🔴हिन्दुस्तान स्टील एम्प्लाइज यूनियन, की मांग स्वीकार
भिलाईनगर, 20 अगस्त 2026। वेतन भुगतान से जुड़े मामलों में कर्मचारियों के हित में महत्वपूर्ण प्रावधान को केंद्रीय वेतन संहिता नियमों में शामिल किया गया है। वर्ष 2020 में श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा वेतन संहिता, 2019 (Code on Wages) के केंद्रीय नियमों के मसौदे पर सुझाव एवं संशोधन आमंत्रित किए गए थे। इसके जवाब में एचएसईयू (CITU), भिलाई ने नियोक्ता द्वारा वेतन भुगतान संबंधी आदेश के खिलाफ अपील किए जाने की स्थिति में कर्मचारी के हितों की सुरक्षा के लिए राशि जमा करने की शर्त जोड़ने का सुझाव दिया था, जिसे श्रम मंत्रालय द्वारा स्वीकार कर नियमों में शामिल किया गया है।
एचएसईयू की ओर से श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के तत्कालीन उप निदेशक एमए खान को भेजे गए पत्र में मांग की गई थी कि संहिता की धारा 45 के तहत सक्षम प्राधिकारी द्वारा कर्मचारी के पक्ष में दिए गए वेतन संबंधी आदेश के खिलाफ नियोक्ता द्वारा अपील किए जाने से पहले आदेशित राशि का एक हिस्सा अपीलीय प्राधिकारी के पास जमा करना अनिवार्य किया जाए।
संगठन ने अपने सुझाव में कहा था कि “नियोक्ता को धारा 49(1) के तहत अपील स्वीकार किए जाने से पहले धारा 45 के अंतर्गत प्राधिकारी द्वारा निर्धारित राशि का 50 प्रतिशत जमा करना होगा।”
एचएसईयू ने इस प्रावधान के पीछे तर्क देते हुए कहा था कि पूर्व में न्यूनतम मजदूरी अधिनियम में अपील का प्रावधान नहीं था, जबकि भुगतान मजदूरी अधिनियम में श्रमिक की बकाया राशि सुरक्षित रखने के लिए संपत्ति कुर्क करने जैसी शर्त मौजूद थी। ऐसे में यदि वेतन संबंधी आदेश के खिलाफ अपील करने के लिए किसी प्रकार की राशि जमा करने की बाध्यता नहीं होगी, तो नियोक्ता प्रत्येक आदेश को बिना पर्याप्त आधार के भी अपील में चुनौती दे सकते हैं।
संगठन के अनुसार, इससे गरीब श्रमिकों और कर्मचारियों को न्याय मिलने में अनावश्यक देरी हो सकती है। विशेषकर संविदा और आकस्मिक श्रमिकों के मामलों में लंबी न्यायिक प्रक्रिया वेतन संहिता के प्रभावी क्रियान्वयन के उद्देश्य को प्रभावित कर सकती है।
एचएसईयू ने अपने पत्र में कहा था कि अपील के अधिकार के साथ ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे श्रमिकों को अनावश्यक परेशानी और उत्पीड़न से सुरक्षा मिल सके तथा नियोक्ता द्वारा केवल प्रक्रिया को लंबा खींचने के उद्देश्य से अपील करने पर भी रोक लगे।
संगठन ने कहा कि श्रम मंत्रालय द्वारा एचएसईयू के इस सुझाव को स्वीकार करते हुए वेतन संहिता के नियमों में शामिल किया जाना श्रमिक हित में महत्वपूर्ण कदम है। इससे वेतन भुगतान से जुड़े मामलों में सक्षम प्राधिकारी के निर्णय के खिलाफ अपील की स्थिति में कर्मचारी के हित में आदेशित राशि की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

