🔴रूस, फ्रांस, US और इजरायल से बुलाए जा रहे डिफेंस अताशे
सीजी न्यूज ऑनलाइन 24 मार्च 2026। भारत ने अपनी रक्षा कूटनीति में बहुत बड़ा बदलाव किया है। अब भारत दुनिया के बड़े रक्षा आयातक से निकलकर रक्षा निर्यातक बनने की दौर में शामिल हो रहा है। अब उन देशों पर फोकस किया जा रहा है, जो हमारे हथियारों के संभावित खरीदार हैं।
पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत ने अपनी सैन्य कूटनीति में अप्रत्याशित बदलाव की पहल शुरू कर दी है। भारत दुनिया भर में अपने डिफेंस अताशे नेटवर्क में फेरबदल कर रहा है और उन देशों से इन्हें बुलाया जा रहा है, जहां इनकी सबसे ज्यादा तैनाती थी। अब डिफेंस अताशे को उन देशों में शिफ्ट किया जा रहा है, जो भारत में बने रक्षा उपकरण और हथियार के संभावित खरीदार हो सकते हैं या स्वदेशी हथियार खरीद रहे हैं।
पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत की सैन्य कूटनीति में बदलाव
भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने रक्षा मामलों की स्थायी संसदीय समिति को देश की इस नई रक्षा कूटनीति के बारे में बताया है, जिसकी रिपोर्ट पिछले हफ्ते संसद में पेश की गई है। सोमवार को यह जानकारी सामने आई है।
रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सैन्य कूटनीति बदली
भारत सरकार ने पिछले साल ही रक्षा निर्यात को बढ़ा कर साल 2029-30 तक ₹50,000 करोड़ करने का लक्ष्य तय किया था। उसी कड़ी में अब इसके लिए जमीनी कार्रवाई शुरू की गई है। सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने इसके बारे में संसदीय समिति को बताया है-
“जहां तक सैन्य कूटनीति की भूमिका की बात है, यह एक नई चीज है और निर्यात का रोल निभाने के लिए, हमने डिफेंस अताशे में फेरबदल किया है। बड़ी संख्या में अताशे उन देशों में थे, (जहां से हम) उपकरण आयात करते हैं। उन्हें हटा लिया गया है और उन देशों में भेजा गया है, जहां रक्षा उपकरण निर्यात होने की संभावना है।
संसदीय समिति में सीडीएस जनरल अनिल चौहान’
संभावित खरीदारों के बीच कूटनीतिक कोशिश
भारत ने वित्त वर्ष 2024-25 में ₹23,682 करोड़ रुपये का रक्षा निर्यात किया था, जो कि इसके एक साल पहले की तुलना में 12% ज्यादा रहा। लेकिन, तीन-चार वर्षों में इसे दोगुना करने के लिए उन देशों पर फोकस करना जरूरी है, जो भारतीय हथियारों और रक्षा उपकरणों में दिलचस्पी रख रहे हैं। यह डिफेंस अताशे भारत की निजी और सरकारी दोनों रक्षा कंपनियों के निर्यात के लिए कूटनीतिक प्रयास में जुटेंगे।
दक्षिण-पूर्व एशिया, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिकी देशों पर फोकस
भारत की सैन्य कूटनीति में बदलाव का मतलब है कि यह रूस, फ्रांस, अमेरिका और इजरायल जैसे देशों से अपने सैन्य राजनयिकों की संख्या कम कर रहा है; और इसके बदले दक्षिण-पूर्व एशिया, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिकी देशों में इनकी तैनाती बढ़ाई जा रही है-
▪️2021–2025 के बीच भारत का सबसे बड़ा सैन्य निर्यातक रूस रहा है। देश के 40% मिलिट्री हार्डवेयर यहीं से आए हैं।
▪️रूस के बाद फ्रांस का स्थान है, जहां से 29% और इजरायल से 15% रक्षा आयात हुआ है।
लगभग 100 देशों में भारत से निर्यात हो रहे रक्षा उत्पाद
▪️भारत की सैन्य कूटनीति में बदलाव के पीछे की वजह ये है कि अब दुनिया के कई देश भारतीय रक्षा उत्पाद खरीदना चाहते हैं। 2024-25 में करीब 100 देशों ने भारत से रक्षा उपकरणों की खरीद की थी।
▪️भारत के रक्षा उत्पाद निर्यात में प्राइवेट और सार्वजनिक क्षेत्र की 100 से ज्यादा कंपनियां लग हुई हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 2024-25 में ₹15,233 करोड़ का निर्यात प्राइवेट कंपनियों ने और ₹8,389 करोड़ रुपये का एक्सपोर्ट सरकारी कंपनियों ने किया।
भारत से निर्यात होने वाले रक्षा उपकरण और हथियार
▪️भारत से निर्यात होने वाले रक्षा उत्पादों में स्वदेशी हथियारों की एक लंबी लिस्ट है-
▪️इनमें मिसाइलें, आर्टिकली गन, रॉकेट, बख्तरबंद वाहन, समुद्री पेट्रोल वाहन, निजी रक्षा कवच, रडार, सर्विलांस सिस्टम, गोला-बारूद और अन्य उत्पाद।
▪️अधिकारियों का कहना है कि स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान- LCA Mk-1A और एडवांस लाइट हेलिकॉप्टर में भी निर्यात क्षमता है।

