सेक्टर-9 अस्पताल के निजीकरण के विरोध में संयुक्त यूनियनों का जनजागरण अभियान

सेक्टर-9 अस्पताल के निजीकरण के विरोध में संयुक्त यूनियनों का जनजागरण अभियान


🔴यूआरएम विभाग में किया जनसंपर्क, बोले- स्वास्थ्य सेवा व्यापार नहीं, जनता का अधिकार

भिलाईनगर, 09 जुलाई 2026। सेक्टर-9 अस्पताल के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में संयुक्त ट्रेड यूनियनों ने जनजागरण अभियान तेज कर दिया है। अभियान के तहत गुरुवार को यूनियन प्रतिनिधियों ने यूआरएम विभाग में कर्मचारियों से जनसंपर्क कर अस्पताल के निजीकरण का विरोध करते हुए सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की मांग उठाई।

यूनियन नेताओं ने कहा कि इस्पात मंत्रालय और सेल कॉर्पोरेट स्तर पर लिए जा रहे निर्णयों के तहत यह प्रचारित किया जा रहा है कि सार्वजनिक अस्पताल स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे बड़ी समस्या हैं, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है। उनका कहना है कि यदि सरकारी और सार्वजनिक अस्पतालों में डॉक्टरों, दवाइयों या आधुनिक उपकरणों की कमी है तो इसके लिए वर्षों से पर्याप्त निवेश और नियमित भर्तियां नहीं होना जिम्मेदार है, न कि सार्वजनिक व्यवस्था।

कोरोना काल का दिया उदाहरण

संयुक्त यूनियनों ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान देश के सरकारी और सार्वजनिक अस्पतालों ने लाखों लोगों की जान बचाई। भिलाई का सेक्टर-9 अस्पताल भी इस दौरान लोगों के लिए सबसे बड़ा सहारा बना। वहीं निजी अस्पतालों के महंगे इलाज के कारण कई परिवार आर्थिक संकट में आ गए, जबकि सार्वजनिक अस्पतालों ने कम लागत में बेहतर उपचार उपलब्ध कराया।

‘बीएसपी अस्पताल पर आज भी लोगों का भरोसा’

यूनियन का दावा है कि भिलाई के लोगों का आज भी बीएसपी के सेक्टर-9 अस्पताल पर सबसे अधिक विश्वास है। कई बार निजी अस्पताल गंभीर मरीजों का इलाज करने में असमर्थ होने पर उन्हें बीएसपी अस्पताल रेफर करते हैं। ऐसे में अस्पताल का निजीकरण जनता और कर्मचारियों के हितों के खिलाफ होगा।

सरकार से रखीं प्रमुख मांगें

संयुक्त ट्रेड यूनियनों ने मांग की कि:

  • सेक्टर-9 अस्पताल का निजीकरण तत्काल रोका जाए।
  • डॉक्टरों, नर्सों, तकनीशियनों और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की नियमित भर्ती की जाए।
  • अस्पताल में आधुनिक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराए जाएं।
  • दवाइयों और स्वास्थ्य सुविधाओं पर सार्वजनिक निवेश बढ़ाया जाए।

यूनियनों ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा कोई व्यापार नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है। सरकार को निजीकरण की बजाय सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए।

इन संगठनों ने लिया हिस्सा

जनजागरण अभियान में इंटक, एटक, एचएमएस, ऐक्टू, सीटू, लोईमू और स्टील वर्कर्स यूनियन के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता शामिल रहे। यूनियनों ने आने वाले दिनों में निजीकरण के विरोध में आंदोलन को और तेज करने का संकेत दिया।