राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भारतीय ज्ञान परंपरा का समावेश भारत को विश्वगुरु बनाएगा : टंकराम वर्मा

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भारतीय ज्ञान परंपरा का समावेश भारत को विश्वगुरु बनाएगा : टंकराम वर्मा


🛑साईंस कॉलेज दुर्ग में एनईपी 2020 पर राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला, 8 विश्वविद्यालयों के कुलपति हुए शामिल

दुर्ग, 02 जनवरी 2026। किसी भी देश की शिक्षा नीति वहां कि संस्कृति, विकास, प्रकृति एवं प्रगति के अनुरूप होना चाहिए। आज के कार्यशाला के प्रथम दिन उद्घाटन सत्र के पश्चात् शिक्षा, संस्कृति, उत्थान न्यास, नई दिल्ली के राष्ट्रीय सचिव अतुल कोठारी ने अपने आमंत्रित व्याख्यान में बड़ी संख्या में उपस्थित उच्चशिक्षा विभाग के कुलपतिगण, अधिकारी एवं प्राध्यापकों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भारतीय ज्ञान परंपरा का समावेश विषय पर संबोधित करते हुए ये उल्लेख किया। केन्द्र एवं राज्य सरकार हर स्तर पर शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा के समावेश का प्रयास कर रही है। डॉ. कोठारी ने कहा कि भारत में प्रचलित कण कण में भगवान को आधार मानकर विदेशों में गौड पार्टिकल पर शोध कार्य हो रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखने पर भी बल दिया गया है। शिक्षा नीति में सरलता के साथ साथ व्यवहारिकता होना चाहिए। विद्यार्थियों का समग्र मूल्यांकन आवश्यक है। इसी को आधार मानकर विद्यार्थियों का चरित्र निर्माण किया जा सकता है।

मुख्य अतिथि के रूप में अपने उद्‌गार व्यक्त करते हुए छत्तीसगढ़ शासन के उच्चशिक्षा आपदा प्रबंधन राजस्व एवं पुनर्वास मंत्री श्री टंकराम वर्मा ने कहा कि भारत की पहचान भारतीय ज्ञान परंपरा से है, वेद, उपनिषद, पुराण, रामायण, ज्योतिष, खगोलशास्त्र आदि सभी विधाऐं इसमें निहित है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति का मूल आधार अध्यात्म एवं नैतिकता है। एनईपी विद्यार्थियों को भविष्य के लिये मार्गदर्शन करेगी, इसका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को विवेकवान बनाना है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू करना भारत को विश्व गुरू बनाने में सार्थक प्रयास है।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित छत्तीसगढ़ शासन के तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार एवं अनुसूचित जाति विकास मंत्री श्री गुरू खुशवंत साहेब ने अपने उद्बोधन में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में आधुनिकता एवं भारतीय संस्कृति को जोड़ने का प्रयास किया गया है। छत्तीसगढ़ शासन अपने स्तर पर हर संभव प्रयास कर रहा है। हमारा यह उद्देश्य है, कि भविष्य में भारत को आत्मनिर्भर बनाने हेतु युवा पीढ़ी को तैयार करें।

आयुक्त, उच्चशिक्षा श्री संतोष देवांगन ने उद्घाटन सत्र के आरंभ में स्वागत भाषण एवं विषय प्रवर्तन किया। डॉ. देवांगन ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा का राष्ट्रीय शिक्षा नीति में समावेश विद्यार्थियों के लिये सर्वोत्तम है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में विद्यार्थियों के सर्वोगीण विकास हेतु कौशल विकास, भारतीय ज्ञान परंपरा का समुचित ज्ञान एवं व्यवहारिक शिक्षा पर जोर दिया गया है। इससे आने वाले समय में विद्यार्थियों को लाभ होगा। आज शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय, दुर्ग में उच्चशिक्षा विभाग छ.ग. शासन रायपुर द्वारा आयोजित राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भारतीय ज्ञान प्रणाली का एकीकरण एक समग्र शैक्षिक परिकल्पना विषय पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के दौरान अनेक मुद्दों पर सारगर्भित जानकारी सामने आयी। यह जानकारी देते हुए साईंस कालेज, दुर्ग के प्राचार्य डॉ. अजय सिंह ने बताया कि आज कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में छ.ग. शासन के 2 केबिनेट मंत्री, माननीय श्री टंकराम वर्मा तथा श्री गुरू खुशवंत साहेब उपस्थित थे। इनके अलावा 8 विश्वविद्यालयों के कुलपतिगण तथा 05 संभागों के उच्चशिक्षा के अपर संचालक तथा छ. ग. प्रदेश के प्रत्येक जिले के अग्रणी महाविद्यालयों के प्राचार्य, आईक्यूएसी समन्वयक तथा एनईपी समन्वयकों सहित बड़ी संख्या में विभिन्न विषयों के प्राध्यापक तथा दुर्ग जिले के शासकीय महाविद्यालयों के प्राचार्यगण उपस्थित थे।

शासकीय संगीत महाविद्यालय, दुर्ग के विद्यार्थियों द्वारा प्राचार्य डॉ. ऋचा ठाकुर के नेतृत्व में प्रस्तुत सरस्वती वंदना एवं सरस्वती पूजन तथा छ.ग. के राज्यगीत की प्रस्तुति के पश्चात् अतिथियों का स्वागत आयुक्त, उच्चशिक्षा श्री संतोष देवांगन तथा अपर संचालकों द्वारा पौधा, श्रीफल एवं शॉल एवं ढोकरा एवं बस्तर आर्ट से निर्मित स्मृति चिन्ह भेंटकर किया गया। कार्यकम का संचालन डॉ. ज्योति धारकर, डॉ. अम्बरीश त्रिपाठी तथा डॉ. जनेन्द्र दीवान ने किया।

इससे पूर्व माननीय मंत्रीगणों द्वारा कुलपतिगणों की उपस्थिति में साईंस कालेज, दुर्ग में नव निर्मित रिकार्डिंग एवं प्रसारण स्टूडियों ज्ञानवाणी का लोकार्पण भी किया गया। इस स्टूडियों में उच्चशिक्षा विभाग शासन के निर्देशानुसार प्राध्यापकगण अपने विषयों से संबंधित ऑडियो विडियो लेक्चर तैयार कर विद्यार्थियों को उपलब्ध करायेंगे, जिसका सीधा लाभविद्यार्थियों को मिलेगा।

आयुक्त, उच्चशिक्षा विभाग छ.ग. शासन रायपुर के मार्गदर्शन में आयोजित होने वाले इस दो दिवसीय कार्यशाला में छत्तीसगढ़ प्रदेश के प्रत्येक जिले के अग्रणी महाविद्यालय के प्राचार्य, आईक्यूएसी समन्वयक तथा एनईपी समन्वयकों को मिलाकर लगभग 100 प्रतिभागी उपस्थित थे। इनके अलावा छ.ग. के 5 संभागों के अपर संचालक, उच्चशिक्षा भी कार्यशाला में शिरकत करेंगे। आयोजन समिति के डॉ. ए.के. खान के अनुसार इस कार्यशाला में कुशाभाऊ ठाकरे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर पकंज नयन पाण्डेय, बस्तर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर मनोज कुमार श्रीवास्तव, बिलासपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर ए.डी.एन. बाजपेयी, पंडित सुन्दरलाल शर्मा विश्वविद्यालय, बिलासपुर के कुलपति प्रोफेसर विरेन्द्र सारस्वतं छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय भिलाई के कुलपति प्रोफेसर अरूण अरोरा भी इस कार्यशाला के दौरान उपस्थित थे। यह पहला अवसर है, कि साईंस कालेज, दुर्ग में उच्चशिक्षा विभाग रायपुर द्वारा आयोजित कार्यशाला में छत्तीसगढ़ प्रदेश के उच्चशिक्षा के लगभग सभी शीर्षस्थ मंत्री, अधिकारी, कुलपतिगण उपस्थित थे।

गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर के कुलपति प्रोफेसर आलोक चक्रवाल ने अपने प्रस्तुतिकरण में कहा कि शिक्षकों को नई ब्रांच का गहराई से अध्ध्यन करना चाहिए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को आत्म निर्भर बनाना है। यदि विद्यार्थी स्वावलंबी हो जाये तो यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लक्ष्य के अनुरूप होगा। इस नीति में कैफेटेरिया एप्रोच को बढ़ावा दिया गया है। डॉ. चकवाल के अनुसार राष्ट्रीय शिक्षा नीति में अपार संभावनायें है। आईआईटी भिलाई के डायरेक्टर श्री राजीव प्रकाश ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में अंर्तसंकाय अध्ययन की जो सुविधा प्रदान की गयी है, वह विद्यार्थियों के लिये लाभदायक है। इस नीति में भारतीयता झलकती है। हम अपने भारतीय मूल्यों को प्रकृति के आधार पर विद्यार्थियों को स्थानांतरित कर सकते है। भिलाई आईआईटी द्वारा किए जा रहे प्रयासों को पावर प्वाइंट प्रेजेटेंशन के माध्यम से प्रदर्शित करते हुए डॉ. राजीव प्रकाश ने बेस्ट प्रैक्टिसेस की भी चर्चा की।

एनआईटी सूरत, गुजरात से पधारे प्रोफेसर अनुपम शुक्ला ने अपने उद्बोधन में एनआईटी सूरत में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर केन्द्रित नवाचार के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि यहां शॉर्ट टर्म इंटर्नशिप शुरू की गयी तथा भारतीय ज्ञान परंपरा केन्द्र स्थापित किया गया। उन्होंने कहा कि एनईपी 2020 के अंतर्गत विद्यार्थियों को अनुभवनात्मक सीखना चाहिए। लचीला पाठ्यक्रम, कौशल विकास तथा शिक्षकों के प्रशिक्षण एवं गुणवत्ता प्रमुख बिंदु है। डॉ. शुक्ला ने एनआईटी सूरत में जनजातीय क्षेत्रों के लिए किए गए उल्लेखनीय कार्यों की विस्तार से जानकारी दी।

अगले सत्रों में होगा। शारदा समूह झाबुआ मध्य प्रदेश के अध्यक्ष एवं सरदार वल्लभ भाई पटेल प्रौद्योगिक संस्थान, सूरत के जनजाति विकास केन्द्र के सदस्य श्री ओम प्रकाश शर्मा कल कार्यशाला के द्वितीय सत्र में अपने विचार करेंगे।

अंत में राष्ट्रगान के साथ समाप्त हुये प्रथम दिवस कार्यशाला में धन्यवाद ज्ञापन साईंस कालेज, दुर्ग के प्राचार्य डॉ. अजय कुमार सिंह ने किया। आज के कार्यशाला में उपस्थित प्रमुख लोगों में हेमचंद यादव विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. एन.पी. दीक्षित, उच्चशिक्षा विभाग के संयुक्त संचालक डॉ. अरूण सिन्हा, रायपुर के अपर संचालक, उच्चशिक्षा डॉ. तापेश चन्द्र गुप्ता, बस्तर के अपर संचालक, उच्चशिक्षा डॉ. अनिल कुमार, अम्बिकापुर के अपर संचालक, उच्चशिक्षा डॉ. ताजूर रहमान।