खाद्य तेलों में सबसे खतरनाक प्रकार ट्रांस फैटी एसिड जांचने दुर्ग जिले में भी 14 तक जांच जारी, लिए जा रहे सैम्पल

खाद्य तेलों में सबसे खतरनाक प्रकार ट्रांस फैटी एसिड जांचने दुर्ग जिले में भी 14 तक जांच जारी, लिए जा रहे सैम्पल


खाद्य तेलों में सबसे खतरनाक प्रकार ट्रांस फैटी एसिड जांचने दुर्ग जिले में भी 14 तक जांच जारी, लिए जा रहे सैम्पल

भिलाई नगर, 3 अगस्त। खाद्य तेलों में ट्रांस फैटी एसिड सबसे खतरनाक प्रकार का फैट होता है जो मानव शरीर पर किसी भी अन्य आहार घटक की तुलना में अत्यधिक प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। इस फैट को बड़े पैमाने पर कृत्रिम रूप से उत्पादित किया जाता है, यह बहुत की कम मात्रा में प्राकृतिक रूप में भी पाए जाते हैं। जब तेल को रिफाइंड करने के लिए बार-बार गरम किया जाता है, तो उसमें ट्रांस फैटी एसिड की मात्रा बढ़ जाती है। दुर्ग जिले में खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने खाद्य तेलों की गुणवत्ता को लेकर सैंपलिंग का अभियान शुरू किया है जो कि 14 अगस्त तक जारी रहेगा। कल इस अभियान के पहले दिन विभाग की टीम ने दो दुकानों में जाकर खाद्य तेलों का सैंपल कलेक्ट किया है। 

खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण नई दिल्ली द्वारा खाद्य तेलों की गुणवत्ता एवं शुद्धता जांच के संबंध में निर्देश दिए हैं। इसके तहत जिले के जितने भी स्थानीय व ब्रांडेड कंपनी के तेल निर्माता व विक्रेता हैं, उनके यहां से तेल का सैंपल कलेक्ट किया जाएगा। इसके बाद सभी सैंपल को जांच के लिए लैब भेजा जाएगा।

खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग दुर्ग के अधिकारी क्षीरसागर पटेल ने बताया कि विभाग द्वारा दुर्ग के सिंधिया नगर और भिलाई के शास्त्री मार्केट पावर हाउस स्थित एक-एक प्रतिष्ठान से पैकेट बंद खाद्य तेल के नमूने को जांच के लिए सैंपल के तौर पर लिया है। सैंपल जांच के लिए बाहर भेजा जाएगा। रिपोर्ट आने के बाद यदि उसमें कोई कमी आई तो आगे की कार्रवाई की जाएगी।

जानकारी यह भी मिली है कि आटा, धनिया व अन्य खाद्य सामग्री का भी नमूना

खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम ने लिया है और जांच के दौरान प्रतिष्ठान संचालकों को सफाई व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। एक अगस्त से विभिन्न सोर्स जैसे सरसों, मूंगफली, सोयाबीन, सूरजमुखी, ब्रान से मिलने रिफाइंड आयल व वनस्पति तेल बिक्री के लिए बनाए गए नियम का सख्ती से पालन कराया जाएगा। अब अगस्त माह से बाजार में खुला खाने का तेल बिना जांच एप्रुवल के नहीं बिकेगा। खाद्य सुरक्षा व औषधि प्रशासन की टीम खाद्य तेलों का व्यापार करने वाले व्यापारियों के यहां से उसमें ट्रांस फैटी एसिड की मात्रा जांचने व मिलावट की रोकथाम के लिए एक तेल का दो सर्विलांस नमूना भरेगी। इसमें स्थानीय ब्रांड व ब्रांडेड कंपनियों के नमूने लिए जाएंगे। इस अभियान का मुख्य लक्ष्य बाजार में खुले में बिक रहे मिलावटी खाद्य तेलों पर अंकुश लगाना तथा खाद्य तेलों में हो रही मिलावट खोरी को रोकना है। 

विदित हो कि भारतीय खाद्य सुरक्षा व मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआइ) ने भी खाद्य पदार्थों में ट्रांस फैट के इस्तेमाल को कम करने के लिए कुछ नियम जारी किये थे, नियम के मुताबिक ट्रांस फैट की मात्रा को 2021 तक तीन प्रतिशत व 2022 तक दो प्रतिशत करने का लक्ष्य है  वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी 2022 तक दुनिया को ट्रांस फैट से मुक्त करने का लक्ष्य रखा है।