लगातार नीले से हरा हो रहा है समंदर… जानिए कितना हो गया और अब क्या है नासा का प्लान?

लगातार नीले से हरा हो रहा है समंदर… जानिए कितना हो गया और अब क्या है नासा का प्लान?


सीजी न्यूज ऑनलाइन डेस्क 19 जुलाई । ऐसा क्या हो रहा है कि नीले समंदर का रंग लगातार हरा होता जा रहा है! नासा के एक्वा उपग्रह से पता चला है कि समुद्र के 56 प्रतिशत पानी का रंग नीले से हरा हो गया है. यह मुख्य रूप से भूमध्य रेखा के पास दक्षिणी हिंद महासागर में हो रहा है. एक्वा उपग्रह पर MODIS नाम के स्पेक्ट्रोरेडियोमीटर से शोधकर्ताओं ने 2002 से 2022 तक 20 साल के डाटा के आधार पर यह बताया है.
हमारी पृथ्वी के 70% से अधिक हिस्से को कवर करने वाले महासागर रहस्यमय तरीके से नीले से हरे रंग में बदल रहे हैं. यूके के नेशनल ओशनोग्राफी सेंटर के बी.बी. कैल के एक अध्ययन से यह बात सामने आई है. नासा एक्वा उपग्रह से लिए गए 20 वर्षों के डाटा पर की गई इस रिसर्च में यह पता चला कि समुद्र के 56 प्रतिशत पानी का रंग नीले से हरे रंग में बदल गया था.

आखिर बदल क्यों रहा है महासागर का रंग? जानें

समुंद्र के रंग में बदलाव के लिए जिम्मेदार फैक्टर महासागर में फाइटोप्लांकटन समुदाय (phytoplankton communities) हैं. ये समुद्री जीव हरे रंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं क्योंकि वे कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं जिसके नतीजे के रूप में फाइटो ब्लूम बढ़ता है. इन फाइटोप्लांकटन में ग्रीन पिग्मेंट क्लोरोफिल (chlorophyll) होता है जिससे समुद्र हरा दिखता है.

शब्दों में नहीं किया जा सकता वर्णन, बोले एक्सपर्ट

यूके के साउथम्पटन में नेशनल ओशनोग्राफी सेंटर के वैज्ञानिक बी बी कैल ने कहा, रंग अपने आप में कुछ ऐसा नहीं है जिसे इंसान अपनी भाषा आसानी से समझा सके या जिसे आप अच्छी तरह से देख भी सकें. हालांकि ऐसा कुछ हो सकता है जिसे मंटिस झींगा या तितली देख सकती है. बता दें कि कैल उस अध्ययन के प्रमुख लेखक हैं जिसने महासागर के रंग से जुड़े बदलावों पर डाटा दिया.
उन्होंने इस पर भी बात की कि मानवीय गतिविधियां महासागरों पर कैसे असर डालती हैं. उन्होंने कहा कि इससे सबूत मिलते हैं कि मानवीय गतिविधियां किस तरह से पृथ्वी पर जीवन को काफी हद तक प्रभावित करती हैं. यह एक और तरीका है जिससे मनुष्य जीवमंडल को प्रभावित कर रहे हैं.

नासा का आगे का प्लान क्या है…

वैज्ञानिक फाइटोप्लांकटन में इजाफे और उनकी कंम्युनिटीज का निरीक्षण कर रहे हैं क्योंकि वे जलवायु परिवर्तन के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं. इसलिए वे नीले वायरस की सतह पर उनके क्लोरोफिल रेशियो पर नजर बनाए हुए हैं. नासा के आगामी मिशन में 2024 में PACE उपग्रह मिशन लॉन्च किया जाएगा, जो फाइटोप्लांकटन डाइवर्सिटी के आगे स्टडी करेगा. वैज्ञानिकों की कोशिश है कि कैसे समुद्र में इन फैक्टर्स में इजाफे की स्पीड को धीमा किया जाए.