48 घंटे से हाईवे पर ‘ब्रेक’ सैकड़ों वाहन फंसे, 2 KM लंबा जाम; पेंड्रा-बिलासपुर मार्ग ठप

48 घंटे से हाईवे पर ‘ब्रेक’ सैकड़ों वाहन फंसे, 2 KM लंबा जाम; पेंड्रा-बिलासपुर मार्ग ठप


🔴आखिर जिम्मेदारों की कब खुलेगी नींद ? वैकल्पिक रास्ता भी बेअसर

🔴तलगड़ही नाला पुल पर यातायात व्यवस्था ध्वस्त, MP-UP जाने वाले वाहन भी फंसे; एंबुलेंस फंसी तो जिम्मेदारी कौन लेगा?

सीजी न्यूज ऑनलाइन, 10 अगस्त 2026। रतनपुर-केंदा NH-46 पर पिछले करीब 48 घंटे से यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। मझवानी साईं मंदिर के पास तलगड़ही नाला पुल पर बने हालात के कारण पेंड्रा-बिलासपुर मार्ग पर वाहनों की रफ्तार थम गई है। रतनपुर से मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश की ओर जाने वाले सैकड़ों वाहन करीब 2 किलोमीटर लंबी कतार में फंसे हुए हैं।

दो घंटे का जाम किसी तरह काटा जा सकता है, लेकिन जब दो दिन तक हाईवे पर वाहन आगे न बढ़ें, तो यह महज ट्रैफिक जाम नहीं, बल्कि व्यवस्था पर बड़ा सवाल बन जाता है। सबसे गंभीर बात यह है कि मुख्य मार्ग पर परेशानी के बाद बनाया गया वैकल्पिक रास्ता भी एक वाहन के फंसने के बाद राहत देने में नाकाम साबित हो गया।

दो दिन से सड़क पर जिंदगी थमी, जिम्मेदार कहां हैं?

तलगड़ही नाला पुल के पास जाम की स्थिति लंबे समय से बनी हुई है। वाहनों की संख्या लगातार बढ़ने के कारण करीब दो किलोमीटर तक लंबी कतार लग गई है। इसमें छोटे वाहनों से लेकर भारी मालवाहक और लंबी दूरी के वाहन तक शामिल हैं।

जाम में फंसे वाहन चालकों का कहना है कि उन्हें यह समझ नहीं आ रहा कि आखिर यातायात सामान्य होने में और कितना समय लगेगा। कई वाहन चालक घंटों से नहीं, बल्कि लगातार दूसरे दिन इसी मार्ग पर फंसे हुए हैं।

लंबी दूरी के सफर पर निकले यात्रियों के लिए यह स्थिति और मुश्किल है। रतनपुर से आगे मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश की ओर जाने वाले वाहनों के लिए यह महत्वपूर्ण मार्ग है। ऐसे में जाम का असर सिर्फ स्थानीय यातायात पर नहीं, बल्कि अंतरराज्यीय आवागमन पर भी पड़ रहा है।

वैकल्पिक रास्ता बना, लेकिन वहां भी ‘ब्रेकडाउन’

मुख्य मार्ग पर वाहनों का दबाव कम करने के लिए ठेकेदार द्वारा वैकल्पिक रास्ता तैयार किया गया था। उम्मीद थी कि इससे जाम में फंसे वाहनों को निकाला जा सकेगा, लेकिन वैकल्पिक रास्ते पर ही एक वाहन फंस गया।

इसके बाद वैकल्पिक मार्ग भी प्रभावी रूप से काम नहीं कर पाया और समस्या और गंभीर हो गई। अब सवाल यह उठ रहा है कि वैकल्पिक रास्ता बनाते समय उसकी मजबूती, क्षमता और भारी वाहनों के आवागमन को लेकर पर्याप्त तैयारी की गई थी या नहीं।

2 KM की कतार… हर वाहन चालक का एक ही सवाल—कब खुलेगा रास्ता?

सड़क पर खड़े वाहनों की लंबी कतार और घंटों से परेशान चालक व्यवस्था की ओर देख रहे हैं। लोगों का कहना है कि जब प्रशासन को दो दिन से जाम की जानकारी है तो मौके पर क्रेन, रिकवरी वाहन, यातायात पुलिस और पर्याप्त मानवबल लगाकर रास्ता तत्काल क्यों नहीं खुलवाया जा रहा?

सबसे बड़ा सवाल आपातकालीन सेवाओं को लेकर है। यदि इस जाम में कोई एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड या गंभीर मरीज को ले जा रहा वाहन फंस जाए तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?

सिर्फ जाम नहीं, जनहित का गंभीर मामला

हाईवे पर 48 घंटे तक यातायात बाधित रहना हजारों लोगों की परेशानी का कारण बन सकता है। मालवाहक वाहनों के लंबे समय तक फंसे रहने से परिवहन व्यवस्था प्रभावित होती है, वहीं यात्रियों को समय, ईंधन और अतिरिक्त खर्च का नुकसान उठाना पड़ सकता है।

स्थानीय लोगों और वाहन चालकों का कहना है कि अब आश्वासन नहीं, मौके पर तत्काल कार्रवाई चाहिए। फंसे वाहनों को सुरक्षित निकालने, वैकल्पिक मार्ग को दुरुस्त करने और मुख्य मार्ग पर यातायात बहाल करने के लिए प्रशासन और संबंधित एजेंसी को तत्काल संयुक्त अभियान चलाना चाहिए।

जनता पूछ रही है—जिम्मेदारी किसकी?

48 घंटे से हाईवे जाम है। करीब 2 किलोमीटर तक वाहनों की कतार लगी है। वैकल्पिक रास्ता भी राहत नहीं दे पा रहा है। इसके बावजूद यदि यातायात सामान्य कराने में इतनी देरी हो रही है तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर हाईवे की इस बदहाल व्यवस्था की जिम्मेदारी किसकी है?

अब स्थानीय लोगों और वाहन चालकों की मांग साफ है—जाम हटाइए, रास्ता खुलवाइए और ऐसी व्यवस्था कीजिए कि भविष्य में किसी हाईवे पर लोगों को 48 घंटे तक सड़क पर फंसे रहने की नौबत न आए।