सीजी न्यूज ऑनलाइन 27 अक्टूबर । 28 अक्टूबर 2024 की हड़ताल को लेकर दिल्ली में हुए सुलह बैठक के दौरान आखिरकार प्रबंधन ने कह दिया कि 39 महीने का एरियर्स दे नहीं सकते हैं, क्योंकि मंत्रालय का अनुमोदन नहीं है । ज्ञात हो कि सीटू पहले से ही इस बात को कह रहा था कि केंद्र सरकार अर्थात प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा 22 नवंबर 2017 को कैबिनेट की बैठक कर सार्वजनिक उद्योगों के लिए वेतन समझौता के संदर्भ में जारी किए गए दिशा-निर्देश के तहत बहुत सारी बंदिशें थोपी गई थी जिसमें अफॉर्डेबिलिटी क्लॉज़ एवं फाइनेंशियल सस्टेनेबिलिटी क्लॉज़ सबसे महत्वपूर्ण है, जिसमें घाटे के वर्षों में कोई भी वेतन वृद्धि लाभ नहीं देने की बात दर्ज है । सीटू का स्पष्ट मानना है कि जब वेतन समझौता 1 जनवरी 2017 से लागू है तो 1 जनवरी 2017 से 31 मार्च 2020 तक 39 महीने का एरियर्स भी हर हाल में देना होगा जिसे हासिल करने के लिए यहां हड़ताल किया जा रहा है।
सरकार की नीतियों के खिलाफ लड़कर मिलेगी सफलता
केंद्र सरकार लगातार कर्मचारियों के खिलाफ कई सारी नीतियां बना रहा है जिसे कभी डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक एंटरप्राइजेज के माध्यम से कर्मचारियों पर थोपा जाता है तो कभी श्रम मंत्रालय एवं अन्य दूसरे विभागों के माध्यम से कर्मियों पर थोपा जा रहा है। इसके खिलाफ संघर्ष करना बहुत जरूरी है।
सरकार सार्वजनिक उद्योग के खिलाफ बना रही है नीतियां
वर्तमान केंद्र सरकार लगातार सार्वजनिक उद्योग विरोधी नीतियों को बना रहा है । बीएसएनएल से लेकर ऑर्डिनेंस फैक्ट्री तक शिपिंग कॉरपोरेशन से लेकर इस्पात उद्योग तक इसके प्रत्यक्ष उदाहरण है। देश के बेहतरीन उद्योगों में से एक विशाखापट्टनम स्टील प्लांट को किसी भी तरह से अपने कॉर्पोरेट मित्र को देने की होड़ में ना केवल वहां के उत्पादन को 75% कम कर दिया गया है, बल्कि वहां के कर्मियों पर नया 2017 का वेतन समझौता तक लागू नहीं किया गया है । इन नीतियों के खिलाफ हर हाल में संघर्ष करना एवं रोकना जरूरी है । इसके खिलाफ वहां के कर्मी लगातार लड़ रहे हैं।
कर्मियों को डराने की कोशिश ना करें प्रबंधन
स्थानीय प्रबंधन किसी भी तरह से कर्मियों को राहत तो नहीं दे पा रहा है, किंतु हड़ताल से घबरा कर कर्मियों को डराने की नाकाम कोशिश कर रहा है । हड़ताल की तैयारी को देखते हुए प्रबंधन में आनन फानन में जिस अपील को जारी किया है वह अपील आज से 15 – 20 साल पहले तैयार किया हुआ फॉर्मेट है, जिसमें कुछ बातों को जोड़कर प्रबंधन हड़ताल के समय जारी कर देता है।
वैध नहीं है प्रबंधन की अपील
सीटू ने कहा कि 28 तारीख की हड़ताल पहले 29 एवं 30 जनवरी 2024 को होना था। मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) ने सुलह बैठक बुलाकर प्रबंधन को निर्देशित किया था कि ढाई महीने के अंदर अर्थात अप्रैल 2024 के अंदर बैठक बुलाकर वेतन समझौते को संपन्न करवाएं, किंतु दस माह बीत जाने के बाद भी प्रबंधन कुछ भी आगे नहीं बढ़ा। अब जबकि 28 अक्टूबर को हड़ताल होने जा रही है तो प्रबंधन सुलह बैठक से लेकर तरह-तरह की तरकीब भिड़ा कर हड़ताल को अवैध घोषित करने का नाकाम कोशिश कर रहा है, जबकि वास्तविकता यह है कि प्रबंधन का यह अपील ही वैध नहीं है क्योंकि पर्याप्त समय मिलने के बावजूद प्रबंधन जानबूझकर मामले को लटकाए रखा जिसके परिणाम स्वरूप 28 अक्टूबर की हड़ताल करनी पड़ रही है। इसीलिए यह हड़ताल पूरी तरह से वैध है जिसकी पूरी जिम्मेदारी और जवाबदारी सिर्फ और सिर्फ प्रबंधन की लेट लतीफ एवं कर्मियों के प्रति नकारात्मक सोच को जाता है।

