🔴तितुरडीह में तय हुआ प्रदर्शन स्थल
दुर्ग, 26 अगस्त 2026। जिला मुख्यालय के प्रमुख और व्यस्त मार्गों पर अब राजनीतिक, सामाजिक, व्यवसायिक एवं कर्मचारी संगठनों द्वारा धरना-प्रदर्शन, रैली, सभा और जुलूस आयोजित नहीं किए जा सकेंगे। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी अभिजीत सिंह ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी करते हुए इन गतिविधियों पर रोक लगा दी है। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
आदेश के तहत राजनांदगांव-पुलगांव-दुर्ग मुख्य मार्ग पर गंजपारा चौक से मालवीय नगर चौक तक, जेआरडी स्कूल से दुर्ग सेंट्रल जेल के मुख्य गेट तक, कब्रिस्तान से केंद्रीय विद्यालय, आरटीओ कार्यालय, खालसा स्कूल होते हुए मालवीय नगर चौक तक तथा सुराना कॉलेज से मानस भवन मार्ग होते हुए चर्च चौक तक धरना, प्रदर्शन, रैली, सभा और जुलूस पर प्रतिबंध रहेगा।
इन मार्गों अथवा उनके किनारे टेबल, कुर्सी, फर्नीचर, टेंट, शामियाना, माइक, साउंड सिस्टम आदि लगाकर भीड़ एकत्र करने पर भी रोक रहेगी। पुलिस और प्रशासन को छोड़कर लाउडस्पीकर, सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली अथवा तेज ध्वनि उत्पन्न करने वाले अन्य उपकरणों का उपयोग भी प्रतिबंधित किया गया है।
विशेष परिस्थितियों में अनुमति का प्रावधान
विशेष परिस्थितियों में ऐसे आयोजन की अनुमति देने के लिए अनुविभागीय दंडाधिकारी दुर्ग शहर (एसडीएम सिटी) को अधिकृत किया गया है। आयोजन की अनुमति के लिए संबंधित संगठन को कार्यक्रम की तारीख से कम से कम एक सप्ताह पहले सभी आवश्यक विवरण के साथ आवेदन प्रस्तुत करना होगा।
परिस्थितियों के आधार पर विभिन्न शर्तों के साथ अनुमति दी जा सकेगी। शर्तों का उल्लंघन होने पर अनुमति स्वतः निरस्त मानी जाएगी। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि ऐसी अनुमति प्राविधिक होगी और किसी भी समय बिना कारण बताए निरस्त की जा सकती है।
उल्लंघन पर जब्ती और कानूनी कार्रवाई
प्रतिबंध का उल्लंघन किए जाने पर मौके पर लगाए गए टेंट, शामियाना, फर्नीचर, साउंड सिस्टम, लाउडस्पीकर, बैनर सहित अन्य सामग्री जब्त की जाएगी। साथ ही उल्लंघन करने वाले व्यक्ति एवं संस्था के पदाधिकारियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 223, 125, 126, 285 सहित अन्य संबंधित कानूनों के तहत अभियोजन की कार्रवाई की जाएगी।
जिला अस्पताल, शासकीय कार्यालय और शिक्षण संस्थानों की परेशानी बनी वजह
प्रशासन के अनुसार इन मार्गों पर जिला पंचायत, जीएसटी, वन विभाग, परिवहन विभाग, विद्युत विभाग, श्रम विभाग, सेंट्रल जेल, महिला एवं बाल विकास विभाग, आदिवासी विकास विभाग, पशु चिकित्सा विभाग, पंजीयन कार्यालय, नगर निगम, कलेक्टर कार्यालय, जिला न्यायालय और पुलिस अधीक्षक कार्यालय सहित कई महत्वपूर्ण शासकीय संस्थान स्थित हैं।
इसी मार्ग पर जिला अस्पताल भी है, जहां दुर्ग जिले के साथ-साथ पूरे संभाग से मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। धरना-प्रदर्शन और रैलियों के दौरान भीड़ बढ़ने से एंबुलेंस के आवागमन, मरीजों के उपचार और अस्पताल की व्यवस्था प्रभावित होने की शिकायतें सामने आती रही हैं।
इसके अलावा मार्ग में स्थित शैक्षणिक संस्थानों में विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने और उनकी सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई थी। लोक निर्माण विभाग के विश्रामगृह और बैठक कक्ष में महत्वपूर्ण व्यक्तियों की बैठकें होती रहती हैं। धरना-प्रदर्शन के कारण सुरक्षा और यातायात व्यवस्था प्रभावित होने की बात भी सामने आई है। इसी मार्ग पर नगर निगम का बस स्टैंड होने के कारण यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
इन सभी विभागों एवं शैक्षणिक संस्थानों के प्रमुख अधिकारियों और प्राचार्यों ने कलेक्टर से प्रमुख मार्गों पर धरना, प्रदर्शन, रैली और जुलूस पर रोक लगाने का अनुरोध किया था। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दुर्ग की ओर से भी इस संबंध में पुष्टि किए जाने के बाद जिला प्रशासन ने प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया।
तितुरडीह में बनाया गया स्थायी धरना-प्रदर्शन स्थल
प्रशासन ने धरना-प्रदर्शन के लिए तितुरडीह में नगर निगम दुर्ग के जल शोधन संयंत्र के सामने स्थित रिक्त परिसर को निर्धारित किया है। यह भूमि नजूल शीट क्रमांक 90 के प्लॉट नंबर 7/2 में स्थित है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दुर्ग, अनुविभागीय दंडाधिकारी दुर्ग और नगर निगम दुर्ग की अनुशंसा के बाद इस स्थल को धरना-प्रदर्शन के लिए उपयुक्त पाया गया है। प्रशासन का उद्देश्य यह है कि प्रदर्शनकारियों को निर्धारित स्थल उपलब्ध रहे और जिला मुख्यालय के प्रमुख मार्गों, अस्पताल, शैक्षणिक संस्थानों तथा शासकीय कार्यालयों का कामकाज और यातायात व्यवस्था प्रभावित न हो।
प्रशासन ने बताया कि इस संबंध में पिछले दिनों विभिन्न राजनीतिक एवं सामाजिक संगठनों के साथ बैठक भी आयोजित की गई थी। प्राप्त सुझावों के आधार पर तितुरडीह स्थित परिसर को धरना-प्रदर्शन के लिए निर्धारित किया गया है।

