2 साल पुराने बिजली बकाये पर नहीं कटेगा कनेक्शन, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

2 साल पुराने बिजली बकाये पर नहीं कटेगा कनेक्शन, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला


सीजी न्यूज़ ऑनलाइन, 2026। बिजली उपभोक्ताओं को राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति एसवीएन भट्टी और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ ने दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड बनाम विद्युत लोकपाल, उत्तर प्रदेश एवं अन्य मामले में बिजली कंपनी की अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिजली कंपनियां दो साल से अधिक पुराने बकाये की राशि की मांग कर उपभोक्ता का कनेक्शन नहीं काट सकतीं, जब तक वह राशि लगातार बकाया के रूप में बिल में दर्शाई नहीं गई हो।

विद्युत अधिनियम की धारा 56(2) का हवाला

सुप्रीम कोर्ट ने विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 56(2) की व्याख्या करते हुए कहा कि बिजली कंपनी दो वर्ष से अधिक पुराने बकाये की वसूली सामान्य तौर पर नहीं कर सकती। यदि किसी पुरानी राशि को नियमित रूप से बकाया के रूप में बिल में दर्शाया जाता रहा है, तो स्थिति अलग हो सकती है।

9 साल बाद भेजा गया 57.74 लाख रुपये का बिल

मामले में फरवरी से सितंबर 1998 की अवधि के लिए 57.74 लाख रुपये का न्यूनतम खपत गारंटी शुल्क फरवरी 2007 में, यानी करीब नौ साल बाद, मांगा गया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग को समय-बाधित (Time-Barred) माना।

कोर्ट के फैसले से यह स्पष्ट संदेश गया है कि बिजली कंपनियां वर्षों पुराने ऐसे दावों को अचानक बिल के रूप में भेजकर उपभोक्ताओं पर भुगतान का दबाव नहीं बना सकतीं, जिनकी मांग निर्धारित समय-सीमा के भीतर नहीं की गई हो।

वास्तविक बिजली आपूर्ति और नियमित बिल जरूरी

फैसले में यह भी महत्वपूर्ण बात सामने आई कि बिजली शुल्क की देयता वास्तविक विद्युत आपूर्ति और नियमित बिलिंग से जुड़ी है। बिना उपयोग किए गए या उपभोक्ता की सहमति के बिना लगाए गए अतिरिक्त लोड पर मनमाने तरीके से शुल्क नहीं लगाया जा सकता।

उपभोक्ताओं के लिए क्या मायने रखता है फैसला?

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से उन बिजली उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है, जिन्हें कई वर्षों बाद अचानक पुराने बकाये के नाम पर बड़ी रकम के बिल भेजे जाते हैं। हालांकि, हर मामले में बिल का रिकॉर्ड, पुराने बकाये का लगातार उल्लेख और बिजली कंपनी की ओर से की गई कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का मूल संदेश यही है कि बिजली कंपनियों को पुराने बकाये की वसूली के लिए कानून में निर्धारित समय-सीमा और बिलिंग प्रक्रिया का पालन करना होगा।