सेंट थॉमस महाविद्यालय, भिलाई में प्राकृतिक खेती पर गेस्ट लेक्चर का किया आयोजन, पारंपरिक खाद बनाने का छात्रों को दिया गया प्रशिक्षण

सेंट थॉमस महाविद्यालय, भिलाई में प्राकृतिक खेती पर गेस्ट लेक्चर का किया आयोजन, पारंपरिक खाद बनाने का छात्रों को दिया गया प्रशिक्षण


भिलाई नगर 14 फरवरी । सेंट थॉमस महाविद्यालय, भिलाई के माइक्रोबायोलॉजी एवं बायोटेक्नोलॉजी स्नातकोत्तर विभाग द्वारा “फार्मलैब – किसानों द्वारा पारम्परिक खाद का विकास” विषय पर एमओयू पार्टनर फार्मलैब्स पुणे के संयुक्त तत्वावधान में गेस्ट लेक्चर का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को पारम्परिक एवं जैविक खाद बनाने की जानकारी प्रदान करना था।

सेंट थॉमस महाविद्यालय विगत 4 दशकों से शिक्षा के क्षेत्र में अपनी अग्रणी भूमिका निभाते आ रहा है । साथ ही अपने सामाजिक सरोकार के उत्तरदायित्व का निर्वाहन भी करता आ रहा है जिससे कि अन्य वर्ग को भी इसका परस्पर लाभ प्राप्त हो सके । इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए सेंट थॉमस महाविद्यालय प्रबंधन के द्वारा प्राकृतिक खेती से संबंधित जानकारी के लिए व्याख्यान का आयोजन किया गया। जिससे कि भविष्य में किसानों को इसका लाभ प्राप्त हो सके।

फार्मलैब्स लैबोरेटरी पुणे के निदेशक डॉ संतोष चव्हाण ने जैविक खाद बनाने की प्रक्रिया पर व्याख्यान दिया। उन्होंने अपने सेमिनार में बताया कि रासायनिक खाद जहरीले एवं वातवरण तथा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं। उन्होंने अपने वक़्तव्य में प्राकृतिक खाद बनाने की विभिन्न विधियों के बारे में समझाया। उन्होंने किसानो की खेती में पिछले पांच वर्षों की यात्रा की भी चर्चा की। अपने उद्बोधन में उन्होंने जैविक खाद बनाने के आरंभ से लेकर अब तक के अपने अनुभव को साझा किया। डॉ संतोष ने सरकार द्वारा जैविक खाद निर्माण के लिए दी जा रही सहायता के लिए आभार व्यक्त किया। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ एम. जी. रोईमोन ने सभी कर्मचारियों को धन्यवाद देते हुए कहा कि सेंट थॉमस महाविद्यालय भिलाई छात्रों के लाभ के लिए इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित करता रहता है। इस कार्यक्रम का निरिक्षण माइक्रोबायोलॉजी एवं बायोटेक्नोलॉजी स्नातकोत्तर विभाग के प्राध्यापकों डॉ वी. शांति, डॉ उज्ज्वला सुपे, डॉ शुभा दीवान, श्रीमती एकता सक्सेना, डॉ अनुभूति झा, एवं सुलगना घोष ने किया। कार्यक्रम का संचालन बायोटेक्नोलॉजी स्नातकोत्तर विभाग की सहायक प्राध्यापक डॉ उज्ज्वला सुपे ने किया।