CG में निगम-मंडलों में नियुक्तियों के लिए नाम तय, घोषणा की औपचारिकता शेष

CG में निगम-मंडलों में नियुक्तियों के लिए नाम तय, घोषणा की औपचारिकता शेष


सीजी न्यूज ऑनलाइन 02 मार्च। सरकार हाल ही में हुए नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों में मिली सफलता के बाद अब निगम-मंडलों में नियुक्तियों पर विचार कर रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस मुद्दे पर रविवार को कैबिनेट बैठक में अनौपचारिक चर्चा हो सकती है।

इस तरह की नियुक्तियाँ आमतौर पर राजनीतिक संतुलन बनाने, पार्टी कार्यकर्ताओं को पुरस्कृत करने और प्रशासनिक कार्यों को सुचारू रूप से संचालित करने के उद्देश्य से की जाती हैं। यदि इस पर सहमति बनती है, तो जल्द ही इन पदों पर नियुक्तियों की आधिकारिक घोषणा हो सकती है।
लगभग एक वर्ष के लंबे इंतजार के बाद सरकार ने आखिरकार निगम-मंडलों में नियुक्तियों के लिए नाम तय कर लिए हैं। अब चर्चा है कि यह सूची अगले दो-तीन दिनों में जारी हो सकती है। इससे उन नेताओं और कार्यकर्ताओं को बड़ी राहत मिलेगी, जो लंबे समय से पदों के इंतजार में थे।

इस फैसले से न केवल संगठन में संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी, बल्कि प्रशासनिक कामकाज को भी गति मिलेगी। अब देखने वाली बात यह होगी कि किन नामों को जगह मिलती है और सरकार इस सूची को कब औपचारिक रूप से जारी करती है।

ऐसा लगता है कि सरकार ने निगम-मंडलों में नियुक्तियों के लिए संतुलन साधने की कोशिश की है। चर्चा के अनुसार, प्रस्तावित सूची में वे नेता शामिल हैं जो पहले भी महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं और संगठन में प्रभाव रखते हैं।

इसमें दो ऐसे नेता हैं जो विधानसभा चुनाव हार चुके हैं, लेकिन उनकी राजनीतिक सक्रियता और संगठन में पकड़ को देखते हुए उन्हें मौका दिया जा रहा है। इसके अलावा, रमन सरकार के कार्यकाल में मंडल में अध्यक्ष या उपाध्यक्ष रह चुके तीन नेताओं को भी शामिल किया गया है, जिससे अनुभवी नेताओं को जगह देने की रणनीति साफ नजर आती है।

रायपुर के पूर्व शहर अध्यक्ष का नाम भी सूची में होना संकेत देता है कि सरकार क्षेत्रीय संतुलन और संगठन के पुराने वफादार नेताओं को उपकृत करने की रणनीति अपना रही है। अब देखना यह होगा कि जब आधिकारिक सूची जारी होगी, तो इसमें कौन-कौन से नाम शामिल होंगे और पार्टी के भीतर इस पर क्या प्रतिक्रिया आती है।

अगर यह चर्चा सही है कि पार्टी ने पहले तय किए गए मापदंडों को दरकिनार कर दिया है, तो यह संगठन के भीतर असंतोष का कारण बन सकता है। पहले तय किया गया था कि विधानसभा चुनाव हार चुके नेता, पूर्व में निगम-मंडलों में पद पर रह चुके लोग और संगठन के मौजूदा पदाधिकारियों को दोबारा मौका नहीं मिलेगा, बल्कि नए चेहरों को प्राथमिकता दी जाएगी।

लेकिन अब जिन नामों की चर्चा हो रही है, उनमें चुनाव हारे हुए नेता, पूर्व में निगम-मंडलों में रहे पदाधिकारी और संगठन से जुड़े लोग शामिल हैं। इससे साफ है कि पार्टी ने अपने ही नियमों में ढील दी है, संभवतः राजनीतिक संतुलन और संगठन के वरिष्ठ नेताओं को संतुष्ट करने के लिए।

अब सवाल यह उठता है कि इस फैसले से नए चेहरों को मौका न मिलने से असंतोष तो नहीं बढ़ेगा? साथ ही, क्या इससे पार्टी के कार्यकर्ताओं में यह संदेश नहीं जाएगा कि पुराने और प्रभावशाली नेताओं को ही प्राथमिकता मिलती है, चाहे पहले क्या तय हुआ हो? यह देखने वाली बात होगी कि इस सूची के जारी होने के बाद पार्टी के भीतर कैसी प्रतिक्रिया आती है।
अगर यह चर्चा सही है कि पार्टी ने पहले तय किए गए मापदंडों को दरकिनार कर दिया है, तो यह संगठन के भीतर असंतोष का कारण बन सकता है। पहले तय किया गया था कि विधानसभा चुनाव हार चुके नेता, पूर्व में निगम-मंडलों में पद पर रह चुके लोग और संगठन के मौजूदा पदाधिकारियों को दोबारा मौका नहीं मिलेगा, बल्कि नए चेहरों को प्राथमिकता दी जाएगी।