SBI बैंक इंटरनल अकाउंट से करोड़ो रूपए को ट्रेड करने वाला चीफ मैनेजर गिरफ्तार

SBI बैंक इंटरनल अकाउंट से करोड़ो रूपए को ट्रेड करने वाला चीफ मैनेजर गिरफ्तार


🛑 केवल 8 महीने में किया 2.78 करोड रुपए का गबन, इन्वेस्ट किया क्रिप्टोकरंसी में

सीजी न्यूज ऑनलाइन 19 दिसंबर। भारतीय स्टेट बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय रायपुर में शासकीय रकम 2.78 करोड रुपए का गबन करने के आरोपी के मैनेजर को एंटी करप्शन ब्यूरो के द्वारा गिरफ्तार किया गया। आरोपी फर्जी एंट्री करके पैसे का गबन करता रहा और इन रूपयों को क्रिप्टोकरंसी ऑप्शन्स और कमोडिटी ट्रेडिंग में इनवेस्ट करता था। उक्त राशि आरोपी के द्वारा केवल 8 महीने में इन्वेस्ट की गई थी। इन फर्जी इंटरव्यू को शाखा में पदस्थ अन्य कोई अधिकारी कर्मचारी डिटेक्ट नहीं कर सका इसकी भी जांच एंटी करप्शन ब्यूरो के द्वारा की जा रही है।

भारतीय स्टेट बैंक क्षेत्रीय कार्यालय रायपुर से प्राप्त शिकायत के आधार पर ब्यूरो में 17 दिसंबर को अपराध क्रमांक 67/2025 धारा 316 (5). 318 (4), 61(2), 338, 336(3), 340 (2) एवं धारा 13 (1) (ए), 13(2), पीसीएक्ट 1988 यथासंशोधित 2018 पंजीबद्ध किया गया। अपराध विवेचना के तारतम्य में आरोपी विजय कुमार आहके चीफ मैनेजर स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया, रायपुर के निवास में विधिवत सर्च कार्यवाही कर प्रकरण से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज एवं इलेक्ट्रॉनिक एविडेन्स जप्त किये गये। आरोपी चीफ मैनेजर, स्पेशलाईज्ड करेंसी मैनेजमेंट शाखा (SCAB) जो कि एक अत्यंत संवेदनशील एवं महत्वपूर्ण शाखा है जिसका कार्य अन्य शाखाओं को कैश पहुंचाने व मैनेज करना हैं, के प्रमुख के तौर पर पदस्थ था।

शाखा प्रमुख रहते हुए आरोपी द्वारा बैंक के महत्वपूर्ण इंटरनल ऑफिस अकाउंट (सस्पेन्स अकाउंट-जिसकी कोई लिमिट तय नहीं है) जिसे आरोपी ने अपने ट्रेडिंग के लत को पूरा करने के लिये ब्लैंक चेक के तौर पर उपयोग किया, और योजनाबद्ध तरीके से लगभग आठ महीनों मे 2,78,25.491 /- रूपये (दो करोड, अठहत्तर लाख, पच्चीस हजार चार सौ इकानबे रूपय) की अवैध निकासी कर अपने एवं अपनी पत्नी के खाते में प्राप्त किया गया। आरोपी द्वारा रेड फ्लैग इंडिकेटर (RFI) जो की एक बैंक में स्थापित मानक हैं उसको बायपास कर निर्धारित समय जो कि तीस दिन होता था, उससे पूर्व ही मल्टीपल फेक इंट्रीज कर रोलओवर कर दिया गया, जिससे सिस्टम में कोई भी अलर्ट जनरेट न हो सकें। इस तरह उसके द्वारा सुरू के महिनों में 3-4 फेक इंट्रीज की गई और बाद की महीनों में मल्टीपल फेक इंट्रीज की गई. किसी भी सहकर्मी और सुपरवाईजरी अधिकारी द्वारा इन फेक इंट्रीयों को डिटेक्ट नहीं किया गया जो कि डयू डेलिजेन्स की कमी को दिखाता है और यह एक जाँच का विषय है। बाद में इस रकम को क्रिप्टो करेंसी, ऑप्शन्स और कमोडिटी ट्रेडिंग में धन एप्प और डेल्टा एक्श्चेंज के माध्यम से निवेश कर आरोपी द्वारा शासकीय राशि का गबन किया गया। आरोपी विजय कुमार आहके, के विरूद्ध पर्याप्त साक्ष्य पाये जाने पर 18 दिसंबर को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश किया जाता है। प्रकरण में अन्य अपराधी अधिकारियों और उनकी भूमिका के संबंध में पूछताछ एवं अग्रिम विवेचना जारी है।