दाऊ श्री वासुदेव चंद्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय दुर्ग का चतुर्थ दीक्षांत समारोह संपन्न

दाऊ श्री वासुदेव चंद्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय दुर्ग का चतुर्थ दीक्षांत समारोह संपन्न


🔴1536 विद्यार्थियों को उपाधि, 45 को विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक

🔴“दीक्षांत नई जिम्मेदारियों भरी यात्रा की शुरुआत” – राज्यपाल रमेन डेका

दुर्ग, 29 जनवरी 2026। दाऊ श्री वासुदेव चन्द्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय, दुर्ग का चतुर्थ दीक्षांत समारोह आज विश्वविद्यालय परिसर में छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री रमेन डेका की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ। समारोह में पशुचिकित्सा एवं पशुपालन, दुग्ध प्रौद्योगिकी एवं मात्स्यिकी संकाय के 1536 विद्यार्थियों को स्नातक, स्नातकोत्तर एवं पीएचडी उपाधियां प्रदान की गईं।


इस अवसर पर 45 उपाधि धारकों को विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक तथा पशुचिकित्सा एवं पशुपालन संकाय के 08 स्नातक विद्यार्थियों को पंडित तीरथ प्रसाद मिश्रा मेमोरियल स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। राज्यपाल श्री डेका ने विद्यार्थियों को अपने करकमलों से उपाधि पत्रक एवं स्वर्ण पदक प्रदान किए।
समारोह में प्रदेश के पशुधन विकास, मत्स्य पालन, कृषि विकास एवं किसान कल्याण, जैव प्रौद्योगिकी एवं आदिम जाति कल्याण मंत्री श्री रामविचार नेताम विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इसके अलावा छ.ग. राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्र विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष एवं दुर्ग ग्रामीण विधायक श्री ललित चन्द्राकर तथा अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष एवं अहिवारा विधायक श्री डोमन लाल कोर्सेवाड़ा भी समारोह में शामिल हुए।


शिक्षा जीवन भर चलने वाली प्रक्रिया : राज्यपाल


दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल श्री रमेन डेका ने उपाधि प्राप्त करने वाले सभी छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह केवल पढ़ाई पूरी होने का अवसर नहीं, बल्कि जीवन की एक नई जिम्मेदारियों भरी यात्रा की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि शिक्षा कभी समाप्त नहीं होती, सीखने की प्रक्रिया जीवन भर चलती रहती है।
राज्यपाल ने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है और यह क्षेत्र ग्रामीण परिवारों, विशेषकर महिलाओं एवं छोटे किसानों की आय का महत्वपूर्ण साधन है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुपालन और मत्स्य पालन की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए आधुनिक तकनीक एवं वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाने पर बल दिया।


राज्यपाल श्री डेका ने विश्वविद्यालय द्वारा संक्रामक रोगों की रोकथाम, नस्ल सुधार एवं अनुसंधान कार्यों की सराहना की। डेयरी प्रौद्योगिकी के विद्यार्थियों को मिलावट की समस्या के प्रति सजग रहने एवं गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी, ताकि भारतीय उत्पाद वैश्विक स्तर पर विश्वसनीय बन सकें। उन्होंने मत्स्य पालन के क्षेत्र में कांकेर जिले की सफलता से प्रेरणा लेने की बात भी कही।
राज्यपाल ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे केवल नौकरी खोजने वाले न बनें, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के संकल्प के साथ रोजगार देने वाले बनें। उन्होंने कहा कि पशु चिकित्सा, डेयरी एवं मत्स्य पालन जैसे विषय मानवता की सेवा के सशक्त माध्यम हैं।


ग्रामीण अर्थव्यवस्था के नये दूत हैं उपाधिधारी विद्यार्थी : कृषि मंत्री


कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम ने कहा कि छत्तीसगढ़ की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था में पशुपालन, डेयरी एवं मत्स्य पालन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। दीक्षांत केवल डिग्री प्राप्त करने का अवसर नहीं, बल्कि ज्ञान, नवाचार और समाज सेवा की नई यात्रा का आरंभ है।
उन्होंने कहा कि उपाधि प्राप्त विद्यार्थी छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के नये दूत, नये मार्गदर्शक और परिवर्तनकर्ता हैं। राज्य सरकार पशुपालन, डेयरी एवं मत्स्य पालन से जुड़े स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन, अनुदान एवं प्रशिक्षण प्रदान कर रही है। जब आप किसी पशु का उपचार करते हैं, किसान को मार्गदर्शन देते हैं या मछुआरों को नई तकनीक सिखाते हैं, तब आप केवल पेशेवर नहीं रहते, बल्कि परिवर्तन के वाहक बन जाते हैं।


प्रगति प्रतिवेदन एवं दीक्षांत उद्बोधन


विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आर.आर.बी. सिंह ने विश्वविद्यालय का प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. मीनेश सी. शाह ने दीक्षांत उद्बोधन दिया। कार्यक्रम का संचालन विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. बी.पी. राठिया ने किया।


इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विभिन्न अधिष्ठाता, प्राध्यापकगण, उपाधिधारी विद्यार्थी एवं उनके अभिभावक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।