आरएफआईडी बाद में, पहले एरियर-बोनस’: BMS की BSP प्रबंधन को दो टूक

आरएफआईडी बाद में, पहले एरियर-बोनस’: BMS की BSP प्रबंधन को दो टूक


भिलाईनगर, 10 सितंबर 2026। भिलाई इस्पात मजदूर संघ (बीएमएस) के पदाधिकारियों ने मुख्य महाप्रबंधक (एचआर) प्रशांत ओझा के साथ बैठक कर भिलाई इस्पात संयंत्र के कर्मचारियों से जुड़ी विभिन्न मांगों को प्रमुखता से उठाया। यूनियन ने कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाने के लिए 39 महीने का लंबित एरियर जल्द दिलाने, बोनस फार्मूले में बदलाव कर बेहतर बोनस देने, नॉन-फाइनेंशियल स्कीम शुरू करने तथा कैंटीन, रेस्ट रूम और इस्पात क्लबों की सुविधाओं में सुधार की मांग की।

आरएफआईडी से ज्यादा जरूरी एरियर और बोनस

बीएमएस के महामंत्री दिनेश कुमार पाण्डेय ने कहा कि एमओयू हुए लगभग पांच वर्ष बीत जाने के बावजूद कर्मचारियों को अब तक 39 महीने का एरियर नहीं मिला है। इससे कर्मचारियों में आक्रोश है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के लिए आरएफआईडी लगाने से ज्यादा जरूरी उनका लंबित एरियर दिलाना है।

उन्होंने बोनस फार्मूले में जल्द बदलाव कर कर्मचारियों को बेहतर बोनस दिलाने की मांग की। पाण्डेय ने संयंत्र के भीतर कॉफी हाउस शुरू करने की मांग भी रखी। उन्होंने कहा कि यदि संयंत्र में अलग से कॉफी हाउस की सुविधा उपलब्ध कराना संभव नहीं है तो बेस किचन में कर्मचारियों के लिए कॉफी हाउस जैसी कैंटीन सुविधा विकसित की जाए।

कैंटीन और रेस्ट रूम की व्यवस्था सुधारने की मांग

यूनियन अध्यक्ष प्रदीप कुमार पाल ने कहा कि संयंत्र की कुछ कैंटीनों की व्यवस्था बेहतर है, लेकिन कई कैंटीनों में सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने कैंटीनों की व्यवस्था दुरुस्त करने के साथ वहां उपयोग होने वाली खाद्य सामग्री की गुणवत्ता पर निगरानी रखने का सुझाव दिया।

उन्होंने संयंत्र के अंदर स्थित रेस्ट रूम को रिनोवेट करने तथा विभिन्न विभागों में नए सुलभ शौचालय बनाने की आवश्यकता भी बताई।

पुरानी इंसेंटिव स्कीम में बदलाव की मांग

बीएमएस के कार्यकारी अध्यक्ष वंश बहादुर सिंह ने कहा कि संयंत्र की इंसेंटिव स्कीम काफी पुरानी हो चुकी है। यह वर्ष 2004 में सात स्कीम के साथ बनाई गई थी, जिसे 2007 में सरल बनाकर एक स्कीम किया गया। इसके बाद से अब तक इसमें कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है।

उन्होंने कहा कि पिछले करीब 20 वर्षों में भिलाई की लेबर प्रोडक्टिविटी तीन गुना बढ़ चुकी है, इसलिए वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए इंसेंटिव स्कीम का रिवीजन किया जाना जरूरी है। उन्होंने भिलाई में नॉन-फाइनेंशियल स्कीम दोबारा शुरू करने की भी मांग की।

जर्जर इस्पात क्लबों का हो रिनोवेशन

वंश बहादुर सिंह ने कर्मचारियों के लिए बनाए गए इस्पात क्लबों की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कई क्लबों की स्थिति जर्जर हो चुकी है। इनका जल्द रिनोवेशन कर अधिकारियों के क्लबों की तरह कर्मचारियों को भी बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही क्लबों एवं खेल परिसरों की सुरक्षा के लिए दोबारा सुरक्षा गार्ड नियुक्त करने की मांग की गई।

सीजीएम एचआर ने दिया समस्याओं के समाधान का आश्वासन

मुख्य महाप्रबंधक (एचआर) प्रशांत ओझा ने कहा कि वह स्वयं संयंत्र के विभिन्न विभागों में जाकर कैंटीन और रेस्ट रूम की सुविधाओं का निरीक्षण कर रहे हैं, ताकि कर्मचारियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

उन्होंने कहा कि आरएफआईडी सुरक्षा के उद्देश्य से लगाई जा रही है, लेकिन कर्मचारियों के एरियर, बोनस और इंसेंटिव स्कीम के रिवीजन से संबंधित यूनियन की मांगों को उच्च प्रबंधन तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने इस्पात क्लबों का जल्द रिनोवेशन कराने का आश्वासन भी दिया।

बैठक में प्रबंधन की ओर से महाप्रबंधक (एचआर-आईआर) राजीव कुमार उपस्थित रहे। वहीं यूनियन की ओर से महामंत्री दिनेश कुमार पाण्डेय, अध्यक्ष प्रदीप कुमार पाल, कार्यकारी अध्यक्ष वंश बहादुर सिंह, कोषाध्यक्ष रवि चौधरी, उपाध्यक्ष अरविंद प्रताप सिंह, सुधीर गढ़ेवाल, संयुक्त महामंत्री एस. रवि, मृगेंद्र कुमार, सचिव संतोष नाले एवं पूरन साहू सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।