भिलाई नगर 7 जनवरी । पांच बहन और एक भाई वाले परिवार में पली-बढ़ी छाया चंद्रा को जब पिता ने नीट की कोचिंग के लिए भिलाई भेजा तो गांव वाले पिता को ताना देते हुए कहते थे कि बेटी को पढ़ा रहे वो तुम्हारे कोई काम नहीं आएगी। वो तो दूसरे के घर चली जाएगी। जब नीट क्वालिफाई करके मेडिकल कॉलेज पहुंची तो यही लोग अब पिता को बधाई देते नहीं थकते। प्राइवेट नौकरी करने वाले पिता ने अपनी पांचों बेटियों और एक बेटे में कोई भेद नहीं किया। उन्होंने अपनी बाकी बेटियों की तरह छाया को शुरू से पढ़ाई के लिए प्रेरित किया। बचपन से डॉक्टर बनने का सपना सजाने वाली छाया चंद्रा आखिरकर नीट क्वालिफाई करके अब डॉक्टर बनने की पहली सीढ़ी पार कर चुकी है। नवगठित सक्ति जिला के छोटे से गांव बरतुंगा की रहने वाली छाया कहती है कि पापा का संघर्ष और अपनी बेटियों को उनके पैरों पर खड़ा करने की चाहत ही थी जिसकी बदौलत मैं आज एमबीबीएस की सीट हासिल करने में सफल हुई। लगातार दो असफलताओं के बाद भी पापा ने हार नहीं मानी वो कहते थे कि जो सोचा है उसको करके दिखाना है। उनका सपोर्ट ही था कि मैंने तीसरे ड्रॉप में बीएससी करते-करते नीट की तैयारी की और आज सफल हो गई।
स्कूल में नहीं था कोई फिजिक्स का टीचर
छाया ने बताया कि जब 12 वीं बोर्ड परीक्षा के दौरान भी स्कूल में कोई फिजिक्स का टीचर नहीं था। दो साल फिजिक्स का सिर्फ ऊपरी हिस्सा ही पढ़ पाई। यही कारण है कि जब नीट की तैयारी शुरू कि तो मेरा फिजिक्स पूरा जीरो था। क्या सरल, क्या कठिन सबकुछ गोलमाल था। कोचिंग में बेसिक से जब पढ़ाई कराई गई तो मैंने फिजिक्स पर फोकस किया। सबसे पहले सरल टॉपिक को पढ़ा और बाद में कठिन चेप्टर की ओर बढ़ते गई। बायो और कैमेस्ट्री में भी पढऩे का यही फॉर्मूला अपनाया था। पहले ड्रॉप में टाइम मैनेजमेंट नहीं कर पाई थी। साथ ही तैयारी नहीं होने के कारण मैं टेस्ट सीरिज भी ठीक से नहीं दे पाती थी। जिससे कहीं न कहीं कॉन्फिडेंस लेवल बहुत डाउन रहता था। दूसरे साल मैंने पिछले साल की गलतियों पर काम किया और मन लगाकर तैयारी की मगर असफलता हाथ लगी। इसलिए तीसरे साल बीएससी ज्वाइन कर लिया। पापा बार-बार मुझे कहते थे कि एक कोशिश और करो ,मैंने उनकी बात मानकर पढ़ाई शुरू की और रिजल्ट आप सबके सामने है।
सचदेवा में पढ़कर सीखा कैसे करना है टाइम मैनेजमेंट
नीट की कोचिंग के लिए सचदेवा न्यू पीटी कॉलेज को चुनने वाले छाया कहती है कि जब सचदेवा में गई तो बिल्कुल एक रॉ मटेरियल की तरह थी। यहां के टीचर्स और फैकल्टी की बदौलत एक साल में खुद के ऊपर भरोसा आया कि मैं डॉक्टर बन सकती हूं। सचदेवा के डायरेक्टर चिरंजीव जैन सर अक्सर मोटिवेट करते थे वो हमेशा कहते हैं अगर लगन से पढ़ोगे तो सफलता जरूर मिलेगी। सचदेवा में टेस्ट सीरिज के दौरान टाइम मैनेजमेंट करना सिखाया जाता है। एग्जाम प्रेशर को कैसे हैंडल करना है ये भी यहां के टीचर्स बखूबी बताते हैं। डाउट के लिए अलग से डाउट क्लास लगाया जाता है। यहां बच्चे को किसी भी परेशानी में अकेले नहीं छोड़ा जाता बल्कि पूरी कोशिश की जाती है कि हर तरह की निराशा से उसे बाहर निकाला जाए। सभी सब्जेक्ट की पढ़ाई एक ही छत के नीचे होती है। इससे स्टूडेंट्स का काफी टाइम बच जाता है।
टेस्ट जरूर दें
नीट की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स से कहना चाहती हूं कि आप टेस्ट जरूर दें। चाहे आपकी तैयारी हो या फिर ना हो, हर हाल में हर टेस्ट को जरूर देना चाहिए। टेस्ट देने से पता चलता है कि हमारी तैयारी कितने पानी में है। साथ ही अच्छा परफार्म करने पर कॉन्फिडेंस भी बढ़ता है साथ ही सेल्फ मोटिवेशन भी मिलता है।

