🔴90% तेल आयात पर निर्भर है भारत!
सीजी न्यूज ऑनलाइन 3 मार्च 2026 । भारत ऊर्जा और कीमती धातुओं के लिए आयात पर अत्यधिक निर्भर है, जिसे वेदांता चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने बड़ी आर्थिक कमजोरी बताया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि नीति में तुरंत बदलाव नहीं हुआ तो आम आदमी को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्होंने क्या कहा?
भारत अपनी ऊर्जा और कीमती धातुओं के लिए खतरनाक स्तर तक आयात पर निर्भर है और यही हमारी सबसे बड़ी आर्थिक कमजोरी बनती जा रही है। ईरान जैसे संसाधन-समृद्ध क्षेत्रों में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच वेदांता चेयरमैन अनिल अग्रवाल (Anil Agarwal) ने खुली चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर तुरंत नीति नहीं बदली गई तो आम आदमी को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।
क्या-क्या आयात करता है भारत?
▪️90% कच्चा तेल आयात
▪️66% LPG आयात
▪️50% LNG आयात
▪️$176 बिलियन सालाना
▪️ऑयल-गैस आयात बिल
▪️$65 बिलियन सालाना सोना आयात
▪️कुल आयात का लगभग 30% हिस्सा तेल, गैस और सोना
तेल से देश का परिवहन सिस्टम चलता है। LPG घरों की रसोई जलाती है। LNG कम उत्सर्जन वाले पब्लिक ट्रांसपोर्ट में काम आता है। ऐसे में कीमतों में तेज उछाल सीधे महंगाई, चालू खाते के घाटे, रुपए की कमजोरी और राजकोषीय दबाव को बढ़ाता है।
A major geopolitical shock in a resource-rich region, like the ongoing conflict in Iran, makes India vulnerable because of its huge import dependence in natural resources from below the ground.
We need to immediately declare this sector a national priority, cut cumbersome… pic.twitter.com/d7QrpZrdub
— Anil Agarwal (@AnilAgarwal_Ved) March 3, 2026
अनिल अग्रवाल की सलाह
अनिल अग्रवाल ने साफ कहा है कि प्राकृतिक संसाधन सेक्टर को तुरंत ‘राष्ट्रीय प्राथमिकता’ घोषित किया जाए। उनका तर्क है कि भारत को आयात पर निर्भर रहने की बजाय घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए बड़े फैसले लेने होंगे। उन्होंने जिन बड़े सुधारों की मांग की, वे इस प्रकार हैं:
▪️पब्लिक हियरिंग समेत समय लेने वाली प्रक्रियाओं से छूट
▪️पर्यावरण मंजूरी में सेल्फ-सर्टिफिकेशन मॉडल
▪️बाद में ऑडिट, पहले अनुमति
▪️सरकारी संसाधनों का पूरा उपयोग
▪️सरकारी परिसंपत्तियों में 50% तक हिस्सेदारी निजी खिलाड़ियों को
▪️कर्मचारियों को शेयरहोल्डिंग और छंटनी नहीं
आत्मनिर्भरता रणनीतिक जरूरत
अग्रवाल का कहना है कि दुनिया अब पहले से ज्यादा अस्थिर है। आज के भू-राजनीतिक माहौल में स्थायी दोस्त नहीं होते। आत्मनिर्भरता कोई सपना नहीं, बल्कि आर्थिक और रणनीतिक जरूरत है।
उनका दावा है कि अगर नियम सरल किए जाएं तो निवेश, उत्पादन और रोजगार तीनों बढ़ेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि इस सेक्टर में बड़ी संख्या में युवा महिलाएं आ रही हैं और विदेशों में काम कर रहे भारतीय भी ‘घर वापसी’ कर सकते हैं।
सवाल अब सरकार के सामने है कि क्या भारत जोखिम उठाकर संसाधन उत्पादन बढ़ाएगा, या फिर आयात झटकों से बार-बार अर्थव्यवस्था हिलती रहेगी?

