पड़ताल वाली खास खबर 🛑 कांग्रेस सरकार में शुरू हुआ 2 करोड़ का अजा हॉस्टल 3 साल बाद भी अधर में 🔵 दरकने लगी दीवारें, धंस रहा फाउंडेशन 🟠 AC ने कहा – “जांच होगी”

पड़ताल वाली खास खबर 🛑 कांग्रेस सरकार में शुरू हुआ 2 करोड़ का अजा हॉस्टल 3 साल बाद भी अधर में 🔵 दरकने लगी दीवारें, धंस रहा फाउंडेशन 🟠 AC ने कहा – “जांच होगी”



सीजी न्यूज आनलाईन, 10 जुलाई। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले की वैशाली नगर विधानसभा क्षेत्र में करोड़ों की लागत से बन रहा अजा बालक छात्रावास विवादों में घिर गया है। 2020-21 से 18 महीने की तय समयावधि के बावजूद 3 साल बाद भी हॉस्टल विभाग को हैंडओवर नहीं हो पाया है और इसकी दीवारें कई जगह दरक रहीं हैं, कहीं कहीं कमजोर फाउंडेशन भी गड़बड़ी की दास्तान बयां करने लगा है नतीजतन लीपापोती कर इसके अपडेट दिखने के प्रयास भी होने लगे हैं।


आपको बता दें दुर्ग जिले के अंतर्गत वैशाली नगर विधानसभा क्षेत्र के जुनवानी में निर्माणाधीन पोस्ट मैट्रिक अनुसूचित जाति बालक छात्रावास लगभग 2 करोड़ की लागत से अरिहंत कंस्ट्रक्शन के द्वारा बनाया जा रहा है। कांग्रेस की भूपेश सरकार में इसका काम शुरू जरूर हुआ मगर तय समय-सीमा में हॉस्टल नहीं बन पाया। अब राज्य में सरकार बदली तो जैसे तैसे इसे जल्द पूरा करने के प्रयास में धीरे धीरे लीपापोती भी होने लगी ताकि हैंडओवर पूर्व कोई मीन-मेख दिखाई न दे जाए।

छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव साय की सरकार लगातार आदिवासियों के लिए नई-नई योजनाओं की शुरुआत कर रही हैं ताकि आदिवासी समाज का उत्थान हो सके और जो प्रधानमंत्री मोदीजी का सपना है उसमें समृद्ध भारत विकसित छत्तीसगढ़ के नारा को साबित कर दिखाया जा सके मगर अब इस सरकार में हॉस्टल को फाइनल टच देकर हैंड ओवर पूर्व जिस परीक्षा से निर्माण कंपनी को गुजरना होगा उसकी तैयारी फिलहाल हॉस्टल भवन को देख कर कमजोर ही दिखाई देती है।


गौरतलब हो कि छत्तीसगढ़ के वीआईपी जिला दुर्ग के जुनवानी स्थित डीपीएस स्कूल के समीप ही अरिहंत कंस्ट्रक्शन के ठेकेदार के द्वारा आदिवासी छात्र-छात्राओं के लिए 1 करोड़ 90 लाख की लागत से यह हॉस्टल लंबे समय से तैयार हो रहा है। अभी से ही दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें आने लगी हैं जिसे लीपापोती कर सुधारा जा रहा है। भवन के फाउंडेशन की मजबूती भी कहीं कहीं अपनी कमजोरी दिखा रही है। निर्माण कार्य स्थल के सामने न ही सूचना पटल लगाया गया है और न ही लैंड मार्क दिखाई पड़ा।


इस संबंध में आदिम जाति कल्याण विभाग दुर्ग के असिस्टेंट कमिश्नर हेमंत सिंन्हा ने कहा कि छात्रावास भवन को अभी तक ठेकेदार से विभाग को हैंडओवर नहीं हुआ है। इस भवन को 18 माह में पूर्ण करना था लेकिन आज दिनांक तक 3 वर्ष हो चुका है।‌ निर्माण कंपनी ने अगर गुणवत्ता के मापदंड अनुरूप कार्य नहीं किया है तो इस मामले की जांच कर जल्द से जल्द ठेकेदार के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।