फिजिक्स था वीक, नीट क्वालिफाई करने बायो और केमेस्ट्री को किया ज्यादा स्ट्रांग, डिप्रेशन में हारना नहीं है, खुद को मजबूत करके पढ़ो सक्सेस स्टोरी, मिलेगा मोटिवेशन

फिजिक्स था वीक, नीट क्वालिफाई करने बायो और केमेस्ट्री को किया ज्यादा स्ट्रांग, डिप्रेशन में हारना नहीं है, खुद को मजबूत करके पढ़ो सक्सेस स्टोरी, मिलेगा मोटिवेशन


फिजिक्स था वीक, नीट क्वालिफाई करने बायो और केमेस्ट्री को किया ज्यादा स्ट्रांग, डिप्रेशन में हारना नहीं है, खुद को मजबूत करके पढ़ो सक्सेस स्टोरी, मिलेगा मोटिवेशन

भिलाई नगर 27 जून । कवर्धा जिले के पंडरिया निवासी डॉ. हेमंत साहू डॉक्टरों को मिलने वाले सम्मान को देखकर बचपन से ही डॉक्टर बनने का सपना सजाने लगे थे। अपने सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने 11 वीं में बायो लेकर तैयारी शुरू की लेकिन सही गाइडेंस के अभाव में बोर्ड एग्जाम के साथ मेडिकल एंट्रेस क्वालिफाई नहीं कर पाए। उस वक्त उन्हें सिर्फ सीजी पीएमटी के बारे में पता था ।

बाकी मेडिकल एंट्रेस से वे अंजान थे। इसी बीच स्कूल में एक दिन सचदेवा कोचिंग के टीचर्स बच्चों को मोटिवेट और गाइड करने पहुंचे तब जाकर हेमंत ने आगे की रणनीति बनाई। एक साल ड्रॉप लेने का फैसला किया। पेशे से शिक्षक पिता ने भी बेटे का हौसला बढ़ाया और एक साल की कड़ी तैयारी के बाद हेमंत ने साल 2014 में नीट क्वालिफाई कर लिया। बस्तर के धुर नक्सल प्रभावित कांकेर जिले के बागोडार में मेडिकल ऑफिसर के रूप में अपनी सेवाएं देने वाले डॉ. हेमंत कहते हैं कि बाकी स्टूडेंट्स की ही तरह तैयारी के दौरान मुझे भी डिप्रेशन होता था। इस डिप्रेशन को कभी खुद पर हावी होने नहीं दिया क्योंकि मेरे पास मेडिकल एंट्रेस क्लीयर करके खुद को साबित करने का बेहतर मौका था। इस अवसर को मैं किसी भी हाल में गंवाना नहीं चाहता था। इसलिए सालभर मन लगाकर तैयारी की जिसका परिणाम सक्सेस लेकर आया। 

फिजिक्स की वीकनेस दूर करने बाकी दोनों सब्जेक्ट को किया स्ट्रांग

डॉ. हेमंत ने बताया कि मेरा फिजिक्स बहुत वीक था। मेडिकल एंट्रेस क्वालिफाई करने के लिए सभी विषयों पर पकड़ बनाना जरूरी था इसलिए मैंने फिजिक्स को क्वालिफाइंग स्कोर का टारगेट बनाकर पढऩा शुरू किया। वहीं कैमेस्ट्री और बायो को बहुत ज्यादा स्ट्रांग किया। जिसका फायदा फाइनल एग्जाम में मिला। कोचिंग में ड्रॉपर बैच के लोगों को कड़ी मेहनत करता देखकर मोटिवेशन मिलता था। उनको पढ़ता देख मैं अपनी पढ़ाई पर फोकस करता था। थोड़ी दिक्कत नीट और पीएमटी को लेकर हुई। साल 2014 में ये क्लीयर नहीं था कि नीट होगा या पीएमटी। दोनों में से किसे टारगेट करके पढ़ा जाए इस पर असमंजस था। बाद में मैंने टीचर्स से डिस्कस करके नीट की तैयारी शुरू की। 

सचदेवा ने बदली जिंदगी

मेडिकल एंट्रेस की तैयारी सचदेवा न्यू पीटी कॉलेज से करने वाले डॉ. हेमंत ने बताया कि जब मैं 11 वीं में था सिर्फ पीएमटी के बारे में सुना था। डॉक्टर बनने के लिए और कौन-कौन सी परीक्षाएं होती है, कैसे पढऩा है, सिलेबस कैसा होता है ये सब सचदेवा की डेमो क्लास अटेंड करके पता था। स्कूल में सचदेवा की फैकल्टी पढ़ाने पहुंची थी उसी दिन से मेरी जिंदगी बदल गई। सचदेवा के टीचर्स से बाकी एग्जाम और कोचिंग के बारे में सही गाइडेंस मिला। एक साल के ड्रॉप में ही सफलता मिल गई। सचदेवा के डायरेक्टर चिरंजीव जैन सर का मोटिवेशन भी ड्रॉप इयर में बहुत काम आया। उनके लेक्चर दिलो दिमाग पर बिजली की तरह असर करते थे। यहां की फैकल्टी बहुत अच्छी है। पढ़ाई के साथ-साथ यहां आपके मेंटल और फिजिकल हेल्थ को स्ट्रांग करने के लिए हेल्दी टिप्स दिए जाते हैं। क्योंकि तैयारी के दौरान सिर्फ पढऩा काफी नहीं है खुद को स्वस्थ रखना भी जरूरी है। सचदेवा की टेस्ट सीरिज में हेल्दी कॉम्पिटिशन से कान्फिडेंस बढ़ता है। यहां अपनी प्रतिभा को निखारने का अच्छा प्लेटफार्म मिलता है। 

एग्जाम पैटर्न के हिसाब से पढ़े

नीट की तैयारी करने वाले स्टूडेंट्स से कहना चाहता हूं कि आप एग्जाम पैटर्न के हिसाब से पढ़े। सबकुछ पढऩे की बजाय बेसिक पर पहले काम करे। जब बेसिक स्ट्रांग हो जाए तो मेडिकल एंट्रेस के सिलेबस को फॉलो करें। अपने आप पर भरोसा करें। डिप्रेशन हो तो कुछ दिन का बे्रक लेकर तन-मन को तरोताजा करो और फिर दोगुनी ऊर्जा से तैयारी शुरू करो।