🔴सुभाष गंजीर 88.30 प्रतिशत अनुपातहीन संपत्ति अर्जित करने के दोषी, 10 हजार रुपये का जुर्माना भी
सीजी न्यूज़ ऑनलाइन, 31 अगस्त 2026। अनुपातहीन संपत्ति अर्जित करने के मामले में तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी दंतेवाड़ा सुभाष गंजीर को विशेष न्यायालय ने दोषी ठहराते हुए चार वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। यह फैसला विशेष न्यायालय, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, दंतेवाड़ा के विशेष न्यायाधीश संतोष कुमार आदित्य ने 31 अगस्त 2026 को सुनाया।
एंटी करप्शन ब्यूरो के अनुसार सुभाष गंजीर के जिला शिक्षा अधिकारी के पद पर रहते हुए स्वयं तथा परिवार के सदस्यों के नाम पर आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित किए जाने की सूचना प्राप्त हुई थी। सत्यापन के बाद 14 फरवरी 2017 को एसीबी अपराध क्रमांक 04/2017 दर्ज किया गया था।
दंतेवाड़ा से ओडिशा तक हुई थी छापेमारी
मामले में विशेष न्यायालय से तलाशी वारंट प्राप्त करने के बाद एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने 15 फरवरी 2017 को सुभाष गंजीर के शासकीय आवास दंतेवाड़ा, वृंदावन कॉलोनी जगदलपुर तथा उनके पैतृक ग्राम कोटपाड़, जिला कोरापुट (ओडिशा) में छापा मारकर तलाशी की कार्रवाई की थी।
जांच पूरी होने के बाद आरोपी के विरुद्ध विधिवत अभियोजन स्वीकृति प्राप्त की गई और अभियोग पत्र विशेष न्यायालय, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, दंतेवाड़ा में प्रस्तुत किया गया।
88.30 प्रतिशत अनुपातहीन संपत्ति का दोषी
मामले में विचारण के बाद न्यायालय ने सुभाष गंजीर को 88.30 प्रतिशत अनुपातहीन संपत्ति अर्जित करने का दोषी पाया। न्यायालय ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(ई) एवं 13(2) के तहत उन्हें 4 वर्ष सश्रम कारावास तथा 10,000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
एंटी करप्शन ब्यूरो की इस कार्रवाई और न्यायालय के फैसले को सरकारी पद पर रहते हुए आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने वालों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है।

