देश में रह जाएंगे सिर्फ ये 4 सरकारी बैंक, बाकियों का मिट जाएगा नामोनिशान!

देश में रह जाएंगे सिर्फ ये 4 सरकारी बैंक, बाकियों का मिट जाएगा नामोनिशान!


🔴क्यों बैंकों के मर्जर के पीछे पड़ी सरकार, किसे नफा, किसको नुकसान ?

सीजी न्यूज ऑनलाइन 03 नवंबर। Banking Merger in India: बैंकिंग सेक्टर में बड़े बदलाव की तैयारी की जा रही है. सरकार एक बार फिर से बैंकों के मेगा मर्जर की तैयारी कर रही है. नीति आयोग की सिफारिश पर सरकार छोटे सरकारी बैंकों का बड़े बैंकों के साथ विलय करने की तैयारी कर रही है

Bank Merger: बैंकिंग सेक्टर में बड़े बदलाव की तैयारी की जा रही है. सरकार एक बार फिर से बैंकों के मेगा मर्जर की तैयारी कर रही है. नीति आयोग की सिफारिश पर सरकार छोटे सरकारी बैंकों का बड़े बैंकों के साथ विलय करने की तैयारी कर रही है. मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो सरकार के विलय प्लान के तहत 4 सरकारी बैंकों को बड़े बैंकों में विलीन करने का प्लान है. इस मेगा मर्जर के तहत सरकार इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB), सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (CBI), बैंक ऑफ इंडिया (BOI) और बैंक ऑफ महाराष्ट्र (BoM) का विलय कर सकती है.

इन 4 बैंकों का अस्तित्व हो जाएगा खत्म

सरकार के इस फैसेल से उन 4 बैंकों का अस्तित्व खत्म हो जाएगा.जिन लोगों का इन बैंकों में खाता है,उन्हें परेशानी हो सकती है. उनके लिए बैंकिंग कागजी काम बढ़ जाएंगे. नए बैंक के ग्राहक बनने पर चेकबुक से लेकर पासबुक बदलने होंगे.सरकार छोटे बैंकों को देश के बड़े सरकारी बैंकों जैसे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा जैसे बैंकों में मर्ज करना चाहती है.

जिन बैंकों का विलय होगा, निम्नलिखित बैंक शामिल हैं.

इस प्रस्ताव का ड्राफ्ट ‘रिकॉर्ड ऑफ डिस्कशन’ के रूप में तैयार हो चुका है. अब इसे कैबिनेट मीटिंग और फिर प्रधानमंत्री कार्यालय भेजा जाएगा. अगर इसे मंजूरी मिलती है तो वित्त वर्ष 2026-27 में बैंकों के मेगा मर्जर को पूरा किया जाएगा.

  1. इंडियन ओवरसीज बैंके
  2. सेंट्रल बैंक ऑफइंडिया
  3. बैंक ऑफ इंडिया
  4. बैंक ऑफ महाराष्ट्र

बैंकों के मर्जर से कितना नफा-नुकसान

छोटे बैंकों की वजह से बढ़ते बैंकिंग लागत, लगातार बढ़ता NPA बैंकों पर दवाब बढ़ाता है. बैंकिंग सिस्टम को मजबूत बनाने के साथ-साथ उन्हें ग्लोबल लेवल पर प्रतिस्पर्धा लायक बनाने के मकसद से सरकार बैंकों का मर्जर करना चाहती है. सरकार का मानता है कि विलय से बैंकिंग सिस्टम को मजबूत बनाया जा सकता है. बैंकों के कर्ज बांटने की क्षमता बढ़ेगी. इससे बैंकों का बैंलेंस शीट मजबूत होगा. बैंकिंग कार्यप्रणाली तेज होगी. हालांकि ये पहली बार नहीं हो रहा है . इससे पहले साल 2017 से 2020 की बीच में सरकार ने 10 सरकारी बैंकों का मर्जर कर 4 बड़े बैंक बनाए. जिससे बैंकों की संख्या 27 से घटकर 12 रह गई.

विलय के बाद देश में कितने सरकारी बैंकिंग

अगर सरकार का मर्जर प्लान तय समयसीमा में पूरा हो जाता है तो देश में सरकारी बैंकों की संख्या घट जाएगी. देश में केवल चार सरकारी बैंक रह जाएंगे. मेगा मर्जर के बाद भारत में केवल स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI),पंजाब नेशनल बैंक (PNB), बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) और कैनरा बैंक रह जाएंगे.

बैंक के खाताधारकों से लेकर कर्मचारियों पर असर

जाहिर है कि बैंकों का विलय होगा तो उसके खाताधारकों पर असर होगा. वहीं कर्मचारियों पर भी इसका असर पड़ेगा. खाताधारकों के लिए बैंकिंग कागजात में बदलावों की परेशानी बढ़ेगी. नया चेकबुक, पासबुक बनाना होगा. वहीं कर्मचारियों के बीच नौकरी खोने का डर सता रहा है. ब्रांच कम हो सकते हैं, हालांकि सरकार की ओर से आश्वासन मिलता रहा है कि मर्जर का असर नौकरियों पर नही होगा.