आईएनएल, नगरनार इस्पात संयंत्र, एफएसएनएल उपक्रम खतरे में, रणनीतिक विलय हो सेल में, चीन एवं वियतनाम की नीति से बचने लगे एंटी डंपिंग, इस्पात सचिव से सेफी की बैठक

आईएनएल, नगरनार इस्पात संयंत्र, एफएसएनएल उपक्रम खतरे में, रणनीतिक विलय हो सेल में, चीन एवं वियतनाम की नीति से बचने लगे एंटी डंपिंग, इस्पात सचिव से सेफी की बैठक


भिलाई नगर 6 सितंबर । सेफी पदाधिकारियों ने इस्पात सचिव संदीप पौंड्रिक से नई दिल्ली में उनके कार्यालय में मुलाकात की, इस बैठक में सेफी के द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र के इस्पात उपक्रमों के अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गयी।
05 सितम्बर को संपन्न उक्त बैठक में सेफी के द्वारा विगत कुछ वर्षों से उठाए जा रहे मुद्दों जिनमें मुख्यतः सार्वजनिक क्षेत्र के सभी इस्पात उपक्रमों का रणनीतिक विलय, राष्ट्रीय इस्पात निगम विशाखापट्टनम के पुर्नउत्थान एवं निजीकरण पर विराम, सार्वजनिक क्षेत्र के इस्पात उपक्रमों को कच्चे माल की आपूर्ति की गारंटी तथा इस्पात उत्पादों पर एंटी डंपिंग ड्यूटी लगाने जैसे विषयों पर सारगर्भित चर्चा हुई।
विदित हो कि विगत वर्षों में निजीकरण करने की प्रक्रियायें अत्यंत तेजी से चल रही है जिसके तहत आर आई एन एल, नगरनार इस्पात संयंत्र, एफ एस एन एल जैसे उपक्रम खतरे में है। सेफी ने इन उपक्रमों को निजी हाथों में देने के स्थान पर सेल के साथ रणनीतिक विलय किये जाने की मांग रखी है। सेफी ने इस्पात सचिव के समक्ष पूर्व में हुए सेल-एनटीपीसी संयुक्त उपक्रमों के गठन जैसे प्रयोग अन्य सार्वजनिक उपक्रमों के साथ भी किये जाने का सुझाव रखा।
सेफी ने भारत के इस्पात जगत को चीन, वियतनाम के द्वारा की जा रही डंपिंग से हो रहे नुकसान से बचाने हेतु शासन के द्वारा एंटी डंपिंग ड्यूटी लगाने की मांग रखी। विदित हो कि वर्तमान में इस्पात उद्योग जगत स्टील डंपिंग से अत्यंत बुरी तरह प्रभावित है।
स्टील एक्सीक्यूटिव फेडेरेशन आफ इंडिया ने आग्रह किया है कि इस्पात क्षेत्र के राष्ट्र के तीन महत्वपूर्ण सार्वजनिक उपक्रमों क्रमशः नगरनार स्टील प्लांट, आरआईएनएल एवं एफएसएनएल को विनिवेश करने के बजाए उनका आपस में सेल के साथ रणनीतिक विलय किया जाए। यह रणनीतिक विलय राष्ट्र हित में होने के साथ ही राष्ट्र के समग्र विकास में एक मील का पत्थर साबित होगा। इस संदर्भ में ज्ञात हो कि भारत सरकार द्वारा इस तरह के रणनीतिक विलय बैंको में किया गया जहां इसका बेहतर परिणाम प्राप्त हुआ।
विदित हो कि भारत सरकार की नवीन इस्पात नीति 2030 के तहत इस्पात मंत्रालय के द्वारा सेल को क्षमता विस्तार हेतु निर्देशित किया गया है, इसके अंतर्गत सेल को वर्ष 2030 तक 21 एमटी से 35 एमटी की क्षमता अर्जित करने का लक्ष्य दिया गया है। इस विस्तार हेतु सेल के द्वारा 1 लाख करोड़ रूपये की राशि का निवेश किया जाएगा। इस्पात क्षेत्र के दो सार्वजनिक उपक्रमों नगरनार इस्पात संयंत्र एवं राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड को, जिनकी क्षमता क्रमशः 3 एमटी एवं 7.3 एमटी है एवं दोनों ही संयंत्रों का वर्तमान में विनिवेश प्रस्तावित है।
नगरनार इस्पात संयंत्र 3 एमटी की क्षमता के साथ 24000 करोड़ की लागत से अत्यंत आधुनिक तकनीक के साथ बना इस्पात संयंत्र है जो कि कच्चे लौह अयस्क की खदानों से परिपूर्ण इकाई है। इसे चलाने के लिए मात्र 200 अधिकारी एवं 1000 कर्मचारी उपलब्ध है जो कि अपर्याप्त है। इन परिस्थितियों में इस संयंत्र की भी लाभार्जन क्षमता भारी रूप से प्रभावित हुई है। इसी प्रकार राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड 7.3 एमटी की क्षमता के साथ कुशल तकनीकी विशेषज्ञों से परिपूर्ण इकाई है जो कि वर्तमान में कच्चे लौह अयस्क की कमी एवं ऊंची कीमतों से जूझ रहा है व वर्तमान में आरआईएनएल को आधी क्षमता पर संचालित करना ही मुश्किल हो रहा है।
सेफी सार्वजनिक उपक्रम सेल के द्वारा 1 लाख करोड़ के निवेश के साथ क्षमता विस्तार किए जाने तथा नगरनार इस्पात संयंत्र एवं राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड के विनिवेश जैसे विरोधाभाषी निर्णयों के स्थान पर सेल के विस्तारीकरण की योजना के अंतर्गत नगरनार इस्पात संयंत्र एवं राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड के रणनीतिक विलय की मांग करता है। इस रणनीतिक विलय से सेल की क्षमता विस्तार की योजना बिना किसी प्रतिक्षा अवधि के संपन्न किया जा सकेगा। साथ ही विनिवेश के लिए प्रस्तावित दोनों राष्ट्रीय धरोहरों को भी सुरक्षित किया जा सकेगा। जिससे इन इकाईयों से जुड़े परिवारों, समाजों को प्राप्त प्रत्यक्ष रोजगार तथा इससे सृजित अपरोक्ष रोजगार को सुरक्षित रखा जा सकेगा। सरकार का यह कदम जहां क्षेत्र के विकास को एक नई गति देगा वहीं बस्तर जैसे दुर्गम वनांचल क्षेत्र में सामाजिक, आर्थिक एवं अधोसंरचना विकास को नई दिशा देने में सफल हो सकेगी। इस तरह की रणनीतिक विलय से एक बड़े सार्वजनिक क्षेत्र का उदय होगा जो भारत सरकार के विकास की रणनीति को सफल बनाने में योगदान देगा।
दशकों के मेहनत से बनी इन राष्ट्रीय संपत्तियों को राष्ट्रहित में अक्षुण रखा जा सकेगा। सेफी ने विनिवेश हेतु प्रस्तावित आरआईएनएल एवं नगरनार इस्पात संयंत्र तथा एफएसएनएल का “स्ट्रेटेजिक मर्जर“ का प्रस्ताव केन्द्र सरकार के समक्ष रखा है। यह प्रस्ताव इस्पात मंत्रालय एवं वित्त मंत्रालय को दिया जा चुका है एवं इस विषय पर सेफी पिछले माह इस्पात एवं भारी उद्योग मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी एवं इस्पात एवं भारी उद्योग राज्यमंत्री भूपति राजू श्रीनिवास वर्मा से चर्चा कर अपने प्रस्ताव से अवगत करा चुका है।
सेफी अध्यक्ष नरेन्द्र कुमार बंछोर ने बताया कि प्रस्तावित संयंत्र एक दूसरे के अनुपूरक बन सकते हैं यदि सेल, आरआईएनएल व नगरनार इस्पात संयंत्र तथा एफएसएनएल को एक कंपनी बनाया जाता है तो इस कंपनी के पास उन्नत इस्पात संयंत्र तथा प्रचुर मात्रा में आयरन अयस्क और निर्यात हेतु स्वयं का पोर्ट उपलब्ध रहेगा। जिससे यह कंपनी अत्यंत ही लाभप्रद होगी। अतः भारत सरकार को इसके निजीकरण के स्थान पर इसके पुर्नगठन व रणनीतिक विलय कर इसका सुनियोजित संचालन की कोशिश की जानी चाहिए।
इस्पात सचिव संदीप पौंड्रिक के साथ संपन्न बैठक में सेफी चेयरमेन नरेन्द्र कुमार बंछोर के नेतृत्व में सेफी उपाध्यक्ष नरेन्द्र सिंह व सेफी सहसचिव के वी डी प्रसाद सम्मिलित थे। नरेन्द्र कुमार बंछोर ने बताया कि बैठक अत्यंत ही महत्वपूर्ण था जिसमें सचिव ने लगभग सभी विषयों पर हमारी मांगों पर शीघ्र उचित निर्णय लेने का आश्वासन दिया है।