सीजी न्यूज ऑनलाइन 16 अप्रैल । देश में खेती-किसानी और जलस्रोतों के लिए सबसे अहम माना जाने वाला दक्षिण-पश्चिम मानसून, इस साल राहत भरी खबर लेकर आ रहा है। मौसम विभाग ने 2025 के मानसून सीजन के लिए दीर्घावधि पूर्वानुमान जारी कर दिया है।
IMD के अनुसार, इस साल जून से सितंबर के बीच दक्षिण-पश्चिम मानसून की वर्षा सामान्य से अधिक होने की संभावना है। मात्रात्मक रूप से यह वर्षा, दीर्घ अवधि औसत यानी LPA का लगभग 105% हो सकती है। इसमें ±5% की त्रुटि की गुंजाइश है। LPA की गणना 1971 से 2020 के आंकड़ों के आधार पर की गई है, जो 87 सेंटीमीटर है। फिलहाल, प्रशांत महासागर में ENSO की स्थिति तटस्थ बनी हुई है, लेकिन वातावरण में ला नीना जैसे संकेत मौजूद हैं। इसी तरह, हिंद महासागर डिपोल यानी IOD की स्थिति भी तटस्थ बनी हुई है। इन दोनों महासागर प्रणालियों पर नजर रखी जा रही है क्योंकि इनका सीधा प्रभाव भारतीय मानसून पर पड़ता है। जनवरी से मार्च 2025 के दौरान उत्तरी गोलार्ध और यूरेशिया में बर्फ की चादर सामान्य से कम रही। ध्यान देने वाली बात यह है कि कम बर्फ का आवरण, भारत में अधिक मानसूनी वर्षा से जुड़ा हुआ होता है।
अब नज़र डालते हैं वर्षा की संभावना श्रेणियों पर…
- सामान्य से अधिक वर्षा (LPA का 105-110%) की संभावना: 33%
- सामान्य वर्षा (96-104%): 30%
- सामान्य से कम (90-95%): 9%
- अत्यधिक वर्षा (>110%): 26%
- अत्यंत कम वर्षा (<90%): केवल 2%
यानि साफ है कि इस साल देश के अधिकतर हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश की पूरी उम्मीद है। स्थानिक वितरण के अनुसार, उत्तर-पश्चिम भारत, पूर्वोत्तर भारत और दक्षिण के कुछ हिस्सों को छोड़ दें, तो पूरे देश में अच्छी बारिश के संकेत हैं। बाकी क्षेत्रों में सामान्य से ऊपर वर्षा की संभावना ज्यादा है। भारत के कृषि, जल संसाधन और बिजली उत्पादन क्षेत्रों के लिए यह खबर राहत लेकर आई है। IMD मई के अंत में इस पूर्वानुमान का अगला अपडेट जारी करेगा, जिसमें मानसून के और अधिक सटीक आँकलन होंगे।

