ट्रेन को बीच रास्ते छोड़ गया लोको पायलट, बोला- ‘मेरी शिफ्ट खत्म’, 3 घंटे चला ड्रामा

ट्रेन को बीच रास्ते छोड़ गया लोको पायलट, बोला- ‘मेरी शिफ्ट खत्म’, 3 घंटे चला ड्रामा


सीजी न्यूज ऑनलाइन 06 मार्च 2026। ये ट्रेन 4 मार्च को मालदा से सिलीगुड़ी जा रही थी. दोपहर 2:52 बजे रेल ठाकुरगंज रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर पहुंची और वहीं खड़ी रह गई. क्योंकि लोको पायलट ने आगे बढ़ने से इनकार कर दिया. इस वजह से सैकड़ों यात्री प्लेटफॉर्म पर ही कंफ्यूज खड़े रहे. उन्हें नहीं समझ आया कि ट्रेन आगे क्यों नहीं बढ़ रही है.लोको पायलट ने शिफ्ट पूरी करने के बाद ट्रेन बीच स्टेशन पर रोक दी.

शिफ्ट खत्म होने के बाद काम करने का मन किसका करता है, लेकिन करना ही पड़ता है. नौकरी चीज ही ऐसी है. अंदर का विद्रोही कमजोर हो जाता है. हालांकि ओवरटाइम करना मजबूरी है या हालात की जरूरत ये केस टू केस डिपेंड करता है. और व्यक्ति? हां उस पर भी डिपेंड करता है. सामने वाला जिद्दी हो तो काम निकलवाना मुश्किल होता है. बिहार में एक लोको पायलट ने शिफ्ट खत्म होने के बाद ट्रेन को बीच रास्ते ही छोड़ दिया. इस चक्कर में गाड़ी घंटों खड़ी रही.

बताया गया कि इस ट्रेन को मालदा से सिलीगुड़ी तक जाना था. लेकिन लोको पायलट की 9 घंटे की शिफ्ट पूरी हो चुकी थी. इसलिए उसने ट्रेन को बिहार के ठाकुरगंज रेलवे स्टेशन पर ही रोक दिया.

NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, ये ट्रेन 4 मार्च को मालदा से सिलीगुड़ी जा रही थी. दोपहर 2:52 बजे रेल ठाकुरगंज रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर पहुंची और वहीं खड़ी रह गई. क्योंकि लोको पायलट ने आगे बढ़ने से इनकार कर दिया. इस वजह से सैकड़ों यात्री प्लेटफॉर्म पर ही कंफ्यूज खड़े रहे. उन्हें नहीं समझ आया कि ट्रेन आगे क्यों नहीं बढ़ रही है.

स्टेशन अधिकारियों ने ड्राइवर से ट्रेन बीच में रोकने का कारण पूछा, तो उसने बताया कि उसके काम के घंटे पूरे हो गए हैं और वो वह तय समय से ज्यादा ट्रेन नहीं चला सकता. वो बिना आराम करे आगे शिफ्ट कंटिन्यू नहीं कर पाएगा. अधिकारियों ने लोको पायलट को मनाने की कोशिश की मगर वो अपनी बात पर अड़ा रहा.

बताते चलें कि ठाकुरगंज रेलवे स्टेशन से सिलीगुड़ी की दूरी लगभग 51.5 किलोमीटर है.

इसके बाद पास के स्टेशन से एक रिलीफ ड्राइवर को बुलाना पड़ा. तब जाकर लगभग 180 मिनट की देरी के बाद ट्रेन ने अपनी यात्रा फिर से शुरू की.

दरअसल, रेलवे की गाइडलाइंस के मुताबिक एक लोको पायलट एक बार में सिर्फ 9-10 घंटे ही काम कर सकता है. ताकि उसे ओवरटाइन ना करना पड़े. वहीं, अगर ड्यूटी बढ़ाई जाती है तो लोको पायलट को 9 घंटे की ड्यूटी पूरी होने से कम से कम 2 घंटे पहले सूचित किया जाना चाहिए कि उनकी ड्यूटी बढ़ाई जा रही है. लेकिन कुल ड्यूटी 11 घंटे से ज्यादा नहीं हो सकती.

अगर लोको पायलट की 11 घंटे की ड्यूटी के बाद भी ट्रेन अपने डेस्टिनेशन तक नहीं पहुंची या लोको पायलट की बदली आदि नहीं हुई और अगले 1 घंटे की यात्रा करने पर ऐसा संभव है, तो 12 घंटे की ड्यूटी लगाई जा सकती है. लेकिन 12 घंटे से ज्यादा नहीं.