🔴अगले 4-5 वर्षों में बड़ा विस्तार, AI और रावघाट परियोजना पर विशेष फोकस
भिलाई, 28 मई 2026। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) के चेयरमैन अशोक कुमार पंडा ने कहा है कि सेल अगले 4 से 5 वर्षों में 30 से 35 मिलियन टन स्टील उत्पादन क्षमता के लक्ष्य को हासिल कर लेगा। भिलाई प्रवास के दौरान CG NEWS ONLINE से विशेष चर्चा में उन्होंने कहा कि कंपनी तेजी से विस्तार योजनाओं पर काम कर रही है और कई परियोजनाओं को मंजूरी भी मिल चुकी है।

ग्रीन फील्ड एक्सपेंशन पर तेजी से काम
अशोक कुमार पंडा ने बताया कि सेल द्वारा विभिन्न प्लांटों में ग्रीन फील्ड एक्सपेंशन परियोजनाओं पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। कुछ परियोजनाएं काफी आगे बढ़ चुकी हैं, जबकि अन्य को भी आवश्यक अप्रूवल मिल गया है। उन्होंने भरोसा जताया कि निर्धारित समय सीमा में लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा।
भारतीय स्टील बाजार में लगातार बढ़ रही मांग
उन्होंने कहा कि भारतीय और वैश्विक स्टील बाजार लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। वर्तमान में भारतीय स्टील सेक्टर 6 से 8 प्रतिशत की ग्रोथ रेट से आगे बढ़ रहा है। देश में स्टील की खपत लगातार बढ़ रही है, जिसके कारण सेल भी अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर फोकस कर रहा है।
रॉ मैटेरियल सिक्योरिटी पर विशेष रणनीति
रॉ मैटेरियल सिक्योरिटी को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए SAIL चेयरमैन ने कहा कि इस दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। खासकर कुकिंग कोल की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए संसाधनों का विविधीकरण किया जाएगा।
कुकिंग कोल की लागत घटाने पर फोकस
उन्होंने कहा कि अलग-अलग स्रोतों से कुकिंग कोल की उपलब्धता बढ़ाने और बेहतर मैनेजमेंट के जरिए इनपुट कॉस्ट कम करने की रणनीति बनाई जा रही है। इससे कंपनी को सकारात्मक परिणाम मिलने की उम्मीद है।
AI और डिजिटाइजेशन से बदलेगी तस्वीर
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटाइजेशन के उपयोग पर उन्होंने कहा कि SAIL ने इस दिशा में विशेष यूनिट तैयार की है, जो रांची से संचालित हो रही है। सभी यूनिट्स में AI आधारित तकनीकों के उपयोग पर गंभीरता से काम किया जा रहा है और आने वाले समय में इसके बड़े फायदे देखने को मिलेंगे।
“सेफ्टी सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण”
सेफ्टी को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए अशोक पंडा ने कहा कि SAIL में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई प्रयोगात्मक कदम उठाए गए हैं। अकाउंटेबिलिटी तय करने और बेहतर सेफ्टी मैनेजमेंट सिस्टम विकसित करने पर गंभीर समीक्षा चल रही है।
सस्ते विदेशी स्टील से निपटने की तैयारी
उन्होंने कहा कि सेल ब्रांड को मजबूत बनाने के लिए आउटरीच बढ़ाई जा रही है। साथ ही चीनी और अन्य विदेशी उत्पादों से भारतीय बाजार को सुरक्षित रखने के लिए केंद्र सरकार भी आवश्यक कदम उठा रही है।
रावघाट परियोजना बनेगी गेम चेंजर
रावघाट परियोजना को छत्तीसगढ़, सेल और देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि यहां विशाल आयरन ओर रिजर्व उपलब्ध है। इससे न केवल देश को अधिक आयरन ओर मिलेगा बल्कि BSP के एक्सपेंशन में भी बड़ी मदद मिलेगी। इसी कारण सेल प्रबंधन का विशेष फोकस रावघाट परियोजना पर है।
रावघाट क्षेत्र में होगा व्यापक विकास
उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे रावघाट परियोजना आगे बढ़ेगी, वैसे-वैसे क्षेत्र में आधारभूत विकास कार्य भी तेज होंगे। अभी भी इलाके में कई विकास कार्य चल रहे हैं और भविष्य में भी जारी रहेंगे। इस परियोजना का लाभ पूरे क्षेत्र को मिलेगा।
पर्यावरण संरक्षण पर भी विशेष ध्यान
SAIL चेयरमैन ने कहा कि विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी समान प्राथमिकता दी जा रही है। प्रदूषण कम करने के लिए व्यापक स्तर पर कदम उठाए गए हैं। थर्मल पावर के उपयोग को कम करते हुए संतुलित और पर्यावरण अनुकूल विकास की दिशा में काम किया जाएगा।

