दुर्ग 3 जून । हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग में शोध कर रहे शोधार्थियों एवं फोर्स निर्देशकों के लिए पृथक-पृथक कार्यशालाएं जून माह के अंतिम सप्ताह में आयोजित की जायेंगी। यह जानकारी देते हुए विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता छात्र कल्याण एवं पीएचडी सेल प्रभारी डाॅ. प्रशांत श्रीवास्तव ने बताया कि विश्वविद्यालय की कुलपति, डाॅ. अरूणा पल्टा ने अधिकारियों की बैठक लेकर उक्त दोनों कार्यशालाओ के आयोजन संबंधी निर्देश दिये। डाॅ. श्रीवास्तव ने बताया कि पृथक-पृथक एक-एक दिन के लिए आयोजित होने वाली इन कार्यशालाओ की आयोजन तिथि एवं आयोजन स्थल की सूचना शीघ्र दी जायेगी। विश्वविद्यालय में स्थानाभाव के कारण कार्यशाला का आयोजन विश्वविद्यालय से सम्बद्ध किसी महाविद्यालय में किया जायेगा।
डाॅ. श्रीवास्तव ने बताया कि विश्वविद्यालय में अब तक आयोजित पीएचडी डिग्री हेतु 20 वायवा परीक्षा के दौरान कुलपति, डाॅ. अरूणा पल्टा ने यह महसूस किया कि अनेक बिन्दुओं पर जैसे शोध कार्य की गुणवत्ता शोधार्थी द्वारा प्रस्तुतिकरण, विषय-वस्तु, रिफरेंस, आदि पर समस्त शोध निर्देशकों से भौतिक रूप से चर्चा कर उन्हें यूजीसी के नवीनतम दिशा निर्देश गाइड तथा को-गाइड की जिम्मेदारी, शोधकेन्द्रों में आयोजित होने वाले पूर्व पीएचडी वायवा आदि से संबंधित रचनात्मक सुझाव देने की अप सत्ता है। यही कारण है कि समस्त शोध निर्देशकों हेतु पृथक से कार्यशाला आयोजित की जा रही है। इस कार्यशाला मेेें कुलपति, डाॅ. अरूणा पल्टा स्वयं तथा विश्वविद्यालय अधिष्ठाता छात्र कल्याण, डाॅ. प्रषांत श्रीवास्तव तथा डीसीडीसी डाॅ. प्रीता लाल भी अपना प्रस्तुतिकरण देंगी।
डाॅ. श्रीवास्तव के अनुसार कला, वाणिज्य एवं समाजिक विज्ञान संकाय के शोधार्थियों के प्रतिनिधि मंडल ने कुलपति, डाॅ. पल्टा से मिलकर अपने शोध कार्य के दौरान एकत्रित करने वाले आंकड़ों के विश्लेषण हेतु महत्वपूर्ण कम्प्यूटर साफ्टवेयर एसपीएसएस के व्यवहारिक उपयोग करने की प्रक्रिया समझाने हेतु कार्यशाला आयोजित करने का अनुरोध किया। कुलपति, डाॅ. पल्टा ने इस पर तत्काल संज्ञान लेते हुए इन शोधार्थियों हेतु पृथक से एसपीएसएस साफ्टवेयर के अनुप्रयोग पर कार्यशाला आयोजित करने के निर्देश पीएचडी सेल को दिये।
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