प्रबंधन की फूट डालने की रणनीति जारी, किंतु बनी रहेगी यूनियन की एकता, कर्मियों का हक लेने जारी रहेगा स्वतंत्र एवं संयुक्त संघर्ष

प्रबंधन की फूट डालने की रणनीति जारी, किंतु बनी रहेगी यूनियन की एकता, कर्मियों का हक लेने जारी रहेगा स्वतंत्र एवं संयुक्त संघर्ष


भिलाई नगर 27 नवंबर । दिल्ली में केंद्रीय श्रम आयुक्त के साथ कल की बैठक के बाद प्रबंधन के कुछ आला अधिकारी खुश होंगे कि हमने फिर से यूनियनों के बीच आपसी मनमुटाव को तेज कर दिया। क्योंकि प्रबंधन इन नीतियों पर लगातार चल रहा है। जिसके कारण 8 साल बीत जाने के बावजूद वेतन समझौता पूर्ण नहीं हो सका। किंतु इस फुट से खुश होने वाले सभी एक बात समझ ले कि वह कितनी भी कोशिश कर ले हम अपने हकों को जब तक ले नहीं लेते तब तक संयुक्त एवं स्वतंत्र संघर्षों को जारी रखेंगे आने वाले दिनों में संयुक्त संघर्ष और तेज होंगे।

बहुमत का सहारा लेने वाला प्रबंधन भाग रहा है बहुमत से

प्रबंधन एवं अन्य दूसरे संगठनों के द्वारा 26 नवंबर 2024 को दिल्ली में मुख्य श्रम आयुक्त केंद्रीय के आह्वान पर हुई बैठक के पश्चात सीटू पर किए जा रहे टीका टिप्पणी पर सीटू नेता ने कहा कि सर्वसम्मति से नौ वेतन समझौता होने के बाद प्रबंधन के चाल बाजियों के कारण दसवां वेतन समझौता शुरू से ही बहुमत की भेट चढ़ गया। हर बैठक एवं निर्णय को बहुमत के हवाले कर दिया गया। किंतु बहुमत का सहारा लेने वाली प्रबंधन आज बहुत से भाग रहा है इसीलिए मुख्य श्रम आयुक्त केंद्रीय की मध्यस्थता में हुई बैठक में मिनट्स पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया।

प्रबंधन ने ही उड़ाई थी मुख्य श्रम आयुक्त केंद्रीय, यूनियन प्रतिनिधि एवं प्रबंधन के बीच हुई बातचीत की धज्जियां

ज्ञात हो की संयुक्त यूनियनों द्वारा वेतन समझौता पूर्ण करने की मांग को लेकर जनवरी 2024 में दो दिवसीय सेल व्यापी हड़ताल का आह्वान किया था जिस पर मुख्य श्रम आयुक्त केंद्रीय द्वारा दखल देकर 24 जनवरी को सुलह बैठक बुलाई गई एवं प्रबंधन ने उस बैठक में अपनी सहमति दी थी कि ढाई महीने के भीतर अर्थात अप्रैल 2024 तक कर्मियों के वेतन से जुड़े सभी मुद्दों का समाधान कर लिया जाएगा किंतु ढाई महीने बीत जाने के बावजूद भी प्रबंधन 1 इंच आगे नहीं बढ़ा जिससे स्पष्ट हो गया कि प्रबंधन मुख्य श्रम आयुक्त केंद्रीय के मध्यस्थ में हुए बैठक एवं निर्णय का कितना सम्मान करता है

सीटू के हस्ताक्षर करने से मना करते ही प्रबंधन का यू टर्न

बहुमत के आधार पर हस्ताक्षर करने के लिए तैयार हुए संगठनों को प्रबंधन से सीखना चाहिए क्योंकि आज सीटू के हस्ताक्षर करने से मना करते ही प्रबंधन भी यू टर्न लेते हुए साइन करने से मना कर दिया किंतु वहीं पर प्रबंधन के कहने पर कुछ यूनियनों ने अपने ही साथी यूनियनों का साथ छोड़कर बहुमत बना लिया जिसका खामियाजा आज सबके सामने में मौजूद है वही सब आज सीटू को भला बुरा कहकर कटघरे में खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं किंतु सीटू ने हस्ताक्षर क्यों नहीं किया इसकी सच्चाई सबके सामने है

बहुमत वाले प्रस्ताव भी लागू नहीं कर पा रहा प्रबंधन

सीटू नेता ने कहा कि बहुमत बनाकर हस्ताक्षर करने के बाद संघर्षों के मैदान में सीटू ने सभी के साथ मिलकर संघर्ष किया एवं आने वाले दिनों में भी करता रहेगा किंतु जल्दी बाजी में सीटू पर टिप्पणी करने वाले यह बताएं कि जिन संगठनों ने बहुमत बनाकर मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग से लेकर बोनस फार्मूले एवं बायोमेट्रिक की शर्त को जोड़ते हुए रात्रि पाली भत्ते में हस्ताक्षर किए हैं वे उस बहुमत वाले अनुबंधों को भी पूरी तरह से लागू नहीं करवा पा रहे हैं इस सच्चाई को भी सब जानते हैं।