सफलता की कहानी : ग्रेजुएशन के बाद लिया रिस्क, दो साल कड़ी मेहनत करके किया नीट क्वालिफाई, रिश्तेदार देते थे पैरेंट्स को ताना, साल बर्बाद कर रहा बेटा
भिलाई नगर 29 दिसंबर. महासमुंद के किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले चंद्रहास चंद्राकर आज सातवें आसमान पर है। क्योंकि उन्होंने वो कर दिखाया जिसका रिस्क हर कोई नहीं ले सकता। बीएससी करते-करते चंद्रहास के मन में डॉक्टर बनने का सपना सजने लगा पर उन्होंने पढ़ाई बीच में नहीं छोड़ी बल्कि गे्रजुएशन पूरा करने के बाद दो साल ड्रॉप लेकर नीट क्वालिफाई कर लिया। आज जब बेटे को महासमुंद मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिल गया है तो पूरा परिवार जश्न में डूब गया है। एक वक्त था जब परिवार के रिश्तेदार ताना मारते थे कि क्या साल बर्बाद कर रहा है। मेडिकल कॉलेज की सीट मिलने के बाद यही रिश्तेदार अपने बच्चों के लिए चंद्रहास से टिप्स मांगते नहीं थक रहे। अपनी संघर्ष भरी सफलता के बारे में चंद्रहास कहते हैं कि फिजिक्स के एक फॉर्मूले से जीवन में कुछ अलग करने की प्रेरणा मिली। इसी से ऊर्जा लेकर मैं अपनी तैयारी में जुटा रहा। ग्रेजुएशन करके यू टर्न लेना थोड़ा रिस्की था, लेकिन मुझे खुद पर भरोसा था। जिसका परिणाम है कि आज मैं परिवार का पहला डॉक्टर बनने जा रहा हूं।
ग्रेजुएशन करने के बाद भी कैसे बनते हैं डॉक्टर इसकी नहीं थी जानकारी
चंद्रहास ने बताया कि ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद भी मुझे डॉक्टर कैसे बनते हैं, कौन-कौन सी परीक्षाएं देनी पड़ती है, इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। अपने दोस्तों और टीचर्स से जानकारी जुटाकर मैं कोचिंग करने के लिए भिलाई पहुंचा और वहीं से मेरी जर्नी शुरू हुई। सीजी बोर्ड, हिंदी मीडियम स्टूडेंट था तो शुरुआत में लंैग्वेज प्राब्लम से दो चार होना पड़ा। पहली बार घर से निकलने के कारण होम सीकनेस भी हावी था। पहला इयर तो चीजों को समझने में निकल गया। दूसरे साल मैंने बेसिक से शुरूआत की और आखिरकार सफलता मिल गई। जब कभी निराश होता तो याद करता था कि कैसे पिता ने कर्ज लेकर मेरी फीस भरी है। मन में यही संकल्प था कि पापा को खेत में मेहनत करने उतरने नहीं देना है।
सचदेवा में जाकर पता चला कैसे रहना है सिस्टम से
मेडिकल एंट्रेस की तैयारी के लिए सचदेवा न्यू पीटी कॉलेज को चुनने वाले डॉ. चंद्रहास ने बताया कि पहले लाइफ में ज्यादा अनुशासन नहीं था। सचदेवा में जाकर मैंने सिस्टम से रहना और पढऩा सीखा। यहां के फैकल्टी और टीचर्स का हर मुश्किल परिस्थिति में सपोर्ट मिला। खासकर सचदेवा के डायरेक्टर चिरंजीव जैन सर की मोटिवेशनल बातें डिप्रेशन और निराशा के दौर में बहुत काम आई। वो अक्सर कहते थे कि जब तक तुम खुद को रगड़ो गे नहीं तब तक कुछ हासिल होने वाला नहीं है। सक्सेस उसे ही मिली है जिसने जीवन में कुछ त्याग किया है। यही बातें सुनकर मैं खुद को दोगुनी मेहनत के लिए तैयार करता था। सचदेवा का टेस्ट सीरिज, स्टडी मटेरियल और टीचर्स के समझाने का तरीका बहुत ही अच्छा है। बीच-बीच में काउंसलिंग और गाइडेंस भी यहां स्टूडेंट्स को प्रोवाइड कराया जाता है। यही सब बातें सचदेवा को बेहद खास बनाती है।
बेसिक से करें शुरुआत
नीट की तैयारी करने वाले स्टूडेंट्स से कहना चाहता हूं कि आप चाहे स्कूल में कितना भी अच्छा क्यों न पढ़े हो जब मेडिकल एंट्रेस की तैयारी शुरू करतें तो इसकी शुरूआत तीनों मेन सब्जेक्ट के बेसिक से करें। एक बार बेसिक क्लीयर हो गया तो आप हर दिन क्योश्च्यन साल्व करें। इससे कॉन्फिडेंस बढ़ता है। टेस्ट जरूर दिलाएं। टेस्ट से घबराने की जगह कम नंबर आने पर अपना एनालिसिस करके आने वाले एग्जाम के लिए तैयारी पुख्ता करें। देखना एक दिन सफलता जरूर मिलेगी।

