भिलाई इस्पात संयंत्र के सेवानिवृत्त कर्मियों के लिए मेडिक्लेम सुविधा बढ़ाने की तैयारी

भिलाई इस्पात संयंत्र के सेवानिवृत्त कर्मियों के लिए मेडिक्लेम सुविधा बढ़ाने की तैयारी


🔴होम्योपैथिक अस्पताल बंद करने का नोटिस जारी

भिलाईनगर, 26 जून 2026। भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) के सेवानिवृत्त कर्मचारियों और उनके परिजनों के लिए एक ओर जहां सेल प्रबंधन वर्ष 2026-27 की नई मेडिक्लेम योजना को अंतिम रूप देने में जुटा है, वहीं दूसरी ओर 1 जुलाई 2026 से होम्योपैथिक अस्पताल को बंद किए जाने के लिए प्रबंधन द्वारा नोटिस जारी किए जाने की खबर ने कर्मचारियों और पेंशनरों की चिंता बढ़ा दी है।

सेल की प्रस्तावित मेडिक्लेम योजना 11 जुलाई 2026 से 10 जुलाई 2027 तक लागू होगी। इस योजना का लाभ देशभर के लगभग 1.25 लाख सेवानिवृत्त कर्मचारी एवं अधिकारी उठाएंगे। वर्तमान में 70 वर्ष तक की आयु वाले एक व्यक्ति के लिए वार्षिक प्रीमियम 9,076 रुपये तथा पति-पत्नी के लिए 18,156 रुपये निर्धारित है। वहीं 70 से 80 वर्ष आयु वर्ग के लिए प्रीमियम क्रमशः 6,252 रुपये और 13,822 रुपये है।

योजना के अंतर्गत अभी ओपीडी उपचार के लिए प्रतिवर्ष 4,000 रुपये तथा अस्पताल में भर्ती उपचार के लिए 4 लाख रुपये तक की सुविधा उपलब्ध है। नई योजना में ओपीडी सीमा को बढ़ाकर 10,000 रुपये तथा अस्पताल में भर्ती उपचार की सीमा को 6 लाख रुपये करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा रोबोटिक सर्जरी, एयर एम्बुलेंस और उपचार अवधि में कमरे के किराये की सीमा बढ़ाने जैसे सुझाव भी शामिल किए गए हैं।

इसी बीच भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन द्वारा 1 जुलाई 2026 से होम्योपैथिक अस्पताल को बंद करने के लिए नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है। होम्योपैथिक चिकित्सा पर निर्भर बड़ी संख्या में सेवानिवृत्त कर्मचारी और उनके परिवार इस निर्णय से प्रभावित हो सकते हैं। कर्मचारियों के संगठनों का कहना है कि एक ओर स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की बात की जा रही है, वहीं दूसरी ओर वर्षों से संचालित होम्योपैथिक अस्पताल को बंद करना कर्मचारियों के हितों के विपरीत है।

सेवानिवृत्त कर्मचारियों और विभिन्न संगठनों ने मांग की है कि नई मेडिक्लेम योजना में सुविधाओं का विस्तार करने के साथ-साथ होम्योपैथिक अस्पताल को भी यथावत संचालित रखा जाए, ताकि कर्मचारियों और उनके परिवारों को वैकल्पिक चिकित्सा सुविधा मिलती रहे।

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि स्वास्थ्य सुरक्षा केवल बीमा कवरेज बढ़ाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि सभी उपलब्ध चिकित्सा सेवाओं को संरक्षित और सुदृढ़ करने की दिशा में भी कदम उठाए जाने चाहिए।