Gold vs EPF Returns: पिछले 15 सालों में किसने दिया सबसे ज्यादा फायदा?

Gold vs EPF Returns: पिछले 15 सालों में किसने दिया सबसे ज्यादा फायदा?


🔴 जानिए निवेश का बेस्ट ऑप्शन

सीजी न्यूज ऑनलाइन 20 जून 2026 । क्या आप भी अपना पैसा सही जगह इन्वेस्ट करके बड़ा फंड बनाना चाहते हैं? पिछले 15 सालों के आंकड़ों ने सबको हैरान कर दिया है। गोल्ड और EPF में से किसने पिछले 1.5 दशक में सबसे तगड़ा रिटर्न दिया?
निवेश के मामले में हर निवेशक सुरक्षा और बेहतर रिटर्न दोनों की तलाश में रहता है। भारत में गोल्ड और सरकारी स्कीम EPF को सबसे भरोसेमंद माना जाता है। लेकिन जब बात पिछले 15 सालों के रिटर्न की आती है, तो आंकड़े काफी दिलचस्प हैं। एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 15 साल में दोनों एसेट क्लासेस ने बिल्कुल अलग तरीके से परफॉर्म किया है। अगर आप भी लंबे समय के लिए निवेश की योजना बना रहे हैं, तो दोनों का ये कंपैरिजन आपको सही फैसला लेने में मदद करेगा।
पिछले 15 सालों में सोने ने निवेशकों को हैरान करने वाले रिटर्न दिए हैं। आपको बता दें कि साल 2010-11 के आसपास जो सोना लगभग 18,500 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर था, वह आज नई ऊंचाइयों को छू रहा है। वैश्विक संकट, महंगाई और भू-राजनीतिक तनाव के चलते सोने की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है। इस पूरी अवधि में गोल्ड ने लगभग 10% से 11% का सालाना कंपाउंडेड रिटर्न (CAGR) दिया है, जिसने लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टर्स की वेल्थ को तेजी से बढ़ाया है।

EPF की श्योर-शॉट गारंटी

वहीं दूसरी तरफ EPF नौकरीपेशा लोगों के लिए रिटायरमेंट का सबसे बड़ा और सुरक्षित सहारा रहा है। ईपीएफ पर पिछले 15 सालों में ब्याज दर आमतौर पर 8.15% से लेकर 8.65% के बीच घूमती रही है। हालांकि, ईपीएफ में कंपाउंड इंटरेस्ट और टैक्स-फ्री मैच्योरिटी का बेहतरीन फायदा मिलता है, जो इसे एक लो-रिस्क ऑप्शन बनाता है। लेकिन अगर सिर्फ रिटर्न रेट के आंकड़ों को देखें, तो ये पिछले 15 सालों में गोल्ड के मुकाबले थोड़ा पीछे रह गया है।

गोल्ड या ईपीएफ

फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का मानना है कि पिछले 15 सालों के आंकड़े बताते हैं कि सोने ने महंगाई को बेहतर तरीके से मात दी है और ज्यादा वेल्थ क्रिएट की है। हालांकि, इसका ये मतलब बिल्कुल नहीं है कि आपको अपना सारा पैसा सोने में लगा देना चाहिए। ईपीएफ जहां आपको रिटायरमेंट के लिए एक गारंटेड और सुरक्षित फंड देता है, वहीं गोल्ड मार्केट के जोखिम और शेयर बाजार की गिरावट के समय एक ढाल की तरह काम करता है। इसलिए एक मजबूत पोर्टफोलियो के लिए दोनों में संतुलित निवेश ही सबसे समझदारी भरा फैसला है।