सस्टेनेबल ट्रांसपोर्ट : धूप से चलने वाले ट्रेलर ने पूरा किया 1,671 किलोमीटर का सफर

सस्टेनेबल ट्रांसपोर्ट : धूप से चलने वाले ट्रेलर ने पूरा किया 1,671 किलोमीटर का सफर


🔴बिना डीजल के ठंडा रहा सामान

सीजी न्यूज ऑनलाइन 05 मार्च 2026। सस्टेनेबल ट्रांसपोर्ट की दुनिया में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। प्रोट्रान सॉल्यूशंस नाम की कंपनी ने धूप (सूरज की रोशनी) से चलने वाले एक रेफ्रिजरेटेड ट्रेलर (फ्रिज वाला कंटेनर) की मदद से 1,671 किलोमीटर का सफर पूरा किया है। आइए आपको इसके बारे में बताते हैं।

आज कल सस्टेनेबल ट्रांसपोर्ट को काफी बढ़ावा दिया जा रहा है। पर्यावरण के अनुकूल परिवहन के लिए अब सोलर ट्रेलर यानी की सूरज की रोशनी से चलने वाले ट्रेलर भी आ गए हैं, जो बिना ईंधन(पेट्रोल या डीजल) के चल सकते हैं। इससे रुपयों की तो बचत होती ही है, साथ ही इससे पर्यावरण को भी नुकसान नहीं होता। सस्टेनेबल ट्रांसपोर्ट की दुनिया में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। ऑस्ट्रेलिया में प्रोट्रान सॉल्यूशंस (Protran Solutions) नाम की कंपनी ने धूप (सूरज की रोशनी) से चलने वाले एक रेफ्रिजरेटेड ट्रेलर (फ्रिज वाला कंटेनर) की मदद से 1,671 किलोमीटर का सफर पूरा किया है। यह सफर सिडनी और ब्रिसबेन के बीच पूरा किया गया और इस सफर के दौरान सामान को ठंडा रखने के लिए पेट्रोल या डीजल का बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं किया।

बिना डीजल के ठंडा रहा सामान

आमतौर पर ट्रकों के पीछे लगे रेफ्रिजरेटर (फ्रिज) को चलाने के लिए डीजल इंजन का इस्तेमाल होता है, जिससे बहुत प्रदूषण फैलता है। लेकिन इस सफर के दौरान सनस्वैप इंड्यूरैंस (Sunswap Endurance) यूनिट का इस्तेमाल किया गया, जो पूरी तरह से ट्रेलर की छत पर लगे सोलर पैनल और बैटरी पर निर्भर था। यह ट्रेलर बिना रुके 32 घंटे तक चलता रहा और ट्रेलर में रखे सामान के लिए सटीक तापमान को बनाए रखा। इस पूरे सफर के दौरान ट्रक के इंजन या किसी अन्य बिजली के सोर्स से कोई मदद नहीं ली गई।

बिजली का इस्तेमाल

इस पूरे सफर के दौरान कुल 85.9 kWh बिजली का इस्तेमाल हुआ। इसमें सोलर पैनल यानी सूरज की रोशनी से 58.9 kWh (68% से ज्यादा हिस्सा) बिजली बनी। इसके अलावा बाकी की 27 kWh बिजली बैटरी से ली गई। सफर के दौरान रास्ते में बारिश भी हुई और रात का सफर भी था (जब धूप नहीं होती), इसके बावजूद जब सफर खत्म हुआ तो बैटरी 62% चार्ज थी।

पर्यावरण और जेब दोनों को फायदा

इस एक सफर ने साबित कर दिया कि यह तकनीक न केवल पर्यावरण के लिए, बल्कि जेब के लिए भी अच्छी है। पूरे ट्रिप के दौरान लगभग 64 लीटर डीजल की बचत हुई। इससे पैसे तो बचे ही, साथ में पर्यावरण को भी फायदा हुआ। डीजल न जलने के कारण 172 किलो कार्बन उत्सर्जन (प्रदूषण) कम हुआ। साथ ही कंपनी का दावा है कि डीजल वाले कंटेनर के मुकाबले इसे चलाने का खर्च 81% तक कम आता है। इससे पर्यावरण और जेब दोनों को फायदा हुआ।

पर्यावरण और जेब दोनों को फायदा

इस एक सफर ने साबित कर दिया कि यह तकनीक न केवल पर्यावरण के लिए, बल्कि जेब के लिए भी अच्छी है। पूरे ट्रिप के दौरान लगभग 64 लीटर डीजल की बचत हुई। इससे पैसे तो बचे ही, साथ में पर्यावरण को भी फायदा हुआ। डीजल न जलने के कारण 172 किलो कार्बन उत्सर्जन (प्रदूषण) कम हुआ। साथ ही कंपनी का दावा है कि डीजल वाले कंटेनर के मुकाबले इसे चलाने का खर्च 81% तक कम आता है। इससे पर्यावरण और जेब दोनों को फायदा हुआ।

-25°C तक का तापमान

यह सिस्टम कंटेनर के तापमान को -25°C तक बनाए रख सकता है। इससे कंटेनर के अंदर रखी खाने-पीने की चीजें खराब नहीं होंगी और उन्हें कम खर्च में एक जगह से दूसरी जगह आसानी से पहुंचाया जा सकता है। यह उन कंपनियों के लिए बड़ी राहत है जो फल, सब्जियां या दवाइयां एक शहर से दूसरे शहर भेजती हैं, क्योंकि इसमें तापमान पर सटीक कंट्रोल रहता है और डीजल खत्म होने का डर नहीं रहता।

सस्टेनेबल ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा

सनस्वैप इंड्यूरैंस की इस तकनीक का इस्तेमाल पहले ही ब्रिटेन, फ्रांस, बेल्जियम, चिली और नीदरलैंड्स जैसे देशों में शुरू हो चुका है, और अब यह ऑस्ट्रेलिया के मार्केट में भी दस्तक दे रही है। साथ ही ऑस्ट्रेलिया में मिली इस सफलता के बाद इसे पूरी दुनिया के मार्केट में फैलाने की तैयारी है। इससे सस्टेनेबल ट्रांसपोर्ट को काफी बढ़ावा मिलेगा।