईडीसी ने कुछ मीटिंग की हैं जिनमें कोर्ट में में इन मामलों पर विस्तार से चर्चा हई है.

गृह मंत्रालय के विशेष सचिव की अध्यक्षता में इस हाई लेवल कमेटी का गठन हुआ है.इस समस्या से निपटने के लिए गृह मंत्रालय की इस कमेटी इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, दूरसंचार विभाग, विदेश मंत्रालय, वित्तीय सेवा विभाग, विधि एवं न्याय मंत्रालय, उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक, केंद्रीय जांच ब्यूरो, राष्ट्रीय जांच एजेंसी, दिल्ली पुलिस और भारतीय साइबर अपराध केंद्र के संयुक्त सचिव और अन्य अधिकारी शामिल हैं. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार MeitY ने इस साल 6 जनवरी को आईटी मध्यस्थों के साथ एक मीटिंग बुलाई. इसमें एमिकस क्यूरी और I4C, गृह मंत्रालय, दूरसंचार विभाग, Google, WhatsApp, Telegram और माइक्रोसॉफ्ट के मेंबर भी शामिल हुए.