भिलाई नगर 27 सितंबर । हिंदुस्तान स्टील एम्प्लाइज यूनियन (सीटू) द्वारा ग्रेच्युटी मामले में दायर परिवाद की सुनवाई में प्रबंधन की ओर से आज भी कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया जा सका । 26 अप्रैल की सुनवाई में उप मुख्य श्रम आयुक्त ने प्रबंधन को निर्देश दिया था कि वह यूनियन द्वारा दायर की गई परिवाद और इसके समर्थन में जमा किए गए दस्तावेजों के प्रत्युत्तर में अपना पक्ष लिखित में अगली सुनवाई में प्रस्तुत करें तथा उसकी एक प्रतिलिपि सीटू यूनियन को भी उपलब्ध कराएं ताकि उस पर यूनियन भी अपना पक्ष अगली सुनवाई में रख दें। किंतु प्रबंधन किसी ना किसी कारण से सुनवाई के दौरान उपस्थित ना होकर अगली तारीख हेतु निवेदन कर रही थी। उप मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय), श्री आर के पुरोहित द्वारा की गई आज की सुनवाई में यूनियन की ओर से महासचिव एसपी डे एवं सचिव अजय सोनी तथा प्रबंधन की ओर से महाप्रबंधक श्री जे. एन. ठाकुर उपस्थित हुए।
ज्ञात हो कि सेल कारपोरेट कार्यालय से 26/11/2021 को जारी आदेश द्वारा सेल के कर्मियों की ग्रेच्युटी को भी सीलिंग कर दिया गया है। आदेश के अनुसार 31 अक्टूबर 2021 को या उससे पूर्व सेवानिवृत्त हुए कर्मियों को वेतन पुनर्निर्धारण पूर्व मूल वेतन तथा डीए के आधार सेल ग्रेच्युटी नियम की गणना अनुसार ग्रेच्युटी प्राप्त होगी, अर्थात 30 वर्ष के सेवा पर उन्हें (15/26)×(मूल वेतन+डीए)×(सेवा वर्ष) तथा 30 वर्ष के पश्चात प्रत्येक 1 वर्ष की सेवा काल पर 1 महीने की मूल वेतन व डीए के बराबर ग्रेच्युटी प्राप्त होगा।
भविष्य में सेवानिवृत्त होने वाले जिन कर्मियों का ग्रेच्युटी 20 लाख के ऊपर बनेगा उनकी ग्रेच्युटी को 31 अक्टूबर 2021 को वेतन पुनर्निर्धारण पूर्व बेसिक और डीए के आधार पर की गई गणना अनुसार या 20 लाख या जो अधिक हो, पर सीमित कर दिया जाएगा ।
श्रम विधानों का पालन करना स्थानीय प्रबंधन की जिम्मेदारी – सीटू
सीटू महासचिव एसपी डे न ने कहा कि कॉरपोरेट जो भी आदेश जारी करें, उस आदेश को लागू करते समय वह विधि सम्मत है यह सुनिश्चित करना स्थानीय प्रबंधन की जिम्मेदारी है। कॉरपोरेट प्रबंधन की जिम्मेदारी कंपनी एक्ट का पालन करना है जबकि स्थानीय प्रबंधन की जिम्मेदारी उन सभी कानूनों का अनुपालन करना है जिसका फैक्ट्री एवं फैक्ट्री में कार्यरत मजदूरों कर्मचारियों से संबंध है जैसे फैक्ट्री एक्ट, मजदूरी भुगतान अधिनियम, भविष्य निधि भुगतान अधिनियम , ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम, बोनस भुगतान अधिनियम आदि । यदि सेल कार्पोरेट कार्यालय के आदेशानुसार प्रबंधन सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के ग्रेच्युटी में किसी भी तरह की कटौती करती है तो यह उपादान भुगतान अधिनियम 1972 का उल्लंघन होगा। अतः प्रबंधन को इस तरह के किसी भी कानूनी उल्लंघन से बचना चाहिए।
एक्ट बनने से पहले से इस्पात कर्मियों को एनजेसीएस में मिला ग्रेच्युटी का अधिकार
सीटू नेता ने कहा कि ग्रेच्युटी एक्ट 1972 में बना किंतु ग्रेच्युटी एक्ट बनने से काफी पहले इस्पात कर्मियों को 28 अक्टूबर 1970 को हुए पहले एनजेसीएस समझौता के माध्यम से यह अधिकार प्राप्त हुआ है।
सिर्फ इस्पात कर्मियों को अब तक मिलता रहा असीमित ग्रेच्युटी
एनजेसीएस के प्रथम समझौता में प्राप्त असीमित ग्रेजुएटी को अब तक एनजेसीएस में हुए सभी समझौतों में बरकरार रखा गया। पिछले वेतन समझौता में भी प्रबंधन ने कहा था कि मंत्रालय से काफी दबाव है कि इस्पात कर्मियों की ग्रेच्युटी को भी अन्य कर्मियों की तरह किया जाए किंतु एनजेसीएस के सभी यूनियनों के विरोध के कारण प्रबंधन द्वारा इसे सीमित नहीं किया जा सका।

