गागर में सागर ‘ एवं ‘ साहित्य और समाज ‘ पाठकों को अच्छी प्रेरणा देती हैं, सरयूकान्त झा संस्थान रायपुर ने आचार्य महेश शर्मा के कृतियों की सराहना की

गागर में सागर ‘ एवं ‘ साहित्य और समाज ‘ पाठकों को अच्छी प्रेरणा देती हैं, सरयूकान्त झा संस्थान रायपुर ने आचार्य महेश शर्मा के कृतियों की सराहना की



भिलाई नगर 9 जनवरी । साहित्य मनीषी आचार्य डा.महेशचन्द्र शर्मा की पुस्तक ‘ गागर में सागर ‘ जैसा कि इसके शीर्षक से ज्ञात होता है, ये गूढ़ रहस्यों को सरल भाषा में समझा देती है। कम से कम शब्दों में अधिक से अधिक अर्थ व्यक्त करना इसकी विशेषता है। हमारे जीवन और समाज की सच्चाई के जो आधार सूत्र बनते हैं,वे किसी न किसी रूप में वैदिक साहित्य और प्राचीन हिन्दी साहित्य से प्रेरणा लेतेरहे हैं।जीवन दर्शन के विविध रूप एकत्र होकर आचार्य डा.शर्मा की पुस्तक ‘ गागर में सागर ‘ को पढ़ने में सुलभ होजाते हैं। ये विचार हैं आचार्य सरयूकान्त झा स्मृति संस्थान , रायपुर के सचिव शारदेन्दु झा के। साहित्य विमर्श एवं परिसंवाद प्रसंग में आचार्य डा.शर्मा के रायपुर प्रवास पर उक्त पुस्तक पर शारदेन्दु ने अपने विचारों को रखा।वहीं संस्थान की वरिष्ठ लेखिका श्रीमती अनिता झा ‘आद्या’ ने डा.शर्मा की पुस्तक ‘ साहित्य और समाज ‘ पर अपने विचार रखे।

उन्होंने बताया कि वे शुरू से पढ़ती आरही हैं कि साहित्य समाज का दर्पण है। जब उन्होंने इस पुस्तक को पढ़ा तो पूर्व कथन पुनः सही सिद्ध हुआ। आचार्य डा.महेश शर्मा की पुस्तक ‘ साहित्य और समाज ‘ से यह भी ज्ञात होता कि समाज और साहित्य परस्पर पूरक हैं। ‘ जहाँ न पहुँचे रवि , वहाँ पहुँचे कवि ‘ साहित्य की शक्ति भी ये पुस्तक हमें बताती है। साहित्य और समाज परस्पर सहायक हैं , पुस्तक के लेखक इस भावना को सत्य सिद्ध करने में सफल हुये हैं। ” संस्थान ” की ओर से आचार्य डा. शर्मा को माँ नर्मदा नदी पर अमृतलाल वेगड़ की प्रसिद्ध पुस्तकों के छत्तीसगढ़ी अनुवाद — सुन्दरता के नदी नरबदा एवं अमृत के नरबदा भी सादर भेंट की गयीं। इनकी रचना कीर्तिशेष आचार्य सरयूकान्त झा ने की । श्रीमती अनीता झा ‘आद्या ‘ की पुस्तकें – लाल चौरा एवं नादानियाँ भी साहित्य मनीषी डा. महेशचन्द्र शर्मा को ससम्मान भेंट की गयीं।