*ड्राइविंग लाइसेंस फर्जी होने पर भी बीमा कंपनी को देना होगा क्लेम की राशि, इंश्योरेंस कंपनी ने मोटर दुर्घटना दावा प्राधिकरण के फैसले को दी थी चुनौती*

*ड्राइविंग लाइसेंस फर्जी होने पर भी बीमा कंपनी को देना होगा क्लेम की राशि, इंश्योरेंस कंपनी ने मोटर दुर्घटना दावा प्राधिकरण के फैसले को दी थी चुनौती*


ड्राइविंग लाइसेंस फर्जी होने पर भी बीमा कंपनी को देना होगा क्लेम की राशि, इंश्योरेंस कंपनी ने मोटर दुर्घटना दावा प्राधिकरण के फैसले को दी थी चुनौती

प्रयागराज 21 फरवरी  । इलाहाबाद हाईकोर्ट में मोटर दुर्घटना दवा के मामले में कहा है कि ड्राइविंग लाइसेंस नकली होने के आधार पर बीमा कंपनी देयों के भुगतान से बच नहीं सकता । बीमा कंपनी को सभी देयों का भुगतान करना होगा । यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड बनाम लेहरू व अन्य ने 2003 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए न्यायमूर्ति सुभाष चंद्र शर्मा की पीठ ने कहा कि नियोक्ता से यह उम्मीद नहीं होती है कि वह यह रोजगार के समय जारीकर्ता प्राधिकरण से ड्राइविंग लाइसेंस को वास्तविकता सत्यापित करेगा ।

मामले में नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड ने मोटर दुर्घटना दावा प्राधिकरण गाजियाबाद के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी । प्राधिकरण ने मृतक को 6 फ़ीसदी ब्याज के साथ 12 लाख 70 हजार 406 रुपए की राशि भुगतान करने का निर्देश दिया था । बीमा कंपनी ने यह दावा किया कि यह रिकॉर्ड में है कि दुर्घटना ट्रक चालक की लापरवाही से हुई थी । मालिकाना हक बीमा धारक के पास था । उन्होंने तर्क दिया कि दुर्घटना के समय चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था। न्यायाधिकरण ने बीमा कंपनी पर मुआवजे के भुगतान की देनदारी तय करने मैं गलती की है।