🔴छोटे प्रयासों से ही पृथ्वी का संरक्षण संभव” – डॉ. अजय सिंह
दुर्ग 23 अप्रैल 2026। अपने स्तर पर पर्यावरण संरक्षण का प्रयास कर पृथ्वी का संरक्षण किया जा सकता है। विद्यार्थियों एवं आम नागरिकों को अपने-अपने स्तर पर पर्यावरण संरक्षण हेतु प्रयास करना चाहिए। यदि किसी जगह पानी व्यर्थ बह रहा हो और आप नल की टोटी को बंद कर देते है, तो यह विश्व पृथ्वी दिवस पर पृथ्वी के संरक्षण के लिये आपका सबसे बड़ा योगदान होगा। ये उद्गार शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय दुर्ग के प्राचार्य डॉ. अजय कुमार सिंह ने आज व्यक्त किये। डॉ. सिंह आज महाविद्यालय में लायंस स्टूडेंट क्लब दुर्ग विजन तथा भूगर्भशास्त्र विभाग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित विश्व पृथ्वी दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। डॉ. सिंह ने विद्यार्थियों को आव्हान किया कि कक्षा समाप्ति के पश्चात् कक्षा के इलेक्टिक स्वीच तथा पंखों को बंद कर दें तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में यह हमारा सराहनीय प्रयास होगा।
भूगर्भशास्त्र की स्नातकोत्तर छात्रा छबि परमार तथा लोकेश्वरी देशमुख एवं जयंती बाघ द्वारा संयुक्त रूप से प्रस्तुत सरस्वती वंदना के साथ आरंभ कार्यक्रम का संचालन फाल्गुनी साहू ने किया। इस अवसर पर लायंस क्लब दुर्ग विजन के डिस्टीक्ट चेयर पर्सन पी.बी. सक्सेना ने अपने उद्बोधन में ग्लोबल वार्मिंग तथा जलवायु परिवर्तन को प्रमुख समस्या बताते हुए वर्तमान समय में दुर्ग, भिलाई क्षेत्र में निरंतर बढ़ते तापमान पर चिंता जाहिर की। भूगर्भशास्त्र के विभागाध्यक्ष डॉ. एस. डी. देशमुख ने अपने संबोधन में विश्व पृथ्वी दिवस की महत्ता प्रतिपादित करते हुए कहा कि आज का दिन हम सभी को पृथ्वी संरक्षण के प्रति दायित्वों का बोध कराने का दिन है। डॉ. देशमुख ने संस्कृत के श्लोक के माध्यम से अपना वक्तव्य रखा। समारोह में धन्यवाद ज्ञापन लायंस क्लब दुर्ग विजन की डॉ. रूचि सक्सेना ने किया।

इस अवसर पर आयोजित आमंत्रित व्याख्यान में भूगर्भशास्त्र के प्राध्यापक डॉ. प्रशांत श्रीवास्तव ने पावर प्वाइंट प्रस्तुतिकरण के माध्यम से रेन वाटर हार्वेस्टिंग के संबंध में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि ग्रीष्म ऋतु के पश्चात् आने वाले वर्षा ऋतु में प्रारंभ की 3-4 बारिश के पानी को रेन वाटर हार्वेस्टिंग हेतु उपयोग नही करना चाहिए। इससे भूमिगत जल को प्रदूषित होने से बचाया जा सकता है, क्योंकि ग्रीष्म ऋतु में अधिक तापमान के कारण प्रदूषक तत्व वायु मण्डल में उपस्थित रहते है, और पहिली बारिश में वे सभी वर्षा जल के साथ पृथ्वी की सतह पर आ जाते है। लायंस स्टूडेंट क्लब वी.वाय.टी. पी.जी. आटोनॉमस कालेज, दुर्ग के अध्यक्ष रूचि देशमुख ने वेस्ट मैनेजमेंट पर सारगर्भित प्रस्तुतिकरण किया। बी.एससी छठवें सेमेस्टर की छात्रा अर्पणा बाजपेयी ने ग्लोबल वार्मिंग पर प्रस्तुतिकरण देते हुए बताया कि जल वाष्प, मीथेन, कार्बन डाय आक्साइड तथा नाइट्सआक्साइट आदि ग्रीष्म हाउस गैस है। एयर कंडीश्नर तथा फोम के गद्दे से भी हानिकारक सीएफसी गैसे उत्सर्जित होती है। इस अवसर पर भूगोल के विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार मिश्रा, डॉ. प्रशांत दुबे, लायंस क्लब दुर्ग विजन के डिस्टीक चेयर पर्सन श्री पी.बी. सक्सेना, माइको चेयर पर्सन पी.एन.जे.एफ. लायन मिनाश्री अग्रवाल, लायन रूचि सक्सेना, लायन विनती अग्रवाल सहित भूगर्भशास्त्र विभाग के छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

