CPSE अधिकारियों के चौथे वेतन संशोधन के लिए सेफी ने PM मोदी से मांगा हस्तक्षेप

CPSE अधिकारियों के चौथे वेतन संशोधन के लिए सेफी ने PM मोदी से मांगा हस्तक्षेप


🔴चतुर्थ वेतन संशोधन समिति के शीघ्र गठन की मांग, 1 जनवरी 2027 से संशोधन प्रस्तावित

भिलाईनगर, 14 सितंबर 2026। केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (CPSE) के अधिकारियों के लिए चतुर्थ वेतन संशोधन समिति (PRC) के शीघ्र गठन की मांग को लेकर स्टील एग्जीक्यूटिव्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SEFI) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप का अनुरोध किया है। SEFI चेयरमैन एवं नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑफिसर्स एसोसिएशन के कार्यकारी अध्यक्ष नरेंद्र कुमार बंछोर ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इस संबंध में शीघ्र प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है।

SEFI ने कहा है कि केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में बोर्ड स्तर से लेकर बोर्ड स्तर से नीचे के कार्यपालक अधिकारियों तथा गैर-यूनियन पर्यवेक्षकों के वेतन संशोधन के लिए लगभग प्रत्येक दस वर्ष में वेतन संशोधन समितियों का गठन किया जाता रहा है। इन समितियों के माध्यम से मुद्रास्फीति, जीवन-यापन की बढ़ती लागत, आंतरिक समानता तथा निजी क्षेत्र के साथ वेतन प्रतिस्पर्धात्मकता जैसे मुद्दों पर विचार किया जाता है।

1 जनवरी 2027 से प्रभावी होना है चौथा वेतन संशोधन

SEFI के अनुसार, केंद्रीय वेतन आयोग का गठन 25 नवंबर 2025 को किया जा चुका है और उसकी रिपोर्ट जल्द आने की संभावना है। वहीं केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों के अधिकारियों के लिए चतुर्थ वेतन संशोधन 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होना है। ऐसे में वेतन संशोधन समिति के गठन की प्रक्रिया समय रहते शुरू करने की आवश्यकता है, ताकि समिति को विचार-विमर्श, हितधारकों से परामर्श और सिफारिशों को अंतिम रूप देने के लिए पर्याप्त समय मिल सके।

SEFI ने प्रधानमंत्री को बताया कि तृतीय वेतन संशोधन समिति का गठन 9 जून 2016 को किया गया था। केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद सार्वजनिक उद्यम विभाग (DPE) ने 3 अगस्त 2017 को वेतन संशोधन आदेश जारी किए थे, जो 1 जनवरी 2017 से प्रभावी हुए थे।

निजी क्षेत्र से प्रतिस्पर्धा के बीच प्रतिभाओं को रोकना चुनौती

SEFI का कहना है कि वर्तमान में CPSE घरेलू और वैश्विक निजी क्षेत्र की कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहे हैं। ये उपक्रम राष्ट्र निर्माण, अधोसंरचना विकास, ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल विस्तार और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे में अधिकारियों के वेतन एवं भत्तों का समय पर संशोधन केवल कर्मचारी हित का विषय नहीं, बल्कि इन संस्थानों की दक्षता और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता से भी जुड़ा हुआ है।

SEFI ने कहा कि समय पर वेतन संशोधन से उच्च कौशलयुक्त और प्रतिभाशाली पेशेवरों को आकर्षित करने एवं उन्हें बनाए रखने, निजी क्षेत्र के समकक्षों के साथ प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखने, परिचालन दक्षता बढ़ाने तथा तकनीकी और विशिष्ट क्षेत्रों में अनुभवी मानव संसाधन के पलायन को रोकने में मदद मिलेगी।

39 माह के एरियर्स और हार्डशिप अलाउंस का उठाया मुद्दा

SEFI ने दूसरे और तीसरे वेतन संशोधन में रही कमियों को भी चौथे पे-रिविजन में दूर करने की मांग की है। संगठन ने विशेष रूप से तीसरे वेतन संशोधन में लागू अफोर्डेबिलिटी क्लॉज का मुद्दा उठाया है। SEFI के अनुसार, इसके कारण सेल जैसी महारत्न कंपनी के कार्मिकों को 39 माह के एरियर्स से वंचित होना पड़ा।

SEFI ने पत्र में दावा किया है कि वर्ष 2007 से 2016 तक सेल का कुल पीबीटी लगभग 61,500 करोड़ रुपये रहा, लेकिन वित्तीय वर्ष 2015-16 में लगभग 7,000 करोड़ रुपये का निगेटिव पीबीटी होने के कारण सेल में पे-रिविजन 1 अप्रैल 2020 से लागू हुआ। संगठन का यह भी कहना है कि सेल जैसी महारत्न कंपनी के अधिकारियों को हार्डशिप अलाउंस का लाभ भी नहीं मिल सका।

देरी से अधिकारियों में बढ़ सकती है अनिश्चितता

SEFI ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि चतुर्थ वेतन संशोधन समिति के गठन की प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाए। संगठन का कहना है कि समिति के गठन में देरी से कार्यपालक अधिकारियों में अनिश्चितता बढ़ सकती है, जिसका असर प्रतिभाशाली मानव संसाधन को बनाए रखने और संगठनात्मक प्रदर्शन पर पड़ सकता है।

SEFI के अनुसार, ऐसे समय में जब केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों से देश की आर्थिक एवं विकास यात्रा में और अधिक योगदान की अपेक्षा है, अधिकारियों के लिए समयबद्ध और प्रतिस्पर्धात्मक वेतन व्यवस्था सुनिश्चित करना आवश्यक है।