🌑 महादेव और रेड्डी अन्ना के गले की फांस बनी “दुर्ग जिला पुलिस”
🌑 पंद्रह दिन में ताबड़तोड़ कार्रवाई, हर दिन कर रही नया “खुलासा”
- संतोष मिश्रा
भिलाई नगर, 3 अक्टूबर। दुर्ग जिले से स्टार्ट महादेव और रेडी अन्ना आनलाइन बेटिंग नेटवर्क मध्यप्रदेश, कोलकाता, दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश, उड़ीसा, राजस्थान, हरियाणा, महाराष्ट्र और गोवा सहित दीगर राज्यों में भी संचालित होने की पुख्ता जानकारी मिली है। इस अवैध कारोबार में जल्द अमीर बनने की ख्वाहिश में देश के करोडो़ं युवा आईडी ले मैच की हर गेंद पर बेटिंग कर रहे हैं। दुर्ग जिले में लगातार कार्रवाई के बाद ऐप के मुख्य संचालक और पार्टनर कब (यूएई) दुबई में जा बैठे पुलिस के नेटवर्क को इसकी भनक नहीं लग पाई। लगभग सौ से ज्यादा युवा बाकायदा ट्रेनिंग लेने के बाद दुबई में रिक्रूट हो हब सेंटर से पूरे भारतवर्ष में आनलाईन बेटिंग करवा रहे हैं चूंकि दुबई सहित कुछ देशों में आनलाईन बेटिंग को मान्यता है इसलिए वहां जा बैठे इस कारोबार में लिप्त लोग हमारे देश के अनेक राज्यों में कंट्रोल सेंटर स्थापित कर पैनल लेने वाले डिस्ट्रीब्यूटर्स की सहायता से घर-घर युवाओं तक इस काले कारोबार की लत पहुंचाने मजबूत नेटवर्क बनाते जा रहे हैं। दुर्ग जिले से ही महादेव बेटिंग ऐप के संचालक ताल्लुक़ रखते हैं और 7 मुख्य आरोपियों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी होने के बावजूद इन तक पहुंच पाना आज तक नामुमकीन ही रहा है, हालांकि ईडी के इन्वाल्वमेंट से काफी उम्मीद जगी है और राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी इस अवैध कारोबार से छत्तीसगढ़ को बचाने संजीदा हैं।
🌑 जब आईफा अवार्ड आबूधाबी में बजा “महादेव ऐप का डंका”
जून 2022 में दूबई आबूधाबी (यूएई) में हुए आईफा अवार्ड में हर तरफ महादेव ऐप का बैनर और इनके संचालक जो कि दुर्ग जिले से हैं, का रैम्प वाॅक और रसूख देखने को मिला जिससे सहज अनुमान लगाया जा सकता है कि महादेव नेटवर्क की मजबूती और अवैध कमाई किस स्तर तक जा पहुंची है। प्रसारण बाद सोशल प्लेटफार्म पर इस अवार्ड सेरेमनी के विडियो में महादेव ऐप की जमकर एडवरटाइजिंग और संचालकों का कैट वाॅक छाया रहा। तब पुलिस महकमा की जानकारी पुख्ता हो गई कि अब इन्हें जिले या अन्य राज्यों में तलाशना निरर्थक है। चूंकि इनके परिवार और रिश्तेदार अब भी जिले में हैं इसलिए पुलिस अधिकारियों को उम्मीद जरूर है कि देर सबेर उन तक निश्चित पहुंचेंगे और उन्हें सीखचों के पीछे जरूर धकेल देंगे।

🌑 बेटिंग कारोबार पर नजर लेकिन कडे़ कानून के अभाव से बढ़ रहा है “प्रभाव”
छत्तीसगढ़ में ऑनलाइन सट्टे के कारोबार पर लगाम लगाने की मुहिम पुलिस ने तेज कर दी है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश के बाद पुलिस द्वारा लगातार ऑनलाइन बेटिंग से जुड़े लगभग तीन सौ लोगों पर कार्रवाई हुई है फिर भी नेटवर्क बढ़ने की वजह है आनलाईन बेटिंग को लेकर कडे़ कानून का अभाव। अमूमन गैम्बलिंग ऐक्ट से इस कारोबार को नेस्तनाबूद करने की कल्पना आज तो बेमानी सी ही लगती है। पुलिस अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर संचालित महादेव बुक और अन्ना रेड्डी नाम से ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क तोड़ने दिन रात लगी जरूर है मगर उसके पास इलेक्ट्रॉनिक इक्वीपमेंट जब्ती और गैम्बलिंग ऐक्ट के आलावा कुछ भी नहीं। मुनाफा इतना बड़ा है कि पकड़े गए आरोपियों के लिए यह पाबंदी कत्तई नाकाफी है।
🌑 बड़ा और कडा़ नेटवर्क, जीतने का लालच बनता जा रहा “बिजनस अपार्चुनिटी”
कुछ रूपये देकर आईडी लेने के बाद लिमिट तय होते ही जहां युवा मोबाईल पर आसानी से आनलाईन बेटिंग कर बड़ी जीत की संभावना में हर मैच की हर गेंद पर दांव लगाने लगे हैं वहीं 20 लाख का पैनल खरीद कई लोग इसे बेहतर व्यवसाय का रूप दे चुके हैं। पैनल लेने के बाद कंट्रोल सेंटर से आईडी के लिए कन्वेंस करने एक बड़ी टीम लग जाती है। आइडेंटीफाई लेबर क्लास को महज 2 हजार देकर उनके नाम अलग अलग बैंक में मल्टीपल एकाउंट खुलवा बेटिंग के रूपये का लेन देन होता रहा है। बेरोजगारी के आलम का पूरा फायदा भी इस अवैध कारोबार में लगे लोग आसानी से उठा रहे हैं। सैकडो़ं युवाओं का काम सिर्फ बैंक एटीएम से रूपये निकालने और मल्टीपल एकाउंट में जमा करवाना होता है जिस पर उनका कमीशन फिक्स है।

🌑 मिनटों में होता है काम, सायबर टीम पकड़े भी तो साक्ष्य का आधार “नदारद”
एक सामान्य ऑफिस की तरह ही इनके ठिकानों पर स्टाफ में कार्य का वितरण होता है। दूसरों को कन्वेंस कर बैंक खाता खुलवाना, एप्लीकेशन का प्रमोशन, सट्टा खेलने वालों को खाता नंबर व व्हाट्सएप नंबर बदल कर प्रोवाइड करना, स्पोर्ट्स और नंबरों आदि माध्यम से दांव लगवाना, सट्टा खेलने के लिए रकम जमा और वितरण करने का हिसाब किताब रखना, इन सभी काम के लिए अलग अलग लोगों की टीम बनाई गई है।
महादेव और रेडी अन्ना ऑनलाइन बेटिंग के लिए व्हाट्सएप, टेलीग्राम एप्लीकेशन और वेबसाइट के माध्यम से इंटरनेट प्लेटफार्म पर लिंक प्रोवाइड कर ग्रुप एडमीन पैनल बेटिंग सुविधा उपलब्ध करा रहा है। पुलिस से बचने के लिए तमाम हाईटेक तरीके अपना रहे हैं, इस गोरख धंधे में वर्क लोड और टीम पावर डिसेंट्रलाईज होने से बीच की कड़ी तक पुलिस पहुंची भी तो सबूत का आधार कमजोर हो जाता है। पुलिस की नजर से बचने के लिए टेलीग्राम पर सट्टा खिलाने वाली ऐप की लिंक भेजी जाती और लिंक सोर्स सर्चिंग के दौरान मैच खत्म होते ही ग्रुप डिलिट कर दिया जाता है।
🌑 डिसेंट्रलाईज पावर और मल्टीपल टीम वर्क देता है पुलिस को कड़ी “चुनौती”
जब आनलाईन बेटिंग का इच्छुक व्यक्ति सट्टा कारोबारियों से संपर्क करता है, तो उस संबंधित व्यक्ति को ऐप दे एकाउंट क्रिएट कर उसकी लाॅगिन होती है। अन्य कन्वेंस्ड आइडेंटीफाई लेबर क्लास व्यक्ति को कुछ कमीशन दे उसके नाम से खोले गए अकाउंट में आईडी लेने वाले से रूपये जमा करवाए जाते हैं और इसी आधार पर उसकी लिमिट तय होती है फिर उसे बेटिंग लिंक प्रोवाइड की जाती है। कुछ घंटों बाद हार जीत राशि का समायोजन और लेखा बाद अगर खेलने वाला जीतता है तो वो सीधे उस अकाउंट से अपने अकाउंट में ट्रांसफर कर सके-ऐसी सुविधा भी दी जाती है। कुल मिलाकर इनकी नेटवर्क टीम और मजबूत नियम को अल्प अवधि में तोड़ पाना और टीम के इन्वाल्वमेंट को सबूत सहित सामने लाना पुलिस टीम के लिए टेढ़ी खीर साबित होता है।

🌑 जीएसटी रजिस्ट्रेशन के प्रयास में लगे हैं बेटिंग ऐप संचालक, रोकना जरूरी
खबर यह भी है कि आनलाईन पेड गेमिंग की आड़ में महादेव और रेड्डी अन्ना सहित कई बेंटिंग ऐप इस व्यवसाय को रजिस्टर्ड करने और जीएसटी नंबर लेने का प्रयास कर रहे हैं। अगर किसी अन्य रास्ते से भ्रमित कर जीएसटी नंबर मिलता है तो यह गोरख अवैध कारोबार पूर्णतः कानूनी मान्यता ले लेगा और उसके बाद अब तक हुई तमाम सैकडो़ं कार्रवाईयों पर पानी फिर जाएगा। शासन स्तर पर इसे रोकने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। दरअसल आनलाईन गेम ऐप की आड़ में स्पोर्ट्स से संबंधित ऐप तैयार कर इसे आनलाईन व्यवसाय का रूप दिया जा रहा है फिर इस तरह के गेमिंग ऐप ग्रुप तैयार कर उनमें काम्पीटिशन करवाते हैं, कुछ समय में गोल्डन बैच या मेम्बरशिप का ईनाम रख लोगों का इन्वाल्वमेंट बढा़ते हैं और ऐप पर इंटरनेशनल स्पोर्ट्स का प्रचार कर बेटिंग लायक लोग आइडेंटीफाई कर उनका ग्रुप बना लिंक प्रोवाइड कर बेंटिग शुरू करवाते हैं। लीगल से इनलीगल कारोबार के इस तरीके की सर्चिंग काफी पुलिस महकमे के लिए मुश्किल और चुनौती भरा काम ही है।
🌑 दुर्ग एसपी सहित कई अधिकारी ऐप संचालकों के आँखों की “किरकिरी”
वर्तमान समय दुर्ग जिला पुलिस महादेव और रेड्डी अन्ना बेटिंग ऐप के लिए आंखों की न सिर्फ किरकिरी बनी हुई है बल्कि अरबों के इनके नेटवर्क को दिन रात तोड़ने में मजबूती से खडे़ एसपी डाॅ. अभिषेक पल्लव सहित कई अधिकारी इस अवैध कारोबारियों के राडार पर भी हैं। छत्तीसगढ़ के जगदलपुर, मध्यप्रदेश के छिंदवाडा़ कंट्रोल सेंटर को खत्म करने में दुर्ग जिला पुलिस के अहम योगदान ने महादेव ऐप के कई पाइंटर को बुरी तरह तोड़ दिया है। खबर यह भी है कि एक तरफ बड़े नुकसान की नौबत से गुजर रहे बेटिंग ऐप संचालक दुर्ग पुलिस कप्तान डाॅ अभिषेक पल्लव को सीधे तौर पर जवाबदार मान रहे हैं वहीं कार्रवाई के दौरान रसूखदारों तक पहुंच की सिफारिश को कोने में फेंक एसपी दुर्ग अंतर्राष्ट्रीय रूप ले चुके महादेव और रेड्डी अन्ना ऐप को जड़ तक खत्म करने कमर कस खडे़ हैं।
दुर्ग पुलिस कप्तान डाॅक्टर अभिषेक पल्लव के चेहरे पर चर्चा के दौरान बेटिंग ऐप को जड़ समेत खत्म करने का जो जज्बा दिखाई दिया उस पर कार्रवाई के दौरान एक्ट को लेकर आ रही अड़चनें भी झलक रहीं हैं मगर उन्हें भरोसा है कि जिस तरह चिट फंड ऐक्ट के लिए कुर्की का कानून लाया गया उसी तरह इस अवैध कारोबार को समाज से जल्द उखाड़ फेंकने प्रभावी कदम जल्द सामने आएगा।
🌑 नेचर आफ क्राईम मूवेबल होने से एक्शन मुश्किल जरूर है, असंभव नहीं
एसपी डाॅ. अभिषेक पल्लव ने बताया कि इस कारोबार में ऐप बनाने वाला, ऐप का संचालक, डिपॉजिट ले रहे लोग, पैसा लेकर बाद में वापस करने वाली एजेंसी, पैनल खरीददार, आईडी देने वाले, आईडी लेने लोगों को तैयार करने वाली कन्वेसिंग टीम, आईडी ले बेटिंग करने वाले, आनलाईन रूपये लेने और पेमेंट देने मल्टीपल एकाउंट के लिए अलग कन्वेंसिग टीम, खाताधारक अलग और अलग अलग आपरेटिंग टीम, दीगर राज्यों में कंट्रोल सेंटर पर विभागीय साइबर टीम की वेब माॅनिटरिंग और नेचर आफ क्राईम मूवेबल होने से फिजिकल टीम को पहुंच कर कार्रवाई करना काफी मुश्किल जरूर है लेकिन असंभव नहीं। सीमित संसाधनों और फोर्स के बीच सामंजस्य बनाते हुए हम लगातार अभियान चला रहे हैं। मक़सद इस नेटवर्क को सामाजिक तौर पर सामने लाना और ब्रांचेज तोड़ कर रूट खत्म करना है।
🌑 छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में “महादेव और रेड्डी अन्ना” ने बना लिया है कंट्रोल सेंटर
डाॅ पल्लव ने बताया कि छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों में भी 15 से 20 कंट्रोल सेंटर होने की जानकारी हमें मिली है। आईडी लेकर ऑनलाइन बेटिंग करने वालों से आह्वान किया जा रहा है कि आईडी लेकर पूर्व कभी बेटिंग किए हैं तो तत्काल आईडी डिलीट कर दें। जो लोग पैनल खरीद रखें हैं उन तक पहुंचना हमारा मकसद है। कुछ लोगों ने डेढ़ से दो वर्ष के भीतर इस व्यवसाय से जमीन, आलिशान मकान और संपत्ति खरीदी है, उनकी भी जानकारी मिली है, जब हम ठोस एविडेंस दिखाएंगे तो ईडी का इंवाल्व हो बड़ी कार्रवाई संभव हो सकेगी। मनी लांड्रिंग के रास्ते तलाश कर कानूनी रूप से हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। चूंकि गैंबलिंग एक्ट में यह प्रावधान है कि इनकी प्रोसीड से अगर कुछ लिया गया है तो उसे जब्त करने की कार्यवाही की जा सकती है इसलिए आईडी आबंटित करने वाले, डिपॉजिट लेने वाले, जिनके अकाउंट में पैसा आ रहा है उन पर कड़ी नजर रखी जा रही है। राज्य शासन द्वारा कोई स्पेशल एक्ट लाया जाता है तो और भी कड़ी कार्रवाई होने की उम्मीद है। कार्रवाई के दौरान सामने आई सूचनाओं और लेखाजोखा दस्तावेज से मिले रिकार्ड के आधार पर हजारों बैंक खातों के ट्रांजेक्शन पर टीम नजर रख रही है। इस व्यवसाय से जुड़े हुए लोग मल्टीपल अकाउंट अलग-अलग बैंकों में प्रारंभ कर उनमें रुपयों का लेन-देन करते रहे हैं लेकिन किसी भी अकाउंट में 25 से 30,000 से ज्यादा का अमाउंट ये लोग नहीं रखते हैं। रकम जैसे ही खातों में आती है, अगले ही दिन रुपए निकाल लिए जाते हैं। अलग-अलग व्हाट्सएप नंबर से कई हजार अलग अलग बैंक अकाउंट छत्तीसगढ़ के आलावा अन्य राज्यों के भी मिले हैं, उन पर भी जांच हो रही है। 500 से अधिक व्हीआईपी मोबाइल नंबर का एडमीन बना व्हाट्सएप ग्रुप एक्टिव हैं, कई टेलिग्राम ग्रुप पर नजर रखी जा रही है, 10 से अधिक वेबसाइट की जानकारी मिली है, सभी ओर टीम लगाई गई है। बैटिंग साइट्स और मोबाइल नंबर को इंटरनेट व टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर के माध्यम से रिमूव, ब्लॉक कराने का भी कार्य किया जा रहा है। एथिकल हैकिंग के माध्यम से उपरोक्त बैटिंग साइड में सट्टा खेलने वाले लाखों आईडी की जानकारी निकाली गई है जिनमें आगे कार्यवाही की जा रही है। अब तक हुई कार्रवाई से जो कड़ी जुडी़ है उससे हम आगे बढ़ रहे हैं और एक एक कर बड़ी सफलता भी मिल रही है। बड़ी संख्या में मोबाइल, लैपटाप, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, अलग-अलग सिम, फर्जी बैंक खाता, चेकबुक, एटीएम कार्ड सहित अरबों रुपए के लेन-देन के दस्तावेज जब्त किए हैं। एंटी क्राइम और साइबर यूनिट सहित कई टीम इन पर काम कर रही है।

🌑 अभियान चला टीम के साथ खुद फिल्ड में उतर कर रहे हैं कार्रवाई-एसपी
एसपी ने कहा कि इस कारोबार से जुड़े लोगों पर लगातार कार्रवाई होगी तो पैनल लेने वालों का प्रॉफिट कम होगा, आईडी लेने वालों में भी कार्रवाई का डर होगा। प्रॉफिट कम होने से नए लोग पैनल नही खरीदेंगे और पैनल चला रहे इन लीगल गेम वाले लोग लीगल गेम में कन्वर्ट हो जाएंगे। कई इंजीनियरिंग, मेडिकल छात्र, हाई एजुकेटेड युवाओं का इंवाल्वमेंट सामने आया है, इस पर भी काम कर रहे हैं। चूंकि मेन आपरेटर दुर्ग के हैं तो यहां के युवाओं का इंवाल्वमेंट अधिक है और वो लोग अन्य राज्यों में छिप कर मानिटरिंग कर रहे हैं। पूर्व में आनलाईन बेटिंग की कोई बात थी नहीं इसलिए आईटी ऐक्ट अबेडमेंट में आनलाईन बेटिंग को लेकर कोई प्रावधान नहीं है। हाई कोर्ट का निर्देश है कि गेम आफ स्किल एलाउड है, गेम आफ चांस गैर कानूनी है। भिलाई दुर्ग से कई नाम मिले हैं जो अन्य राज्यों में नेटवर्क बढा़ रहे हैं, उन तक पहुंचने का प्रयास हो रहा है। जुआ, सट्टा, कबाड़, अवैध शराब ऐसे कारोबार सदियों से होते रहे हैं, इन्हें पूर्णतः खत्म करना संभव न भी हो तो लगातार कार्रवाई से इनको कम किया जा सकता है। इन्हें दबा कर रखने से कई अपराध पर अंकुश संभव होता है इसलिए पारदर्शिता से वे स्वयं टीम के साथ फिल्ड में जा रहे हैं और अभियान चला एविडेंस के साथ हरसंभव प्रयास कर रहे हैं।

