भिलाई नगर 10 जनवरी . सफलता के संघर्ष के सफर में कई स्टूडेंट पहले और दूसरे ड्रॉप में ही हार मान लेते हैं। आज हम जिस होनहार मेडिकल स्टूडेंट से आपका परिचय करा रहे हैं इन्होंने एक, दो नहीं अपनी सफलता के लिए पूरे पांच साल तक इंतजार किया। लगातार पांच ड्रॉप के बाद भी इनके चेहरे पर निराशा घर नहीं कर पाई और दृढ़ इच्छाशक्ति से ये छात्र मेडिकल कॉलेज पहुंचने में सफल हो गया। ये कहानी बेमेतरा के मिडिल क्लास फैमिली से ताल्लुक रखने वाले विनायक सोनगर्ग की है। जिनका मन तो एक कवि की तरह है लेकिन सफल होने का संकल्प हिमालय की तरह है। विनायक कहते हैं कि जब मैं दसवीं में था तभी पिता जी की अचानक मौत हो गई। बड़े भाई और मां ने मिलकर परिवार को संभाला और मुझे बचपन से बताया कि पढ़ाई ही एक जरिया है जिससे मैं जीवन में कुछ बड़ा कर सकता हूं। इसलिए मैंने दसवीं से ही ठान लिया था कि बायो लेकर डॉक्टर बनूंगा। पहले और दूसरे ड्रॉप में असफलता से घर वालों की उम्मीद जरूर टूट गई थी,+ लेकिन मैंने कभी हार नहीं माना। शायद इसी का परिणाम है कि पांच साल तक मैंने कड़ी मेहनत करते हुए अपना सपना टूटने नहीं दिया।
फस्र्ट ड्रॉप में थे सबकुछ नया
नीट की तैयारी के लिए जब मैंने पहली बार ड्रॉप लिया तो मेरे लिए सबकुछ नया था। 12 वीं के बाद ये कोई बताने वाला नहीं था कि डॉक्टर बनने के लिए कौन-कौन सी परीक्षाएं देनी पड़ती है। वो तो शुक्र है स्कूल में एक सेमीनार हुआ जिसके माध्यम से मुझे थोड़ी बहुत जानकारी मिली। जब कोचिंग में नीट का सिलेबस पढऩा शुरू किया तो लगा सागर में गोते लगा रहा हूं। जहां दूर-दूर तक कोई ओर-छोर नजर नहीं आ रहा था। पहला साल तो ऐसे ही निकल गया जब दूसरे ड्रॉप में पूरी तैयारी से उतरा तो महज कुछ नंबरों से चूक गया। ये सिलसिला थर्ड और फोर्थ ड्रॉप तक जारी रहा। कई बार मन बहुत उदास हो जाता था। उदासी में जाकर कभी बीएससी तो कभी बीएएमएस का फॉर्म भरकर आ जाता। मन कभी नहीं किया एडमिशन लेने का। वो तो गनीमत रही कि जीवन में कुछ अच्छे दोस्त और हर कदम पर साथ देने वाला बड़ा भाई मिला। जिसके कारण ही मैं नीट एग्जाम क्वालिफाई कर पाया।
सचदेवा में फैकल्टी बहुत अच्छी है
नीट की कोचिंग सचदेवा न्यू पीटी कॉलेज से करने वाले विनायक ने बताया कि यहां की फैकल्टी बहुत अच्छी है। सेकंड ड्रॉप में आर्थिक परिस्थिति के कारण फीस भरने में दिक्कत हो रही थी तब सचदेवा के डायरेक्टर चिरंजीव जैन सर ने मेरी फीस कम करते हुए पढऩे का हौसला दिया। वो अक्सर क्लास में आकर बच्चों को मोटिवेट करते थे। समय-समय पर बच्चों की काउंसलिंग क्लास भी लिया करते थे। पढऩे के दौरान बायो बहुत टफ लगता था। यहां के टीचर्स से आइडिया लेकर मैंने बायो को फ्लो चार्ट और चीजों को रिलेड करके पढऩा शुरू किया। सचदेवा की नोट्स की बदौलत आखिरी दो साल मैं फिजिक्स और कैमेस्ट्री की सेल्फ प्रिपरेशन कर पाया। पढ़ाई के साथ-साथ यहां का मैनेजमेंट भी बहुत स्ट्रांग है। बच्चों की किसी भी समस्या का तुरंत समाधान किया जाता है। क्लासेस भी टाइम से लगती है। टीचर्स यहां कभी लेट नहीं होते।
अंधाधुंध पढ़ाई से बचे
नीट की तैयारी करने वाले स्टूडेंट्स से कहना चाहता हूं कि आप अंधाधुंध पढ़ाई से बचे। टारगेट और टाइम टेबल बनाकर सिलेबस के हिसाब से पढ़ाई करें। पांच साल के पुराने पेपर एक बार जरूर निकालकर साल्व करें। इससे एग्जाम के पैटर्न और कहां से क्या प्रश्न आ रहा इसकी जानकारी मिलती है। एनसीईआरटी की किताबें जरूर पढ़े।

