भिलाई नगर 15 जनवरी । सरगुजा जिला मुख्यालय से लगभग 70 किमी. दूर एक छोटे से गांव बेलगांव के रहने वाले अमितेष गुप्ता ने जब नीट की तैयारी शुरू की तो उन्हें न्यूटन के तीन लॉ भी ठीक से पता नहीं थे। घर की आर्थिक परिस्थिति खराब होने के कारण किसी तरह 12 वीं की पढ़ाई पूरी की। उसी दौरान डॉक्टरों के लिए समाज में रिसेप्ट देखकर डॉक्टर बनने का तय किया और बैग उठाकर नीट की तैयारी के लिए भिलाई आ गए। अमितेष ने बताया कि वे एवरेज स्टूडेंट थे। शुरुआती दौर बहुत मुश्किलों से भरा रहा। पहली दिक्कत तो ये थी कि मैंने सिर्फ 12 वीं बोर्ड में अच्छे नंबर लाने के लिए सलेक्टिव चीजें पढ़ी थी। जब नीट की तैयारी शुरू कि तो इसका सिलेबस देखकर ही घबराहट होने लगी। समझ नहीं आ रहा था कि शुरुआत कहां से करूं। घर से बड़े अरमान से अपने परिवार को डॉक्टर बनने का सपना दिखाकर निकला था, इसलिए पीछे मुड़ नहीं सकता था। मन में संकल्प लिया कि चाहे कुछ भी हो जाए, घर जाऊंगा तो सिर्फ एमबीबीएस डॉक्टर बनकर। कुछ इस तरह मेरी जर्नी शुरू हुई। धीरे-धीरे ही सही आगे बढ़ता गया। दो साल के ड्रॉप के बाद नीट क्वालिफाई कर लिया। आज गांव के लोग अपने बच्चों से कहते हैं कि तुम भी कोशिश करोगे तो अमितेष की तरह डॉक्टर बन सकते हो।
सबसे ज्यादा फिजिक्स को दिया टाइम
अमितेष ने बताया कि शुरुआत से मुझे फिजिक्स बहुत टफ लगता था। हिंदी मीडियम स्कूल से पढ़ाई के कारण सीबीएससी पढ़ते हुए लैंग्वेज प्राब्लम भी होती थी। पहले ड्रॉप में मैंने बेसिक पर फोकस किया। सालभर अच्छे से पढ़ाई की लेकिन एग्जाम से पहले रिविजन नहीं कर पाया। जिसके चलते अच्छे माक्र्स नहीं आ पाए। सेकंड ड्रॉप में मैंने पहले साल की गलतियों को सुधारा। टाइम मैनेजमेंट करके वीक सब्जेक्ट को ज्यादा समय देकर पढऩा शुरू किया। सेकंड ड्रॉप में फिजिक्स को चार महीने तक पढ़ा। मैं जानता था कि मेरी कमजोरी फिजिक्स है। यदि फिजिक्स स्ट्रांग हो जाए तो आसानी से नीट क्वालिफाई कर पाऊंगा। इसलिए मैंने फिजिक्स को एक्स्ट्रा टाइम देकर पढ़ा। ये चीजें मेन एग्जाम में काम आई। जब बहुत ज्यादा डिप्रेशन होता था तब मैं मंदिर चला जाता था। वहां से पॉजिविटी लेकर फिर नए सिरे से तैयारी में जुट जाता था।
आज जो कुछ हूं सचदेवा की बदौलत
नीट की कोचिंग सचदेवा न्यू पीटी कॉलेज से करने वाले अमितेष कहते हैं कि आज अगर एमबीबीएस कॉलेज पहुंच पाया तो सिर्फ सचदेवा की वजह से। सचेदवा के बॉयोलॉजी के नोट्स से ही मैंने नीट की तैयारी की। यहां के टीचर्स और स्टाफ बहुत ही ज्यादा अच्छे हैं। सबसे बड़ी बात यहां बच्चे को उसके संघर्ष में अकेले नहीं छोड़ा जाता बल्कि जरूरत पडऩे पर मार्गदर्शन और काउंसलिंग भी दी जाती है। सचदेवा के डायरेक्टर चिरंजीव जैन सर की काउंसलिंग और मोटिवेशनल बातें निराशा के दौर में बहुत पॉजिटिव एनर्जी देती है। यहां का टेस्ट सीरिज भी मेन एग्जाम की तैयारी में काफी हेल्पफुट रहा। एक ही छत की नीचे सारे विषयों की पढ़ाई होने से टाइम भी बच जाता है। ओवरऑल यहां का माहौल बहुत ही अच्छा है।
हार्ड वर्क करना जरूरी
नीट की तैयारी करने वाले स्टूडेंट्स से कहना चाहता हूं कि हार्ड वर्क से ही सफलता मिलती है। सक्सेस का और कोई शॉर्टकट नहीं है। जब कभी निराश हो तो अपने घर वालों को जरूर याद करें कि उन्होंने कितनी मुश्किल से हमें पढऩे के लिए भेजा है। चीजों को याद रखने के लिए नोट्स बनाकर जरूर पढ़े।

