अगले पाँच वर्षों में 75 हजार नए गाँव डेयरी सहकारिता से जुड़ेंगे: डॉ. मिनेश शाह

अगले पाँच वर्षों में 75 हजार नए गाँव डेयरी सहकारिता से जुड़ेंगे: डॉ. मिनेश शाह


🔴सहकारिता से समृद्धि तक: डेयरी सेक्टर में अगली ‘व्हाइट रिवोल्यूशन’ की तैयारी

दुर्ग, 30 जनवरी 2026। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के अध्यक्ष डॉ. मिनेश शाह ने कहा है कि भारत में दुग्ध उत्पादकता बढ़ाने और किसानों की आय में इज़ाफा करने के लिए अगले पाँच वर्षों में 75 हजार नए गाँवों को डेयरी सहकारिता से जोड़ा जाएगा। उन्होंने बताया कि यह योजना “व्हाइट रिवोल्यूशन-2” की दिशा में एक बड़ा कदम होगी।
डॉ. शाह दाऊ श्री वासुदेव चन्द्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय, दुर्ग के दीक्षांत समारोह में शामिल होने के दौरान सीजी न्यूज़ ऑनलाइन से चर्चा कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि देश में करीब 6.5 लाख गाँव हैं, लेकिन वर्तमान में केवल करीब 2 लाख गाँव ही डेयरी सहकारिता से जुड़े हैं। “काफी बड़ी संख्या में ऐसे गाँव हैं जहाँ किसानों को दूध बेचने के लिए नियमित और भरोसेमंद बाज़ार नहीं मिल पा रहा है। हमारी प्राथमिकता इन गाँवों को सहकारिता के माध्यम से बाज़ार से जोड़ना है,”।

दूध की मात्रा नहीं, अब उत्पादकता पर फोकस

डॉ. शाह ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है, लेकिन प्रति पशु उत्पादकता अभी भी कम है। इसे सुधारने के लिए NDDB द्वारा सेक्स-सॉर्टेड सीमेन, जीनोमिक चिप्स, आर्टिफिशियल इंसेमिनेशन, एम्ब्रियो ट्रांसफर और IVF जैसी आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि सेक्स-सॉर्टेड सीमेन की लागत पहले लगभग 1000 रुपये थी, जो अब घटकर 250 रुपये हो गई है, जिससे मादा बछियों का जन्म बढ़ेगा और किसानों को दीर्घकालीन लाभ मिलेगा।

छत्तीसगढ़ पर विशेष फोकस

छत्तीसगढ़ को लेकर डॉ. शाह ने कहा कि राज्य में डेयरी सहकारिता की स्थिति पहले कमजोर रही है।
“छत्तीसगढ़ की भौगोलिक परिस्थितियाँ और कुछ क्षेत्रों में पूर्व की सुरक्षा चुनौतियाँ भी एक कारण रहीं। अब NDDB ने राज्य के दुग्ध महासंघ का प्रबंधन संभाला है। 11 अधिकारी तैनात किए गए हैं और अब तक लगभग 200 गाँवों में नई डेयरी समितियाँ बनाई जा चुकी हैं,”
उन्होंने कहा कि राज्य में ‘देवप’ ब्रांड के तहत दूध और दुग्ध उत्पादों की मार्केटिंग का विस्तार किया गया है और प्रोसेसिंग प्लांट्स को अपग्रेड कर हाइजीन और फूड सेफ्टी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

आदिवासी व ग्रामीण परिवारों के लिए पशुपालन योजना

डॉ. शाह ने बताया कि NDDB राज्य सरकार के साथ मिलकर ऐसे ग्रामीण और आदिवासी परिवारों को पशुपालन से जोड़ रहा है, जिनके पास पूर्व अनुभव नहीं है।
इस योजना में पशु खरीद पर 50 प्रतिशत सब्सिडी, 40 प्रतिशत ऋण और 10 प्रतिशत अंशदान का प्रावधान है। साथ ही, एक वर्ष तक पशुपालकों को प्रशिक्षण और मार्गदर्शन भी दिया जाता है।

डिजिटल डेयरी सिस्टम लागू

उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ दुग्ध महासंघ में गाँव से लेकर प्रोसेसिंग प्लांट और मार्केटिंग तक पूरी डेयरी श्रृंखला को डिजिटल कर दिया गया है।
“किसान को दूध देने के तुरंत बाद उसकी मात्रा और गुणवत्ता की जानकारी मोबाइल पर मिल जाती है और पूरा डाटा रियल टाइम में फेडरेशन तक पहुँच जाता है,”

रोजगार और निवेश के नए अवसर

डॉ. शाह ने बताया कि छत्तीसगढ़ में डेयरी, कैटल फीड और फल-सब्ज़ी प्रोसेसिंग से जुड़े नए प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है। इनमें करीब 250 करोड़ रुपये तक के निवेश और 200 से 300 से अधिक रोजगार सृजित होने की संभावना है।

डेयरी सुरक्षित और संतुलित पोषण का सबसे अच्छा स्रोत

डॉ. शाह ने कहा कि दूध एक प्राकृतिक और संतुलित आहार है, जिसमें प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स भरपूर होते हैं।
भारत में बड़ी आबादी लैक्टो-वेजिटेरियन है, जिनके लिए दूध और दुग्ध उत्पाद एनिमल प्रोटीन का सबसे बेहतर स्रोत हैं।
उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे आय बढ़ती है, भोजन में कार्बोहाइड्रेट की जगह प्रोटीन की खपत बढ़ती है, और यही कारण है कि दूध व दुग्ध उत्पादों की मांग ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लगातार बढ़ रही है।

Oplus_16908288

मिलावट रोकना NDDB की प्राथमिकता

डॉ. शाह ने कहा कि दूध का बड़ा हिस्सा अभी भी असंगठित क्षेत्र से आता है, जहाँ मिलावट की समस्या सामने आती है।
“NDDB का उद्देश्य अधिक से अधिक दूध को संगठित सेक्टर में लाकर प्रोसेस करना है, ताकि उपभोक्ताओं को सुरक्षित और हाइजीनिक उत्पाद मिल सकें,”

पशु आहार लागत घटाने पर काम

किसानों की लागत कम करने के लिए NDDB रेशन बैलेंसिंग सॉफ्टवेयर और मोबाइल एप चला रहा है, जिससे किसान अपने पशुओं को संतुलित आहार दे सकें। इससे न सिर्फ लागत घटती है, बल्कि दूध उत्पादन बढ़ता और मीथेन उत्सर्जन भी कम होता है।
इसके अलावा टोटल मिक्स राशन (TMR) पर भी काम किया जा रहा है, जिससे किसानों को एक ही पैकेज में पूरा पोषण मिल सके। इस दौरान डॉ सैकत सामंता प्रबंध निदेशक छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी डेयरी फेडरेशन लिमिटेड भी मौजूद थे।