चोरी के जो वाहन पुलिस खोजती रही वो भिलाई की बंद फैक्ट्री में काट कबाड़ में बिक गई, कबाड़ी चोरी की गाड़ियाँ खरीद स्क्रैप बना बेचते रहे
भिलाई नगर, 25 अक्टूबर। छावनी क्षेत्र में वर्षों से बंद पड़ी आयरन फैक्ट्री में दिल्ली से आकर कुछ लोगों ने रहना शुरू किया और वहाँ चोरी की गाड़ियों को काटने की फैक्ट्री भी चलाने लगे। हर दिन इस फैक्ट्री में चोरी के वाहन कटने के बाद उसे कबाड़ में बेच दिया गया। बीते शनिवार की सुबह जब सीएसपी छावनी कौशलेंद्र देव पटेल कुछ समान खरीदने निकले और उन्हें सालों से बंद इस फैक्ट्री को देखकर संदेह हुआ तो उन्होंने जामुल पुलिस को बुलाकर फैक्ट्री की जांच की तो वहां का नाजारा देखकर सभी दंग रह गए। यहां चोरी की साइकिल, दो पहिया वाहन से लेकर चार पहिया और ट्रक जैसे वाहन के स्क्रैप का जखीरा लगा था। मौजूद लोग जब कागज पेश नहीं कर सके तो पुलिस ने उन्हें पकड़ा। एक अन्य आरोपी की तलाश की जा रही है।
सीएसपी छावनी कौशलेंद्र देव पटेल ने बताया कि वह जामुल क्षेत्र में कुछ सामान खरीदने के लिए गए थे। इस दौरान उन्हें सालों से बंद पड़ी फैक्ट्री आरडी स्टील दिखी। पूछने पर पता चला कि यहां पुरानी गाड़ियों को काट कर उसे बेचा जाता है। सीएसपी ने तुरंत जामुल थाना टीआई गौरव पांडेय को टीम के साथ बुलाया। पुलिस ने अंदर देखा तो बड़े पैमाने पर गाड़ियों का स्क्रैप फैक्ट्री में डंप था। पुलिस को देखते ही रियाज नाम का एक आरोपी वहां से भाग खड़ा हुआ, जबकि दानिश नाम का युवक पकड़ा गया। उसने बताया कि वह दिल्ली से आया है और इस फैक्ट्री में वर्षों से रह रहा है। पुलिस ने जब उनसे फैक्ट्री के कागज, किरायानामा और कबाड़ की गाड़ियों से संबंधित दस्तावेज मांगे तो वह नहीं दे सका। टीआई गौरव पाण्डेय ने आरोपी दानिश से पूछताछ की तो उसने उन्हें बताया कि बंद पड़ी फैक्ट्री उसके पिता की है। पिता की मृत्यु के बाद से वह बंद पड़ी है और वह लोग उसी के अंदर रहते आ रहे हैं। उसने बताया कि वह सालों से इसी फैक्ट्री में स्क्रैप का कारोबार करते आ रहे हैं। उन्होंने इसका एक छोटा प्लांट भी लगाया है और बिजली का कनेक्शन भी ले रखा है। इससे चोरी की आशंका पर पुलिस ने फैक्ट्री के कबाड़ को जब्ती बनाते हुए आरोपी दानिश के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस एक अन्य आरोपी की तलाश कर रही है।
गौरतलब हो कि जिले में बड़े पैमाने चोरी की गड़ियां बिना बिक्री कबाड़ के दाम पर बेच दी जाती हैं। वाहन मालिक लाखों रुपए टैक्स बकाया रहने वाली गाड़ियों को कबाड़ के भाव बेच देते हैं। कबाड़ी भी सस्ते दर पर मिलने के कारण उस गाड़ी के बिक्री का परिवहन विभाग से एनओसी भी नहीं लेते हैं। ऐसे में परिवहन विभाग टैक्स वसूली के लिए गाड़ियों को खोजता रहता है और गाड़ियां स्क्रैप के भाव बिक जाती हैं। इसी गोरखधंधे की आड़ में कबाड़ी चोरी की गाड़ियों को भी खरीद कर उसका स्क्रैप बनाकर बेच रहे हैं।

