नैक मूल्यांकन से महाविद्यालयों की गुणवत्ता में सुधार-डाॅ. पल्टा, नैक मूल्यांकन पर हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग द्वारा कार्यशाला आयोजन

<em>नैक मूल्यांकन से महाविद्यालयों की गुणवत्ता में सुधार-डाॅ. पल्टा, नैक मूल्यांकन पर हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग द्वारा कार्यशाला आयोजन</em>


दुर्ग 04 अक्टूबर । नैक बंगलुरू द्वारा किये जाने वाले महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयो के मूल्यांकन से उनकी गुणवत्ता, अधोसंरचना, शैक्षणिक एवं अन्य पाठ्येत्तर क्रियाकलापों परीक्षा परिणामों आदि में सुधार होता है। प्रत्येक महाविद्यालय को नैक मूल्यांकन हेतु आगे आना चाहिए। ये उद्गार हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग की कुलपति, डाॅ. अरूणा पल्टा ने आज व्यक्त किये। डाॅ. पल्टा आज हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग द्वारा महाविद्यालयों हेतु ’’नैक मूल्यांकन की नई पद्धति’’ विषय पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में लगभग एक सैंकड़ा महाविद्यालयों के प्राचार्य तथा आईक्यूएसी समन्वयकों को संबोधित कर रही थीं। सेंट थाॅमस काॅलेज, भिलाई के सभागार में आयोजित इस कार्यशाला में डाॅ. पल्टा ने प्रतिभागियों को नैक मूल्यांकन की बारीकियों से अवगत कराया।

कार्यशाला की संयोजक विश्वविद्यालय की डीसीडीसी, डाॅ. प्रितालाल ने बताया कि दीप प्रज्जवलन के साथ कार्यशाला के आरंभ में अतिथियों को पौधा भेंटकर स्वागत विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता छात्र कल्याण, डाॅ. प्रषांत श्रीवास्तव ने किया। स्वागत भाषण सेंट थाॅमस काॅलेज, के प्राचार्य, डाॅ. एम. जे. रायमन ने दिया। इस अवसर पर विषप एच जी एलेक्सीयस, भी उपस्थित थे। कार्यशाला का पहला आमंत्रित व्याख्यान हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, के अधिष्ठाता छात्र कल्याण, डाॅ. प्रषांत श्रीवास्तव द्वारा दिया गया। पावर प्वाइंट प्रस्तुतिकरण के माध्यम से डाॅ. प्रषांत श्रीवास्तव ने नैक के मूल्यांकन प्रणाली के समग्र महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर प्रकाश डाला।

द्वितीय व्याख्यान में शासकीय विष्वनाथ यादव तामस्कर स्वषासी स्नातकोत्तर महाविद्यालय, की डाॅ. जगजीत कौर सलूजा ने नैक मूल्यांकन के क्राइटेरिया क्रमांक 4, 5 एवं 6 का विस्तार से विष्लेषण किया। तृतीय सत्र में शासकीय दिग्िवजय स्वषासी महाविद्यालय, राजनांदगांव की डाॅ. अनिता साहा ने नैक मूल्यांकन के क्राइटेरिया क्रमांक 1, 2 एवं 3 महत्वपूर्ण जानकारी सम्पूर्ण कार्यशाला के दौरान प्रतिभागी प्राचार्यो व प्राध्यापकों ने अनेक प्रष्न पूछकर अपनी जिज्ञासा को शांत किया।

डाॅ. प्रीता लाल ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए बताया कि ए ग्रेड प्राप्त महाविद्यालयों अन्य बड़े महाविद्यालयों के प्रतिनिध्िायों ने नैक मूल्यांकन में अच्छा ग्रेड प्राप्त करने संबंधी अपने अनुभव भी साझा किये। इनमें श्री शंकराचार्य महाविद्यालय, जुनवानी की प्राचार्य डाॅ. अर्चना झा, आईक्यूएसी समन्वयक, डाॅ. राहुल मेने, सेंट थाॅमस काॅलेज, की डाॅ. देबजानी मुखर्जी, भिलाई महिला महाविद्यालय, की प्राचार्य, डाॅ. संध्या मदन मोहन, शैलदेवी महाविद्यालय, अण्डा के प्राचार्य, डाॅ. के. एन. मिश्रा, सांई काॅलेज, के डायरेक्टर हरमीत सचदेव, समाधान काॅलेज, बेमेतरा के डाॅ. अवधेष पटेल शामिल थे।

समापन सत्र में विष्वविद्यालय के कुलसचिव, भूपेन्द्र कुलदीप ने नैक मूल्यांकन की महत्ता पर अपने विचार रखते हुए सभी प्रतिभागियों को धन्यवाद दिया तथा सर्टिफिकेट प्रदान किये। अंत में धन्यवाद ज्ञापन डाॅ. प्रषांत श्रीवास्तव ने किया।